अलीगढ़। पिछले तकरीबन 15 महीने से भी ज्यादा समय से बंद चल रहे स्कूल, खासतौर से कॉन्वेंट स्कूल के कारण स्कूल वाहन संचालित करने वाले संचालकों के सामने जटिल स्थिति पैदा हो रही है। संभागीय परिवहन कार्यालय उनसे रोड टैक्स की मांग कर रहा है।
साथ ही कुछ संचालक जिन्होंने लोन लेकर वैन या गाड़ी ली है, बैंक वाले उनसे अपनी किस्त मांग रहे हैं। स्कूल वैन ऑपरेटर का कहना है कि बच्चों के अभिभावक जो मासिक किराया उनको दिया करते थे अब नहीं दे रहे हैं।
जबकि वही अभिभावक स्कूल की फीस लगातार दे रहे हैं।
पैसा ना मिलने पर गाड़ी के रखरखाव से लेकर और उसकी टैक्स व बैंक की किस्त अदायगी तक सबकुछ पटरी से उतर गई है। इसका प्रभाव घर की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ा है।
बीमा कंपनियों ने कमर्शियल हो या निजी वाहन उनके बीमा संबंधी नियमों में किसी प्रकार की कोई खास रियायत नहीं दी है। अगर वाहन का सुरक्षा कवर चाहिए तो इंश्योरेंस कराना ही होगा। चाहे वाहन घर पर ही खड़ा रहे।
- शरद बंसल, वाहन बीमा विशेषज्ञ
हमारी शासन और प्रशासन से मांग है कि हमें कम से कम उस अवधि तक रोड टैक्स, फिटनेस और अन्य सरकारी देनदारियों में छूट मिले, जिस अवधि में हमारे वाहन सड़कों पर नहीं चले हैं। स्कूली वाहन संभागीय कार्यालय में पंजीकृत हैं। जो वाहन ईमानदारी से नियमों का पालन कर रहे हैं उनको राहत मिलनी चाहिए।
-विश्वास वैन ऑपरेटर
कुछ स्कूल वैन संचालक अब इस क्षेत्र से निकलने का मन बना रहे हैं। उन्होंने अपनी गाड़ियां अन्य कार्यों में लगा दी हैं। लेकिन बैंक की किस्त देने का दबाव अभी भी बना हुआ है। बीच में 6 महीने तक वाहन नहीं चले थे। इस अवधि के लिए शासन और प्रशासन को राहत पैकेज पर विचार करना चाहिए।
नीरज, वैन ऑपरेटर
महामारी के दौरान वाहनों के सभी प्रकार के नियमन के संबंध में शासन की स्पष्ट नीतियां हैं। उन्हीं का हम पालन करा रहे हैं। मौजूदा स्थिति के लिए भी शासन का जो भी निर्देश होगा उसका पालन कराया जाएगा। राहत और रियायत के संबंध में भी फैसला शासन स्तर से ही लिया जाएगा। -रंजीत सिंह, एआरटीओ प्रशासन
विश्वास उपाध्याय, वैन संचालक
- फोटो : Amar Ujala
विश्वास उपाध्याय, वैन संचालक
नीरज स्कूल वैन ऑपरेटर
- फोटो : Amar Ujala
नीरज स्कूल वैन ऑपरेटर