अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) पर नगर निगम के संपत्ति कर का करीब 14.98 करोड़ रुपया बकाया है। कोविड -19 काल में भुगतान में विलंब होने पर यह मामला अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पास पहुंच गया है।
नगर निगम ने मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि भ्रामक तथ्य प्रस्तुत कर इसके भुगतान में एएमयू विलंब कर रहा है। दूसरी ओर एएमयू प्रशासन का कहना है कि इस संबंध में वह अपना पक्ष मजबूती से पेश कर रहा है।
सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अवर सचिव (सीयू-वी) को लिखे पत्र में कहा गया है कि एएमयू संपत्ति कर के भुगतान में विलंब कर रहा है। इसकी वजह से विश्वविद्यालय पर बकाया के साथ-साथ 12 प्रतिशत साधारण ब्याज की दर से प्रतिवर्ष ब्याज की अतिरिक्त धनराशि से देयता में वृद्धि हो रही है।
कोविड-19 काल में नगर निगम के दायित्व में असीमित वृद्धि हो गई है। नगर निगम को अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इतनी बड़ी धनराशि रुक जाने के कारण नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ कोविड-19 संक्रमण को रोके जाने के लिए की जाने वाली व्यवस्थाएं प्रभावित हो रहीं हैं।
नगर निगम के कर्मचारियों विशेषकर स्वच्छता कर्मियों के वेतन भुगतान के बाधित होने की स्थिति भी उत्पन्न हो रही है, जिससे नगर निगम की सफाई व्यवस्था के साथ-साथ कानून व्यवस्था के लिए भी समस्या उत्पन्न हो सकती है।
इस संबंध में एएमयू को 3 दिसंबर 2020 को नोटिस ऑफ डिमांड दिया गया है। मंत्रालय से आग्रह किया गया है कि बकाया धनराशि की भुगतान के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या संबंधित को निर्देशित करें।
संपत्ति कर के भुगतान का मामला काफी दिनों से चल रहा है। यूनिवर्सिटी अपना पक्ष पूरी ताकत से रख रही है।
- प्रो. शाफे किदवई, प्रवक्ता, एएमयू
एक बार एएमयू का बैंक खाता हो चुका है सीज
संपत्ति कर भुगतान को लेकर एएमयू का बैंक खाता एक बार सीज हो चुका है। मंडलायुक्त की अध्यक्षता में 15 मई 2019 को एएमयू एवं नगर निगम के अधिकारियों की बैठक हुई थी। मंडलायुक्त ने नगर निगम को निर्देशित किया था कि तीन माह के लिए एएमयू के अटैच किए गए खाते को अवमुक्त कर दिया जाए।
एएमयू के कुलसचिव को निर्देशित किया गया था कि अपना पक्ष उत्तर प्रदेश शासन के समक्ष प्रस्तुत करते हुए पूर्व की भांति वर्तमान में प्रभावी उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम-1959 के अंतर्गत अनुतोष प्राप्त करें। उसके बाद एएमयू द्वारा प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश को पत्र लिखा गया।
नगर निगम द्वारा भी दिशा-निर्देश प्राप्त करने के लिए प्रमुख सचिव को पत्र लिखा गया। जुलाई 2019 में संयुक्त सचिव, नगर विकास अनुभाग, उत्तर प्रदेश शासन के पत्र के माध्यम से नगर निगम को उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम- 1959 के प्रावधानों के अंतर्गत बकाया संपत्तिकर की नियमानुसार वसूली करने का निर्देश दिया गया।
निगम के अधिकारियों का यह भी कहना है कि एएमयू के अधिकारी इससे पूरी तरह अवगत है और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से भुगतान के लिए धनराशि की मांग की है।
यह है मामला...
28 अगस्त 1989 में कुलपति द्वारा शासन से एएमयू नगर पालिका अधिनियम -1916 की धारा 157 (3) के अंतर्गत एएमयू की संपत्तियों को कर मुक्त किए जाने का अनुरोध किया था। 10 अप्रैल 1990 के शासनादेश द्वारा विश्वविद्यालय के अध्ययन कक्ष, प्रयोगशाला, अस्पताल तथा पुस्तकालय को गृहकर तथा जलकर से मुक्त रखा गया है।
दूसरी ओर नगर निगम का तर्क है कि 10 अप्रैल 1990 में शासनादेश उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम-1916 के अंतर्गत निर्गत किया गया था, जो नगर पालिका अधिनियम - 1916 के अंतर्गत आरोपित एवं संग्रहित किए जाने वाले करों पर ही प्रभावी था। परंतु एएमूय की संपत्तियों पर जो संपत्ति कर आरोपित किया गया है, वह उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम - 1959 की व्यवस्था के अंतर्गत प्रथम बार एएमयू के पत्र दिनांक 1/7/05 में दी गई सूचना के आधार पर विहित प्रक्रिया के अंतर्गत निर्धारित किया गया है। 17 नवंबर 1994 से अलीगढ़ नगर की संवैधानिक स्थिति नगर निगम की हो गई थी और यह उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम- 1959 से संचालित है।