एक करोड़ 95 लाख रुपये सालाना के पैकेज पर प्रतिष्ठित एप्पल कंपनी की नौकरी छोड़ अमेरिका के ग्रीन कार्ड से मोह त्याग जिले की खैर तहसील स्थित पैतृक गांव जरारा में गोशाला खोली। इसके साथ जैविक खेती को आगे बढ़ाया और अब 200 बच्चों के लिए एक आवासीय गुरुकुल खोल कर नि:शुल्क शिक्षा देने की तैयारी है। जहां संस्कृत को मूल विषय बना कर बच्चों को वेद पुराण की तार्किक वैज्ञानिक शिक्षा से जोड़ा जाएगा। ये शानदार पहल की है डाटा साइंटिस्ट अभिनव गोस्वामी ने। वे यहां ऐसा माडल तैयार कर रहे हैं, जो ग्रामीण जीवन को स्वावलंबी बनाकर खुशहाली लाएगा। इस काम में उन्हें अपने परिजनों का पूरा सहयोग मिल रहा है।
अभिनव पूरी दुनिया में ऐसे ही 108 गुरुकुल बनाना चाहते हैं, जहां जैविक खेती और गोशाला के बीच संस्कृत के साथ-साथ आधुनिक विषयों की पढ़ाई होगी। यहां बच्चे रटेंगे नहीं, प्रत्यक्ष देख कर समझेंगे। मसलन, अगर तारा मंडल पढ़ाया जा रहा है तो यह दूरबीनों से मौके पर ही दिखाया भी जाएगा।
यहां बच्चों को अपने जीवन की दिशा तय करने की शिक्षा दी जाएगी ताकि वह अपने गांव में रह कर ही अपनी रुचि के अनुसार स्वावलंबी बनें। इस गुरुकुल में दुनिया की अलग अलग प्रतिष्ठित कंपनियों में काम करने वाले दिग्गज इंजीनियर और विषय विशेषज्ञ गेस्ट फैकल्टी रहेंगे। इसमें बच्चे का चयन उसकी किसी एक खास अच्छी आदत पर आधारित होगा, जो प्रवेश के दौरान मौके पर परखी जाएगी। अभिनव बताते हैं कि इस प्रोजेक्ट में अब तक वह अपनी कमाई के ढाई करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं। पूरा प्रोजेक्ट लगभग 12 करोड़ रुपये का होगा। निर्माण पूरा होने के बाद जैविक खेती, दुग्ध उत्पाद, शहद, पॉलीहाउस में संरक्षित खेती और जैविक खाद से होने वाली आय से गुरुकुल संचालित होगा। इससे इतनी आय होगी कि किसी से कुछ मांगने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
रामायण पाठ से बदली दिशा
गोस्वामी ने बताया कि अमेरिका के कैलीफोर्निया में रहने के दौरान उन्होंने अपना मकान लिया था, जो आज भी किराए पर उठा है। उस मकान में शिफ्ट होने के दौरान मन में अखंड रामायण का पाठ करने का विचार आया था क्योंकि बचपन से ही रामायण पढ़ते रहे हैं। तीन चार दोस्तों की मदद से पाठ हुआ। इसके बाद 18 भारतीय दोस्त जुड़े और हर महीने एक या दो बार अखंड पाठ शुरू हो गया। मार्च 2017 तक 30 पाठ हो गए थे। इसी दौरान विदेश के वैभव से विरक्ति हो गई। पत्नी प्रतिभा और दोनों बच्चों को समझाया और कहा कि अगर दो साल में गुरुकुल का सपना साकार नहीं हुआ तो दस साल की मियाद वाला अमेरिकन ग्रीन कार्ड उनके पास है। वापस अमेरिका आ जाएंगे। सब राजी हुए तो स्वदेश आ गए।
जरारा से अमेरिका तक
वर्ष 1992 में खैर इंटर कालेज से इंटरमीडिएट,1995 में एएमयू से बीएससी आनर्स स्टैटिक्स, 1997 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से एमएससी, इसके बाद पीएचडी शुरू करते ही अभिनव को जीई कैपिटल सर्विस, जो अब जैनपैक्ट है, उसमें नौकरी मिल गई। इसके बाद फ्रैंकलिन टेम्पेल्टन में जॉब मिला और बंगलुरू पहुंच गए। गुड़गांव में आईक्योर में नौकरी मिली तो इसी कंपनी ने वर्ष 2007 में अमेरिका बुला लिया। वहां रॉयल बैंक ऑफ स्काटलैंड में ऑफर मिला तो शिफ्ट हो गए। वर्ष 2013 में एप्पल में डाटा साइंटिस्ट बन गए। वर्ष 2017 में कैलीफोर्नियों में रहने के दौरान नौकरी छोड़ दी। उस वक्त वह तीन लाख डॉलर सालाना के पैकेज पर थे, जो भारतीय मुद्रा में लगभग एक करोड़ 95 लाख रुपये होते हैं।
भाई भी आए साथ
जब अभिनव अमेरिका से घर लौटे तो छोटे भाई जगदीश गोस्वामी भी मुंबई की चकाचौंध से वापस आ गए। वह टीवी सीरियल में बतौर कास्टिंग डायरेक्ट काम कर रहे थे। उन्होंने वर्ष 2008 से 2016 के बीच स्टार प्लस के लिए एक हसीना थी.. एक हजारों में मेरी बहना है.., एंड टीवी के लिए ‘दिल्ली वाली ठाकुर गर्ल्स’, सोनी टीवी पर ‘बड़े भाई की दुल्हनिया’, चैनल वी पर ‘डी-थ्री दिल दोस्ती डांस’में काम किया। दो भाइयों की लगन को देख कर चचेरे भाई ने पूरे प्रोजेक्ट की सोलर लाइट डिजाइन की। घर की छत पर पांच किलोवाट का सोलर प्लांट लगाया। जो लाइट बाजार के रेट से तीन हजार रुपये प्रति पीस में लग रही थी वह चचेरे भाई प्रतीक गिरि ने 1400 रुपये में तैयार कर दी। गूगल पर इन सोलर लाइटों को देख कर आगरा की एक कंपनी ने एक हजार लाइट का आर्डर दे दिया तो टाटा स्टील की नौकरी छोड़ कर चचेरे भाई ने अपना निजी काम शुरू कर दिया।
जैविक व संरक्षित खेती ही रोकेगी पलायन
अभिनव कहते हैं कि जैविक खेती से होने वाली आय साधारण आय से लगभग दोगुनी है। इससे किसानों को लाभ होगा। लोग भी स्वस्थ रहेंगे। इसलिए केवल खेती पर आधारित 75 फीसदी की आबादी वाले देश में इससे बेहतर विकल्प नहीं है। गांव छोड़ कर शहर में पांच दस हजार की नौकरी करने से बेहतर है कि अपने खेत की आय बढ़ाई जाए। अपने परिवार के बीच रहा जाए। अभिनव कहते हैं पॉली हाउस में संरक्षित खेती किसानों की आय बढ़ाने का बहुत बेहतर तरीका है। इसे किसानों को अपनाना चाहिए। इसमें कई तरह की फसलें कर आय बढ़ाई जा सकती हैै। वह खुद अपने खेतों में इसकी तैयारी कर रहे हैं।
आस्ट्रेलियन बॉक्स में शहद उत्पादन
अभिनव ने मधुमक्खी पालन कर शहद उत्पादन की भी शुरूआत की है। इसके लिए उन्होंने आस्ट्रेलिया से एक खास किस्म के लकड़ी के बाक्स मंगाए हैं जिसमें मधुमक्खियां अपनी कालोनी बसा कर नीचे की हिस्से में रहतीं हैं और ऊपर के हिस्से में रानी मक्खी शहद बनाती है। इसी हिस्से में लगे बटनों को थोड़ा सा घुमा कर शहद आसानी से निकल आता है। मधुमक्खियों को कहीं भगाना नहीं पड़ता। इस बाक्स की कीमत 900 आस्ट्रेलियन डॉलर यानी लगभग 55 हजार रुपये है। गोस्वामी ने मधुमक्खियों के भोजन के लिए सूरजमुखी भी उगाई है।
साहीवाल गायें रहेंगी गोशाला में
इस गोशाला में साहीवाल नस्ल की देशी गायों को रखा गया है। अभी 65 गायें हैं, जिनकी संख्या 200 तक जाएगी। भारत के ऋषियों ने देशी गाय की महत्ता को सैकड़ों वर्ष पूर्व बताया था, हाल ही में न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने भी इसे माना है। इसलिए गोशाला में इन्हीं गायों को रखा गया है।