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अमर उजाला ने कोरोना वीरों को किया सम्मानित

Sun, 28 Feb 2021 02:46 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला, अलीगढ़।
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रामघाट रोड स्थित आभा होटल में अमर उजाला द्वारा आयोजित कोरोना कर्मवीर सम्मान समारोह में माहेश्वर - फोटो : CITY OFFICE
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गिरकर उठना-उठकर चलना, यह क्रम है संसार का, कर्मवीर को फर्क न पड़ता, किसी की जीत या हार का। इसी भावना के साथ कोरोना संक्रमण काल में कर्मवीरों ने समाज हित में काम किया। ऐसे कोरोना कर्मवीरों का शनिवार को अमर उजाला ने होटल आभा रीजेंसी में सम्मान किया। यह कार्यक्रम अमर उजाला और माहेश्वरी नर्सिंग एंड पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट ने सारेक्स बैटरी के साथ आयोजित किया था। मुख्य अतिथि के रूप में आए जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने कर्मवीरों का सम्मान करते हुए कहा कि कर्मवीरों से काफी सीख मिली है। इन्हीं की प्रेरणा से हमने टीम बनाकर कार्य किया। उन्होंने अमर उजाला द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की सराहना की।
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कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह, विशिष्ट अतिथि एडीएम सिटी राकेश कुमार मालपाणी, मुख्य विकास अधिकारी अनुनय झा व सीएमओ भानुप्रताप सिंह कल्याणी ने दीप जलाकर किया। विशिष्ट अतिथि के तौर पर आरपीएफ के सहायक सुरक्षा आयुक्त धीरेंद्र कुमार व एसपी क्राइम डॉ. अरविंद कुमार इसमें शामिल हुए। जिलाधिकारी ने कर्मवीरों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि वास्तव में इन्हीं लोगों ने कोरोना संक्रमण से लड़ने में मुख्य भूमिका अदा की है। प्रशासन ने जहां सामंजस्य बैठाते हुए अपना कार्य किया, वहीं समाजसेवियों, सामाजिक संगठनों व अन्य लोगों ने प्रशासन का सहयोग किया।
यही कारण रहा कि हम अदृश्य कोरोना से लड़ पाए हैं। एडीएम सिटी राकेश कुमार मालपाणी ने कहा कि जिलाधिकारी के नेतृत्व में अच्छा कार्य किया गया। लेकिन कोरोना कर्मवीरों ने अतुलनीय योगदान दिया। सीएमओ भानू प्रताप सिंह कल्याणी ने कहा कि कोरोना का असर कम हुआ है, लेकिन कोरोना खत्म नहीं हुआ है। इसलिए सभी लोग सावधानी बरतें क्योंकि अगर कोरोना दोबारा आया तो और भी घातक रूप लेकर आएगा। वैक्सीनेशन पूरा होने तक ढिलाई बरतने की जरूरत नहीं है।
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एसपी क्राइम डॉ. अरविंद कुमार ने कोरोना काल के संस्मरण सुनाते हुए सभी को खूब हंसाया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग थे, जो स्वयं संभल गए। जो लापरवाही कर रहे थे, उन्हें हमने समझाया। उन्होंने कहा कि कोरोना बहुत खतरनाक है। इसे हमने भुगता है। अभी भी मास्क पहनें और सामाजिक दूरी रखें। सभी अधिकारियों ने अमर उजाला द्वारा आयोजित कोरोना कर्मवीर सम्मान समारोह की सराहना की।
वे कर्मवीर, जिनके दम पर कोरोना से लड़ा अलीगढ़
-स्मृति गौतम, कोरोना कंट्रोल रूम प्रभारी :
स्मृति गौतम की टीम ने कोरोना संक्रमण के दौरान सभी शिकायतों की सुनवाई की। उसका निस्तारण भी कराया। यही नहीं, राशन वितरण से लेकर शासन से समन्वय स्थापित किया। आज भी इनकी टीम कार्य कर रही है।
-रंजीत सिंह, एसीएम द्वितीय :
रंजीत सिंह ने कोरोना संक्रमण काल में कोविड अस्पताल (दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय) में संसाधनों को उपलब्ध कराने और मरीजों की समस्या निस्तारित करने में दिन रात जुटे रहे। कानून व्यवस्था संभालने के लिए क्षेत्र में भी भ्रमणशील रहे।
-राजेश कुमार सोनी, जिला पूर्ति अधिकारी :
कोरोना संक्रमण काल में लगभग छह लाख परिवारों तक भोजन, राशन आदि पहुंचाने में मुख्य योगदान दिया। इनमें से कई परिवार तो ऐसे थे, जिनके यहां भोजन के लिए राशन नहीं था। इन्हें वरीयता देकर सुबह शाम भोजन उपलब्ध कराया।
-संजीव ओझा, विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी :
संजीव ओझा कोरोना संक्रमण काल में एसडीएम कोल के पद पर थे। इन्होंने कोटा से आने वाले विद्यार्थियों के अलावा मजदूरों को ठहराने, सुविधाएं देने का कार्य किया। जरूरत पड़ने पर लोगों को घर भी भेजा। इस दौरान यह भी कोरोना संक्रमित पाए गए थे।
-डॉ. अरविंद कुमार, एसपी क्राइम :
डॉ. अरविंद कुमार ने संक्रमण काल में कानून व्यवस्था संभालने में मुख्य योगदान दिया। लोगों से लॉकडाउन का पालन कराया। कोरोना संक्रमित मरीजों की कांट्रेक्ट ट्रेसिंग में भी भूमिका अदा की।
-रविंद्र सिंह, इंस्पेक्टर कोतवाली :
ऊपरकोट कोतवाली इलाके में संक्रमित जमातियों की तलाश के दौरान मुख्य भूमिका निभाई। वहीं अराजक तत्वों पर शिकंजा कसा और समाज के वरिष्ठ लोगों को साथ में लेकर घर-घर राशन भी वितरित कराया।
-धीरेंद्र मोहन शर्मा, इंस्पेक्टर बन्नादेवी :
धीरेंद्र मोहन शर्मा कोरोना काल की शुरुआत में थाना देहलीगेट में कार्यरत थे। यहां इन्होंने सुबह शाम गश्त कर लोगों को घर के अंदर रहने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही जरूरतमंदों की सूचना पर समाजसेवियों के साथ घरों में राशन पहुंचाया।
-रविंद्र दुबे, इंस्पेक्टर सिविल लाइन :
रविंद्र दुबे कोरोना संक्रमण की शुरुआत में बन्नादेवी थाने में थे। इन्होंने बन्नादेवी क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए समाज के वरिष्ठ लोगों का सहयोग लिया। लॉकडाउन में अवैध शराब तस्करी पर लगाम भी लगाई।
-आशीष एल्विन किशोर, नर्स स्टाफ :
माहेश्वरी नर्सिंग एंड पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट में आने वाले मरीजों के साथ सकारात्मक व्यवहार करते हुए इन्होंने सभी का हौसला बढ़ाया। जिस समय लोग मरीजों को छूने से कतरा रहे थे। उस दौरान इन्होंने अपने काम को बखूबी तरीके से निभाया।
-पीयूष प्रकाश, लैब टेक्निशियन :
माहेश्वरी नर्सिंग एंड पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट में मरीजों की विभिन्न जांच कराने के लिए जब पीयूष को कहा जाता तो उन्होंने सभी जांच बिना भय कीं। इस दौरान जांच करने से कई लोग कतरा रहे थे।
-ईशाक विपिन मैसी, कॉलेज एडमिनिस्ट्रेटर :
लॉकडाउन लगने पर माहेश्वरी नर्सिंग एंड पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट के विद्यार्थियों को इन्होंने ऑनलाइन पढ़ाने के लिए संसाधन मुहैया कराए। इतना ही नहीं, अन्य शिक्षकों को भी ऑनलाइन पढ़ाने के लिए प्रेरित भी किया।
-विशाल, सफाईकर्मी नगर निगम :
विशाल ने कोरोना संक्रमण काल में अपना कार्य नहीं छोड़ा। कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए साफ सफाई भी काफी महत्वपूर्ण थी। इन्होंने बिना डरे विभिन्न क्षेत्रों में अपने कार्य को अंजाम दिया।
-दिनेश, सफाईकर्मी नगर निगम :
कोरोना संक्रमण काल में सैनिटाइजेशन जहां चुनौती बना हुआ था। दिनेश ने अपनी टीम के साथ में विभिन्न मोहल्लों को सैनिटाइज किया। इसके अलावा साफ सफाई का कार्य भी बखूबी से निभाया।
-शाइस्ता खलील, सिस्टर जेएन मेडिकल कॉलेज :
कोरोना संक्रमण काल में जहां एक ओर सभी लोगों में डर व्याप्त था। ऐसे में शाइस्ता सीधे मरीजों के संपर्क में थीं। मरीजों के पास जाकर उनकी जिज्ञासाओं को शांत करते हुए उनका इलाज जारी रखा।
-नलिनी पीटर, सिस्टर जेएन मेडिकल कालेज :
सिस्टर नलिनी पीटर ने अपने यहां आने वाले मरीजों की अच्छे से देखभाल की। कोरोना संक्रमित मरीजों की टेंशन खत्म करते हुए इलाज में सहयोग किया।
-डॉ. मानाजिन अतहर, डॉक्टर जेएन मेडिकल कॉलेज : डॉ. मानाजिन अतहर ने कोरोना संक्रमण के दौरान जेएन मेडिकल कॉलेज में मुख्य भूमिका निभाई। इन्होंने न सिर्फ मरीजों का इलाज किया, बल्कि घबराए हुए स्टॉफ का हौसला भी बढ़ाया।
-मुन्ना तिवारी, सर्विस इंजीनियर :
कोरोना संक्रमण काल में बिजली का बैकअप होना भी जरूरी होता है। ऐसे में विभिन्न अस्पतालों में बैटरी की आवश्यकता पड़ती थी तो यह बैटरी लेकर पहुंच जाते थे।
-दिनेश वर्मा, सर्विस इंजीनियर :
विभिन्न अस्पतालों में कोरोना संक्रमण काल के दौरान बैटरी बैकअप में समस्या उत्पन्न होती तो अधिकांश लोग अस्पताल जाने से बचते रहे। ऐसे में दिनेश मानवीयता के आधार पर अस्पताल जाते और सर्विस देते थे।
-वजीहा अंसारी, शिक्षिका :
बीआईआईटी ग्रुप ऑफ एजूकेशन में जहां शिक्षक घबराए हुए थे। वहां वजीहा ने सभी शिक्षकों को ऑनलाइन पढ़ाने के लिए प्रेरित किया। इतना ही नहीं, बच्चों को क्या पढ़ाना है, कैसे पढ़ाना है। इसको लेकर काफी काम किया।
-गगन गुप्ता, ड्राइवर:
बीआईआईटी ग्रुप ऑफ एजूकेशन में ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान विभिन्न शिक्षकों को कई सारी वस्तुओं की जरूरत पड़ती थी। ऐसे में बिना डरे गगन ने शिक्षकों और स्टाफ के बीच घर-घर जाकर समन्वय स्थापित किया और जरूरी वस्तुएं पहुंचाईं।
-राजेंद्र सिंह, सिपाही जीआरपी :
कोरोना संक्रमण काल में जब मजदूरों के लिए विशेष ट्रेन चलाई गईं तो राजेंद्र सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था से लेकर यात्रियों को कोरोना के नियमों के प्रति जागरूक करने का कार्य किया।
-अजय कुमार, सिपाही आरपीएफ:
लॉकडाउन के बाद जब ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ तो स्टेशन पर थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था हुई। इस व्यवस्था को अजय कुमार ने जान की परवाह किए बिना संचालित किया।
- रिजुवेद गर्ग, डायरेक्टर आरजी ग्रुप ऑफ एजूकेशन :
लॉकडाउन में जब विद्यार्थी परेशान थे कि पढ़ाई कैसे होगी तो इन्होंने विद्यार्थियों के साथ अपने स्टाफ और शिक्षकों को तकनीकी जानकारी देकर प्रेरित किया। इसके बाद कक्षाएं ऑनलाइन शुरू हुईं।
-अविनाश सारस्वत, डीन एकेडमिक :
आरजी ग्रुप ऑफ एजूकेशन में कार्यरत अविनाश सारस्वत का योगदान भी सराहनीय रहा। ऑनलाइन पढ़ाई सुचारु रखने के साथ साथ जरूरतमंदों का सहयोग किया।
-शादाब आमिर, मीडिया इंचार्ज हैरीटेज इंटरनेशल स्कूल :
शादाब ने शिक्षकों को जरूरत पड़ने वाली डिजिटल सामग्री और उनके व्याख्यानों को विद्यार्थियों के घर तक पहुंचाने का कार्य बखूबी निभाया।
-अनुज कुमार, शिक्षक :
हैरीटेज इंटरनेशनल स्कूल में शिक्षक अनुज कुमार ने उन शिक्षकों को तकनीकी ज्ञान देकर प्रोत्साहित किया, जो तकनीक में काफी कमजोर थे। इससे पठन पाठन सुचारु रूप से चला।
-मनीषा राठी, शिक्षिका :
हैरीटेज इंटरनेशनल स्कूल की शिक्षिका मनीषा ने भी लॉकडाउन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। बच्चे जहां अपने घरों में परेशान थे। उनके मनोरंजन के लिए ऑनलाइन गतिविधियां आयोजित कीं। इससे कई दिन बीत गए और बच्चे तनाव से दूर हुए।
-विक्रम सिंह, लैब टैक्निशियन :
अभिश्री हॉस्पिटल के लैब टैक्निशियन रहे विक्रम सिंह ने जान की परवाह किए बगैर विभिन्न जांचें की। इस दौरान अन्य लोग इस कार्य से बच रहे थे।
-बहादुर सिंह, नर्सिंग स्टाफ :
अभिश्री हॉस्पिटल में मरीजों के दिल से कोरोना का डर निकालने में बहादुर सिंह ने भी काफी योगदान दिया। इन्होंने मरीजों को कोरोना से बचने के उपाय बताए। साथ ही अपने स्टॉफ को भी प्रेरित किया।
-ऋषभ मित्तल, सीए :
रसिक टॉवर से जुड़े ऋषभ मित्तल ने कोरोना संक्रमण काल में समाज हित में योगदान दिया है। जहां भी जरूरतमंद दिखते, उनकी मदद कर देते थे।
-अनुज कुमार तिवारी, सेल्समैन विकास स्वीट्स :
कोरोना संक्रमण काल में जब प्रतिष्ठान बंद थे। इस दौरान लोगों की मांग पर विकास ने घर-घर जाकर सामान पहुंचाया। इस कार्य में विभिन्न कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा था।
-विपिन शर्मा, मुख्य प्रबंधक आभा रीजेंसी होटल : कोरोना संक्रमण काल में जब आभा रीजेंसी होटल को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया तो विपिन शर्मा ने क्वारंटीन लोगों को सुविधाएं मुहैया कराईं। किसी को कोई परेशानी न हो, इसके लिए कई दिनों तक होटल को छोड़कर नहीं गए।
-नीतू कुमारी, वार्ड असिस्टेंट दीनदयाल अस्पताल :
कोरोना से लड़ने के लिए जब दीनदयाल अस्पातल को एल 2 कोविड अस्पताल बनाया गया तो वार्ड असिस्टेंट पद पर तैनात नीलू ने सराहनीय कार्य किया। इन्होंने वार्ड में जाकर न सिर्फ मरीजों का हालचाल जाना। बल्कि दवा लेने से लेकर विभिन्न गतिविधियों के लिए भी प्रेरित किया।
-चमन सिंह तोमर, पोस्ट कमांडर आरपीएफ :
श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में मजदूरों और विभिन्न यात्रियों को नियमों के साथ ट्रेनों में बैठवाया। कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करने के लिए लोगों को प्रेरित किया। आवश्यकता पड़ने पर लोगों की मदद भी की।

रामघाट रोड स्थित आभा होटल में अमर उजाला द्वारा आयोजित कोरोना कर्मवीर सम्मान समारोह में सम्बोधित- फोटो : CITY OFFICE

 

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