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अलीगढ़ में ब्लैक फंगस के एक और मरीज ने दम तोड़ा

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अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के एक मरीज ने दम तोड़ दिया है। इस तरह मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के 4 मरीजों की मौत हो चुकी है। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि इसके उपचार में इस्तेमाल किए जाने वाले इंजेक्शन की भी कमी हो गई है। गंभीर हालत में एक मरीज को दिल्ली के लिए रेफर किया गया है। एक तरफ कोरोना वायरस संक्रमण में कमी आ रही है तो दूसरी तरफ ब्लैक फंगस का प्रकोप कहर बरपा रहा है। जेएन मेडिकल कॉलेज में ई एन टी विभाग के चेयरमैन प्रोफेसर आफताब ने बताया कि बुधवार की रात ब्लैक फंगस के एक मरीज ने दम तोड़ दिया। अब तक मेडिकल कॉलेज में 37 मरीज ब्लैक फंगस के आ चुके हैं। इनमें से 4 की मौत हो चुकी है। 21 मरीज अभी भर्ती हैं, शेष स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मरीजों के उपचार में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन की उपलब्धता नहीं है। जिसके कारण उपचार में परेशानी आ रही है। अगर इंजेक्शन उपलब्ध हो तो हम मरीजों को बेहतर चिकित्सा दे सकेंगे। डायबिटीज से ग्रस्त मरीजों को ब्लैक फंगस का खतरा अधिक : प्रोफेसर सिद्दीकी अलीगढ़। जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी कहते हैं कि संक्रमण के शिकार वह मरीज जो डायबिटीज से भी ग्रस्त हैं, उनमें ब्लैक फंगस संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए ऐसे लोगों को स्वस्थ होने के बाद भी बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक हो चुके मरीजों की शारीरिक और मानसिक समस्याओं में सहायता प्रदान करने के लिए जेएन मेडिकल कॉलेज में पोस्ट कोविड-19 क्लीनिक का संचालन किया जा रहा है। लेकिन जानकारी के अभाव में और जागरूकता की कमी के चलते हैं लोग इसका भली प्रकार से फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। डॉक्टर्स के मुताबिक संक्रमण से ठीक होने के बाद लोग यह मान लेते हैं कि धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो जाएगा, जो कि सही नहीं है
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