बिटिया की मौत के बाद इस घटना की आड़ में जातीय दंगे की साजिश के मामले में मथुरा में पकड़े गए पीएफआई के चार सदस्यों की वहां की जेल से यहां न्यायालय में वीडियो क्रांफेंसिंग के माध्यम से पेशी हुई। इनके खिलाफ पुलिस ने पहले से ही मथुरा जेल में बी. वारंट दाखिल कर रखा है।
पेशी के बाद यहां के न्यायालय ने भी इन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश दिए। यहां इस मामले की विवेचना क्राइम ब्रांच कर रही है और पूछताछ के लिए इन्हें रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है।
उल्लेखनीय है कि बिटिया की मौत के बाद जब हिंसा हुई थी तो सरकार ने यह खुलासा किया था कि इसके पीछे बहुत बड़ी साजिश है। इस मामले में कोतवाली चंदपा में राष्ट्रद्रोह जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। इसमें दंगे फैलाने के लिए फंडिंग का भी जिक्र किया गया था।
साथ ही ऑडियो वायरल करने और पीड़ित परिवार को प्रलोभन देने जैसी बातें भी कही गई थीं। इस दौरान मथुरा पुलिस ने चार युवकों को पकड़ा था। पुलिस ने इन्हें पीएफआई का सदस्य बताया था। इनमें अतीक उर्रहमान निवासी रतनपुर मुजफ्फरनगर, आलम निवासी घेर फतेहखान जिला रामपुर, सिद्दीकी निवासी बेंगारा थाना मल्लपुरम केरल, मसूद अहमद निवासी जरवल बहराइच शामिल हैं। इनसे लैपटॉप व अन्य सामान मिला था।