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अलीगढ़ : भाजपा नेता योगेश के घर हुए घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार कौन

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सिर पर 11 लाख रुपये का इनाम घोषित करने वाले युवा भाजपा नेता योगेश वार्ष्णेय की गिरफ्तारी को आई पश्चिम बंगाल की सीआईडी टीम के पहुंचने पर हुए घटनाक्रम के लिए कौन जिम्मेदार है? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए सीओ द्वितीय सभी पक्षों के आरोपों और पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।
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उनकी जांच के बाद ही तय होगा कि योगेश के घर हुए घटनाक्रम के लिए कौन जिम्मेदार है? सीओ ने साफ किया है कि इस मामले में पश्चिम बंगाल की टीम मुकदमा या कार्रवाई के लिए कोई तहरीर देकर नहीं गई है। बस यहां आने से लेकर जाने तक हुए पूरे घटनाक्रम का ब्योरा देकर गई है। उस ब्योरा रिपोर्ट को आधार बनाकर जांच की जा रही है।
अनबन व वारंटों की पत्रावली छीनने का आरोप
घटनाक्रम शुक्रवार का है, जब पश्चिम बंगाल की सीआईडी टीम के एसआई सुवासीष दत्त व सिपाही आलमगीर योगेश वार्ष्णेय के खिलाफ न्यायालय से जारी सीआरपीसी की धारा 82 के तहत कुर्की नोटिस/गिरफ्तारी वारंट लेकर यहां पहुंचे थे। उनके द्वारा थाना पुलिस को दिए गए ब्योरा रिपोर्ट में उल्लेख है कि वे सबसे पहले गांधीपार्क थाने गए।
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जहां इंस्पेक्टर गश्त पर थे और उन्हें एसएसआई शिवप्रताप मिले। उन्हें वारंट दिखाते हुए योगेश के घर जाने के लिए मदद मांगी। वहां से उन्हें अचलताल चौकी का अतिरिक्त कार्य संभाल रहे दरोगा संदीप के पास भेजा गया। संदीप उन्हें अपने साथ योगेश के घर ले गए। इस दौरान घर में प्रवेश करने पर सादा कपड़ों में होने के कारण उनकी योगेश के परिवार से अनबन हो गई।
इसी बीच शोरशराबे पर कुछ अन्य लोग आ गए, जिन्होंने अनबन के बीच धक्का-मुक्की व खींचतान में वारंटों की पत्रावली छीन ली। इस दौरान साथ गए दरोगा संदीप घर के बाहर थे। मगर वे विवाद होने पर अंदर मदद को आए। मगर भीड़ बढ़ चुकी थी। बाद में खबर पर आला पुलिस अधिकारी पहुंचे, जिनके आने पर विवाद शांत हुआ और छीनी गई पत्रावली वापस मिली। तब बैरंग थाने गए।
सीओ की जांच में इन सवालों की तलाश
सीओ द्वितीय मोहसिन खान स्तर से जो जांच की जा रही है, उसमें ऐसे तमाम सवाल हैं, जिसमें थाना व चौकी स्तर से हुई लापरवाही और मौके पर पैदा हुए हालात की वजह तलाशी जा रही हैं। सबसे पहले ये कि जब पश्चिम बंगाल पुलिस एसएसआई से मिली तो उन्होंने बिना जांच पड़ताल या जीडी तस्करा या इंस्पेक्टर को बिना संज्ञान लिए प्रकरण संदीप को क्यों सौंप दिया।
जब संदीप के पास टीम पहुंची तो उन्होंने प्रकरण की बारीकी समझी या नहीं। जब टीम संदीप संग योगेश के घर पहुंची तो दरवाजे पर टीम को रोककर पहले योगेश के विषय में क्यों नहीं पूछा गया। टीम सीधे अंदर कैसे पहुंच गई और अंदर विवाद होने पर संदीप किस भूमिका में थे। भीड़ बढ़ने पर संदीप ने अन्य पुलिस को बुलाने में देरी क्यों की।
- पश्चिम बंगाल पुलिस टीम ने कोई ऐसी तहरीर मुकदमा या कार्रवाई के लिए नहीं दी है, जिसे दर्ज किया जाए। हां, वे आने के बाद हुए घटनाक्रम की रिपोर्ट देकर गए हैं। दूसरे पक्ष ने भी तहरीर दी है। उसी आधार पर अभी जांच की जा रही है। जांच में चौकी के दरोगा की भूमिका को भी ध्यान में रखा जा रहा है, जिस स्तर से लापरवाही सामने आएगी। उसी के अनुसार अधिकारियों के निर्देश पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। अभी तक इस मामले में कोई लिखा-पढ़ी नहीं की गई है। - मोहसिन खान, सीओ द्वितीय
घटना के बाद मोहल्ले में पहुंच गए थे योगेश
पुलिस की अब तक की जांच में यह तो साफ है कि जिस वक्त पुलिस टीम उनके घर पहुंची, उस समय योगेश घर पर नहीं थे। वे बाजार में थे। मगर, जब विवाद हुआ और टीम संग मारपीट तक हो गई। इस दौरान वे मोहल्ले में पहुंच गए थे। मोहल्ले के लोगों ने उनसे वहां से चले जाने के लिए कहा तो वे घर व मोहल्ले में पुलिस के रहने तक दाएं-बाएं हो गए। जब पुलिस टीम चली गई तो वे अपने घर पहुंचे और पूरा प्रकरण समझा।
ये है प्रकरण
वाकया अगस्त 2017 का है, जब पश्चिम बंगाल के वीरभूमि जिले में हनुमान जयंती के मौके पर जुलूस निकाल रहे हिंदू जागरण मंच कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज हुआ था। इससे आहत शहर के गांधी नगर निवासी युवा भाजपा नेता योगेश वार्ष्णेय ने लाठीचार्ज के लिए वहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बताया और उनका सिर लेकर आने वाले को 11 लाख के इनाम की घोषणा करते हुए बयान जारी कर दिया था।
12 अगस्त 2017 को जारी बयान के बाद देश की सियासत में भूचाल मचा था। संसद तक में यह मुद्दा गूंजा था। इस मामले में टीएमसी के वीरभूमि के ही नेता ने वहां मुकदमा दर्ज कराया था। उस मुकदमे पर उस समय भी पश्चिम बंगाल पुलिस योगेश की गिरफ्तारी को यहां आई थी। मगर उस समय भी भाजपा नेताओं के दबाव में साथ नहीं ले जा सकी थी। इसी मामले में अब टीम गिरफ्तारी/कुर्की वारंट लेकर आई थी।
दोपहर में पश्चिम बंगाल रवाना हुई पुलिस टीम
युवा भाजपा नेता योगेश वार्ष्णेय की गिरफ्तारी व कुर्की नोटिस लेकर आई टीम शनिवार को बैरंग लौट गई। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार टीम दोपहर में ट्रेन मिलने के बाद यहां से कोलकाता के लिए रवाना हो गई।
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