एएमयू प्रशासन ने बीआर्क के छात्र मिस्बाह कैसर पर सिविल लाइंस थाने में 22 नवंबर 2024 को विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप लगाया कि कैसर ने विवि के खिलाफ आपत्तिजनक भाषण दिया और छात्रों को भड़काया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के छात्र मिस्बाह कैसर की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। कहा, मामले में अर्नेश कुमार बनाम स्टेट ऑफ बिहार में पारित आदेश का पालन किया जाना चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी व न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने दिया।
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एएमयू प्रशासन ने बीआर्क के छात्र मिस्बाह कैसर पर सिविल लाइंस थाने में 22 नवंबर 2024 को विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप लगाया कि कैसर ने विवि के खिलाफ आपत्तिजनक भाषण दिया और छात्रों को भड़काया। साथ ही उसने एक घातक हमला करने की नीयत से कुलपति के वाहन को रोकने और नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। मामले में याची छात्र ने दर्ज एफआईआर को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि सभी अपराध केवल सात साल के लिए दंडनीय हैं। ऐसे में याची को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। यह भी दलील दी कि याची ने कोई आपत्तिजनक भाषण नहीं दिया है। आरोप मनगढ़ंत हैं। कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए एफआईआर रद्द की मांग स्वीकार नहीं किया। इसके साथ ही याचिका निस्तारित कर दी।