अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
कहने को ये आधी आबादी है। मगर अपने जिले की सियासत में इनका दखल बेहद कमजोर दिखाई देता है। आजादी से लेकर आज तक अपने जिले से सिर्फ छह महिला विधायक निर्वाचित होकर विधानसभा में पहुंची हैं। इनमें से सिर्फ दो ऐसी विधायक रहीं, जो गैर सियासी परिवार से सियासत में आईं और निर्वाचित होकर विधानसभा क्षेत्र का नेतृत्व किया।
वहीं चार ऐसी विधायक रहीं, जो सियासी परिवार से होने के नाते चुनाव मैदान में आईं और जीत दर्ज की। जिले की सियासत और महिला मतदाताओं के आंकड़े पर गौर करें तो 1969 के चुनाव से महिला मतदाताओं के आंकड़े निर्वाचन आयोग ने प्रदर्शित कर रखे हैं।
तब से लेकर 2012 तक लगातार महिला मतदाताओं का प्रतिशत बढ़ा है। मतदान प्रतिशत भी तेजी से बढ़ा है। कई बार तो ऐसे मौके रहे हैं कि कुल मतदान के 50 फीसदी तक महिलाओं ने मतदान किया है। मगर हमारे जिले से महिलाओं को कम ही चुनाव मैदान में भाग्य आजमाने का मौका मिला है।
हालांकि कुछ चुनावों में महिलाएं हारी थी हैं, जिनमें ऊषा रानी प्रमुख नाम है। इस बार भी चुनाव मैदान में कई महिलाएं हैं। अब देखना यह होगा कि कितनी महिलाएं विधानसभा तक पहुंचेंगी। हालांकि, पूर्व में विधायक रहीं महिलाएं अपने अनुभव के आधार पर यही कहती हैं कि महिलाएं आगे आएं। इस फील्ड में भी वे कंधे से कंधा मिलाकर चल सकती हैं। किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं हैं।
- 2004 के उपचुनाव में बाबूजी (कल्याण सिंह) ने मुझे पहली बार अतरौली से चुनाव लड़ने का आशीर्वाद दिया था। तब मुझे घर-घर महिलाओं के बीच प्रचार करने का अवसर मिला। उनके दु:ख दर्द को समझने और उनकी समस्याओं के निराकरण का अवसर मिला। 2004 से लगातार में क्षेत्र में सक्रिय हूं। 2007 में जनता ने मुझे फिर से आशीर्वाद देकर विधानसभा पहुंचाया। महिलाओं से मेरा लगातार संवाद रहता है। जनता से मिल रहे स्नेह से मुझे आज भी ऐसा लगता है कि मैं अभी भी विधायक ही हूं। महिलाओं को राजनीति में आगे आना चाहिए। आज सोशल मीडिया के दौर में राजनीति बेहद आसान है, कहीं कोई भी समस्या होती है तो तत्काल जानकारी मिल जाती है। महिलाएं किसी क्षेत्र में कम नहीं हैं। महिलाएं भी राजनीति में आएं।
- प्रेमलता वर्मा, पूर्व विधायक अतरौली
- इगलास क्षेत्र के विधायक रहे मेरे पति की हत्या के बाद घरेलू महिला होने के बाद भी बेटे की उम्र कम होने के कारण जब मैं चुनाव मैदान में उतरी तो मुझे लोगों का असीम प्यार मिला। कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। चूंकि, मैं लोगों के बीच बहू बनकर आशीर्वाद लेने पहुंची थी। विधायक बनने के बाद लखनऊ में पार्टी गाइडलाइन के अनुसार काम किए। यहां क्षेत्र को मेरे बेटे ने संभालना शुरू कर दिया। मेरे पति द्वारा क्षेत्र में किए गए काम का ही मुझे लगातार प्यार मिला और आज भी वह प्यार मिलता है। यह सही है कि राजनीति में महिलाओं की सहभागिता कम है और आगे आना चाहिए। उस दौर की सियासत व वर्तमान की सियासत के स्तर में गिरावट आई है। मगर महिलाओं को कहीं भी खुद को कम नहीं समझना चाहिए।
- विमलेश चौधरी, पूर्व विधायक इगलास
- मेरे पति आयकर विभाग में थे और हम गांधी नगर में रहते थे। उस समय पार्टी की मंडल व वार्ड स्तर की गतिविधियों में यूं ही शामिल होना शुरू किया। तभी 1996 के चुनाव में पार्टी के कुछ वरिष्ठजनों ने बाबूजी कल्याण सिंह के समक्ष मेरे नाम का प्रस्ताव कोल सीट पर चुनाव लड़ने के लिए रखा। बाबूजी ने मुझे बुलाया और पूछा कि चुनाव लड़ना चाहती हो। मैंने हामी भर दी और पति को बताया कि पार्टी चुनाव लड़ाना चाहती है। बस टिकट मिला। विधयाक निर्वाचित हुई। कभी यह महसूस नहीं हुआ कि महिला होने के नाते मैं क्षेत्र में, पार्टी में या विधानसभा में कमतर हूं। हमेशा पूरा सम्मान मिला। मेरा यही सुझाव व संदेश है कि महिलाओं को अपनी झिझक तोड़कर आगे आना चाहिए। मैंने विधायकी के बाद खुद जिला पंचायत अध्यक्ष जीता, बहू को ब्लाक प्रमुख बनाया। अब राज्य महिला आयोग में सदस्य हूं।
- रामसखी कठेरिया, पूर्व विधायक कोल
ये रहीं महिला विधायक
- ज्ञायत्री देवी:-चौ.चरण सिंह की पत्नी ज्ञायत्री देवी ने 1969 का चुनाव इगलास सीट से बीकेडी के बैनरतले लड़ा और कांग्रेसी दिग्गज मोहनलाल गौतम को हराया।
- पुष्पा चौहान:-सिकंदराराऊ सीट से कांग्रेस आई की पुष्पा चौहान ने 1980 के चुनाव में जीत दर्ज की और लोकदल के सुरेश प्रताप सिंह को हराया।
- डॉ.ज्ञानवीर सिंह:-चौ.चरण सिंह की बेटी डॉ.ज्ञानवती सिंह ने 1991 का चुनाव इगलास सीट से जनता दल के बैनरतले जीत दर्ज की और बीजेपी के विक्रम सिंह हिंडौल को हराया। दूसरा चुनाव इन्होंने 1996 में खैर सीट से बीजेपी के बैनरतले लड़ा और कांग्रेस के जगवीर सिंह को हराकर विधायक निर्वाचित हुईं।
- रामसखी कठेरिया:-नौकरीपेशा परिवार से ताल्लुक रखने वाली रामसखी कठेरिया ने 1996 में बीजेपी के बैनरतले कोल सीट से चुनाव जीता और बसपा के गंगा प्रसाद को हराया।
- प्रेमलता वर्मा:-सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री स्व.कल्याण सिंह की पुत्रवधु प्रेमलता वर्मा ने 2007 में बीजेपी के बैनरतले अतरौली सीट से जीत दर्ज की और बसपा के हरीश शर्मा को हराया। इससे पहले वे 2004 के उपचुनाव में भी इसी सीट से विधायक निर्वाचित हुई थीं।
- विमलेश चौधरी:-इगलास के पूर्व विधायक स्व.मलखान सिंह की पत्नी अपने पति की हत्या के बाद 2007 के चुनाव में रालोद के बैनरतले निर्वाचित हुईं और बसपा के मुकुल उपाध्याय को हराया।
वर्ष कुल मतदाता कुल महिला मतदाता महिला मतदान हुआ
1969 10,93,031 5,04,569 2,70,844
1974 12,10,209 5,44,104 3,20,608
1977 12,75,081 5,73,800 2,33,002
1980 13,80,221 6,20,290 2,45,058
1985 15,34,653 6,85,567 3,04,447
1989 18,24,994 8,21,239 4,18,425
1991 18,43,945 8,29,781 4,24,864
1993 20,68,967 9,27,288 5,53,774
1996 23,72,054 10,55,179 5,28,064
यहां से जनपद हाथरस अलग होने पर सात सीटें शेष रह गईं
2002 17,15,085 7,74,301 3,70,295
2007 18,42,907 8,38,983 3,64,021
2012 21,60,138 9,58,779 5,91,940
रामसखी कठेरिया।- फोटो : CITY OFFICE