घर से शुरू हो हिंदी की शुरुआत
अलीगढ़ पब्लिक स्कूल की हिंदी शिक्षिका डॉ. फातिमा जेहरा ने कहा कि हिंदी को रोजगार से जोड़ने की जरूरत है। इसकी शुरुआत घर से होनी चाहिए। बच्चों को हिंदी वर्णमाला का ज्ञान मजबूत कराया जाए और विद्यालयों में हिंदी से जुड़े कार्यक्रम व प्रतियोगिताएं कराई जाएं। एएमयू हिंदी विभाग के शिक्षक डॉ. गुलाम फरीद साबरी ने कहा कि हाल ही में उन्होंने कई देशों की यात्रा की। थाईलैंड में थाई और मलयेशिया में मलय भाषा का स्थानीय लोग इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी को लेकर हीन भावना ठीक नहीं है।
भाषा को सरल और मजबूत बनाने पर जोर
हिंदी के शोधार्थी साबिर खान ने कहा कि हिंदी के स्वरूप को बदलने की जरूरत नहीं है। भाषा को मजबूत बनाने के लिए विद्यालय स्तर पर प्रतियोगिताएं कराई जानी चाहिए। वहीं शोधार्थी रफी खान ने कहा कि हिंदी का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। भारतीय सामाजिक चेतना में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हिंदी को और प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।