एक बार फिर मौसम की मार से किसान कराह उठा है। बारिश का असर केवल खेतों तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि इससे अनाज मंडी पर भी असर पड़ा है। मंडी में बिक्री के लिए लाए गए करीब 8000 बोरी गेहूं भी भीग गए हैं। किसानों के साथ-साथ व्यापारी भी प्रभावित हुए हैं। भीगे गेहूं की गुणवत्ता में गिरावट के कारण भाव भी कम मिल रहा है।
हर वर्ष की तरह इस बार भी प्रकृति ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। बृहस्पतिवार की शाम को हुई बारिश ने खेतों में खड़ी और जमीन पर कटकर पड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया है। थ्रेसिंग हो चुके भूसे के भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। वहीं, खैर कृषि उत्पादन मंडी समिति में खाद्य एवं रसद विभाग की व्यवस्थाएं भी सवालों के घेरे में हैं। 1 अप्रैल से सरकारी खरीद के लिए कांटे शुरू होने थे लेकिन 4 अप्रैल तक भी व्यवस्था सुचारू रूप से चालू नहीं हो सकी है। 4 अप्रैल तक विभाग की खरीद शून्य रही। किसानों को उम्मीद थी कि सरकारी खरीद शुरू होने से उन्हें उचित मूल्य मिलेगा लेकिन व्यवस्थाओं की कमी ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है।
मार्केटिंग इंस्पेक्टर गिरीश कुमार का कहना है कि गेहूं में अधिक नमी और बारदाने की कमी के चलते खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। गेहूं का समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल है लेकिन मंडी में 4 अप्रैल को गेहूं का भाव मात्र 2270 रुपये क्विंटल रहा। तहसील के गांव कुमरपुर निवासी सुशील कुमार ने बताया कि बारिश से उसकी काशीफल की फसल बर्बाद हो गई है। साथ ही गेहूं के कम भाव और सरकारी खरीद में देरी के चलते उन्हें मजबूरन अपनी फसल आढ़तियों को कम दाम पर बेचनी पड़ रही है। नवनिर्वाचित कोषाध्यक्ष करुण कुमार गौतम का कहना है कि बारिश के कारण गेहूं में नमी बढ़ गई है।