अलीगढ़। प्रदेश में अब्बा जान पर मचे सियासी घमासान के विषय में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की उर्दू एकेडमी के पूर्व निदेशक डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि यह एक बेहद खूबसूरत और आत्मीयता प्रकट करने वाला शब्द है।
खासतौर से मुस्लिम समुदाय में प्रयोग किया जाता है। अपने पिता को सम्मान और प्यार दर्शाने के लिए पुत्र यह संबोधन करता है।
लेकिन इस पर जो विवाद हो रहा है वह पूरी तरह राजनीतिक है।
अगर हम इस पूरे प्रकरण की गहराई से व्याख्या करें तो पाएंगे कि जानबूझकर इस शब्द का इस्तेमाल एक तंज के रूप में किया गया है।
इस शब्द का इस्तेमाल करके राजनैतिक रूप से यह प्रदर्शित करने की कोशिश की है कि आपकी हमदर्दी एक विशेष समुदाय से है और आप उन्हीं के हितों के प्रति चिंतित हैं। इस विवाद में इस से ज्यादा कुछ नहीं है।
यह पूरी तरह गैर जरूरी था राजनीति में स्वस्थ आलोचना होनी चाहिए लेकिन इस तरह की प्रवृतियां राजनीति में उभर कर आने लगी हैं।