एएमयू के 63 वें दीक्षांत समारोह में अध्यक्षता करने पहली बार चांसलर दाउदी बोहरा समुदाय में बेहद आला मुकाम रखने वाले सैय्यदना मुफद्दल सैफ उद्दीन आए थे। शिक्षा के महान संस्थान में उनकी पवित्र मौजूदगी ने अवसर को बेहद विलक्षण बना दिया।
उन्होंने अपने संबोधन में यह बता दिया कि शिक्षा का मकसद तब तक अधूरा है जब तक कि उसके माध्यम से आत्मा और मनुष्यता के गुणों को अपने अंदर विकसित नहीं किया जाए। उन्होंने मानव सभ्यता की उस महान परंपरा का निर्वहन कर दिया जिसमें कहा गया है कि शिक्षा मनुष्य के व्यक्तित्व के विकास के साथ ही उसे मनुष्यत्व से देवत्व की ओर ले जाती है। यही कारण है कि दीक्षांत समारोह कुछ कुछ दीनी रंग में रंगा सा नजर आया।
सैय्यदाना ने कहा कि शैक्षणिक संस्थायें ज्ञान के साथ हमारा हृदय और मस्तिष्क होते हैं। शिक्षा का कार्य हृदय तथा आत्मा की पवित्रता है। हमें शांति तथा सुरक्षा की शिक्षा को फैलाना चाहिये। यह हमारा धार्मिक कर्तव्य भी है। उन्होंने कहा कि अल्लाह तआला ने मानव को सर्वश्रेष्ठ बताया है और उसको शारीरिक व अध्यात्मिक गुणवत्ता दी है। ताकि वह मानवता को परवान चढ़ा सके। अपनी वीरता हिम्मत तथा बुद्धिमता से शिक्षा में उच्च स्थान प्राप्त करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मेरी इच्छा तथा प्रार्थना है कि कुरान कंठस्थ करने की हिम्मत आम मुसलमान में पैदा हो तथा इस संस्था में धार्मिक शिक्षा का जो प्रबंध है उसको और अधिक परवान चढ़ायें ताकि मुस्लिम विश्वविद्यालय के सम्मान में और इजाफा हो। मौलाना मुफद्दल सैफ उद्दीन ने कहा कि इस्लाम शांति का संदेश देता है। इस्लाम ने शिक्षा ग्रहण करने पर सर्वाधिक महत्व दिया है। उन्होंने पवित्र की कुरान की आयत इकरा पर बोलते हुए शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला।