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महामारी ने हमसे छीन लिए एएमयू के बड़े-बड़े विद्वान छात्रों को, समाज को, बौद्धिक जगत को बहुत कुछ देने की तैयारी कर रहे थे

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डॉक्टर शोएब जहीर - फोटो : Amar Ujala
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दीपक शर्मा अलीगढ़। महामारी की दूसरी लहर में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की बौद्धिक संपदा को जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई किसी भी तरीके से संभव नहीं है। कई ऐसे विद्वान और प्रोफेसर जो अभी समाज और छात्रों को बहुत कुछ देने की तैयारी कर रहे थे, दूर चले गए । इनमें संस्कृत विभाग के पूर्व चेयरमैन प्रोफेसर खालिद बिन यूसुफ, जेएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन डिपार्टमेंट के चेयरमैन प्रोफेसर शादाब,  लॉ फैकल्टी के डीन प्रोफेसर शकील समदानी, विश्वविद्यालय के पूर्व प्राक्टर और पूर्व डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रोफेसर जमशेद सिद्दीकी और जेएन मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक प्रोफेसर शोएब जहीर जैसे विद्वान शामिल हैं। साथ ही अन्य विद्वान भी हैं जिन्हें महामारी ने हमसे छीन लिया। प्रोफेसर शकील अहमद समदानी एएमयू के प्रसिद्ध व्याख्याता और विधि संकाय के डीन प्रोफेसर शकील अहमद समदानी एएमयू ईसी, एएमयू कोर्ट और शैक्षणिक परिषद के सदस्य रहे । वह विश्वविद्यालय के संपत्ति अधिकारी (राजपत्रित), सांस्कृतिक शिक्षा केंद्र के समन्वयक, एएमयू केंद्रों के नोडल अधिकारी और विधि विभाग के प्रमुख भी रहे हैं।  प्रोफेसर समदानी फैमिली लॉ, पब्लिक इंटरनेशनल लॉ, ह्यूमन राइट्स, इस्लामिक लीगल सिस्टम एंड कॉन्स्टीट्यूशनल लॉ ऑफ इंडिया के विशेषज्ञ थे। उन्होंने यूनिफार्म सिविल कोड और मुस्लिम तलाक के लिए निर्वाह भत्ता पर किताबें लिखीं। इसके अतिरिक्त, वह दो पुस्तकों पर काम कर रहे थे। उन्होंने मानक पत्रिकाओं में लेख भी लिखे। उनको कई पुरस्कार भी मिले और उनके लेख देश-विदेश के नामचीन अखबारों में भी प्रकाशित हुए। उन्हें टीवी बहस के लिए भी आमंत्रित किया जाता था। प्रोफेसर शादाब अहमद खान प्रोफेसर शादाब अहमद खान ने जेएन मेडिकल कॉलेज से 1986 में एमबीबीएस और 1990 में मेडिसिन से एमडी किया था। इसके बाद वह 1990 में ही जेएन मेडिकल कॉलेज में नियुक्त हुए थे। सन 2000 के बाद प्रोफेसर शादाब अहमद खान कुछ दिनों के लिए कुवैत गए और वहां अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चिकित्सकों के साथ कार्य किया। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय सेमिनार और कार्यक्रमों में जेएन मेडिकल कॉलेज का प्रतिनिधित्व किया।  उनके छात्रों में से एक रहे शहर के प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास मल्होत्रा कहते हैं कि वह चिकित्सा के जितने बड़े विद्वान थे उतने ही बड़े इंसान भी थे। वह एक महान शिक्षक और अपने छात्रों को समर्पित शिक्षाविद थे। प्रोफेसर जमशेद सिद्दीकी एएमयू के कंप्यूटर साइंस विभाग में वरिष्ठ शिक्षक और ओएसडी डवलपमेंट प्रोफेसर जमशेद सिद्दीकी 1992 में एक व्याख्याता के रूप में एएमयू में शामिल हुए । उन्होंने 1997 से 2001 तक ओमान के सल्तनत के इब्रा तकनीकी औद्योगिक कालेज, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में व्याख्याता (एएमयू से छुट्टी पर) के रूप में भी काम किया। उन्होंने विश्लेषण और सूचना प्रणाली, प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस), आईटी के बुनियादी ढांचे, साॅफ्टवेयर इंजीनियरिंग, कंप्यूटर सिस्टम के प्रदर्शन मूल्यांकन, ऑपरेटिंग सिस्टम, कंप्यूटर उन्मुख संख्यात्मक तरीके, अनुसंधान पद्धति, डेटा खनन, समानांतर कम्प्यूटिंग और प्रोग्रामिंग भाषाओं को सिखाया।  उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की में सूचना प्रणाली में पीएचडी के लिए सूचना प्रौद्योगिकी स्वीकृति और संगठनात्मक क्षमताः भारतीय फर्मों में आवेदन पर थीसिस लिखा। प्रोफेसर खालिद बिन यूसुफ संस्कृत विभाग के पूर्व चेयरमैन प्रोफेसर खालिद बिन यूसुफ ने संस्कृत और अरबी भाषा में 300 से अधिक समान शब्दों को सामने लाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया था। उन्होंने अपने शोध के माध्यम से यह बात सामने लाने का प्रयास किया था कि संस्कृत और अरबी भाषाओं में बहुत समानता है, क्योंकि हजारों वर्ष पहले इन दोनों भाषाओं के बोलने वाली मानवीय सभ्यता संबंधित भूभाग पर फैली हुई थी। खालिद बिन यूसुफ को वेद और पुराणों का भी अच्छा ज्ञान था। प्रोफेसर शोएब जहीर प्रोफेसर शोएब जहीर ने 1992 में जेएन मेडिकल कॉलेज में व्याख्याता के रूप सेवा प्रांरभ की और बाद में एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर बन गए। उन्होंने 1988 में एमबीबीएस और 1991 में एमडी किया था। उन्होंने अपनी विशिष्टता के क्षेत्र में उच्च स्तरीय पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित किए और चिकित्सा सम्मेलनों में भाग लिया।  जेएन मेडिकल कालेज के अलावा, प्रोफेसर शोएब जहीर ने किंग खालिद विश्वविद्यालय, सऊदी अरब और दीवान आफ रायल कोर्ट, मस्कट में भी अपनी सेवाएं प्रदान कीं। शोएब जहीर के पिता डॉ. मोहम्मद जहीर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल रहे। डॉक्टर शोएब जहीर के निधन से 8 महीने पहले ही उनका इंतकाल हुआ था। महामारी के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विद्वान प्रोफेसर शिक्षक जिनको भी हमने खोया है उनके परिवारों के साथ मेरी व्यक्तिगत संवेदना है। यह विश्वविद्यालय के साथ-साथ मेरी व्यक्तिगत क्षति है, जिसको पूरा नहीं किया जा सकता। -प्रोफेसर तारिक मंसूर, कुलपति, एएमयू वह अन्य विद्वान जो हमसे दूर चले गए - रिटायर शिक्षक प्रोफेसर सिफहत अफजल की मृत्यु भोपाल में हुई - रिटायर शिक्षक प्रोफेसर मुबाशिर की मृत्यु नोएडा में हुई - रिटायर शिक्षक प्रोफेसर रिजवान हुसैन की मृत्यु लखनऊ में हुई - रिटायर शिक्षक प्रोफेसर राशिद नदवई की मृत्यु प्राइवेट नर्सिंग होम में हुई - रिटायर शिक्षक प्रोफेसर इकबाल अंसारी की मृत्यु कानपुर में हुई - प्रोफेसर सिराज उर रहमान की मृत्यु गाजियाबाद में हुई - प्रोफेसर सईद उज जमा की मृत्यु मेरठ में हुई - प्रोफेसर मुख्तार मोआलिजात की मृत्यु प्राइवेट नर्सिंग होम में हुई - प्रोफेसर मौला बख्श की मृत्यु प्राइवेट अस्पताल में हुई - प्रोफेसर यूनुस सिद्दीकी की मृत्यु दिल्ली के अस्पताल में हुई। - कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर जमशेद सिद्दीकी हार्ट संबंधी समस्या के चलते मृत्यु - प्रोफेसर मसूद आलम रिटायर उर्दू शिक्षक, अधिक उम्र के चलते - प्रोफेसर नजमुल हसन बहुत ज्यादा उम्र हो जाने के कारण - लॉ फैकल्टी के पूर्व डीन प्रोफेसर शब्बीर की घर पर मृत्यु हुई, संक्रमण ग्रस्त नहीं थे - धर्म शास्त्र विभाग के प्रोफेसर फरमान हुसैन - मेडिसिन विभाग के रिटायर शिक्षक प्रोफेसर आरिफ सिद्दीकी - रिटायर प्रोफेसर फरहत उल्ला खान की हार्ट अटैक से मौत - प्रोफेसर इकबाल अंसारी की अधिक उम्र संबंधी समस्या के चलते - अलीग सिराज अनवर एनसीईआरटी में कार्यरत थे - अलीग अब्बास मेहंदी कानपुर के इतिहासकार
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प्रोफेसर शकील अहमद समदानी - फोटो : Amar Ujala
प्रोफेसर शकील अहमद समदानी

प्रोफेसर जमशेद सिद्दीकी - फोटो : Amar Ujala
प्रोफेसर जमशेद सिद्दीकी

डॉक्टर शादाब अहमद खान - फोटो : Amar Ujala
डॉक्टर शादाब अहमद खान
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प्रोफेसर खालिद बिन यूसुफ - फोटो : Amar Ujala
प्रोफेसर खालिद बिन यूसुफ
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