न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
सुख-समृद्धि के प्रतीक मां लक्ष्मी और विघ्न विनाशक भगवान श्री गणेश का दीपावली पर सोमवार को भव्य पूजन होगा। प्रतिष्ठानों में विशेष अनुष्ठान का आयोजन होगा। दीपोत्सव को लेकर घर, दुकान एवं व्यापारिक प्रतिष्ठानों, भवनों पर नयनाभिराम रंग-बिरंगी रोशनी की गई है। ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि कार्तिक कृष्णपक्ष चतुर्दशी तिथि सांयकाल 05:27 तक मान्य रहेगी।
इसके उपरांत सूर्यास्त से पहले ही अमावस्या तिथि (दीपावली) प्रारंभ हो जाएगी। हस्त नक्षत्र दोपहर 02:41 तक रहेगा। दीपक जलाना पूजा करने का सर्वोत्तम समय शाम 05:30 से रात 08:30 बजे तक प्रदोष काल में माना जाएगा। उन्होंने बताया कि दीपावली और गोवर्धन पूजा के बीच में कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या वाले दिन 25 अक्तूबर को भारत में साल का आखिरी दृश्य खंडग्रास सूर्यग्रहण पड़ेगा। दोपहर 2:29 से लगेगा, जिसकी समाप्ति शाम 6:32 पर होगी। अलीगढ़ में ग्रहण का प्रारंभ शाम 4:32 पर होगा इसका मध्यकाल शाम 5:29 पर रहेगा।
सूर्यास्त सांय 6:40 पर होगा और ग्रहण का समाप्ति का काल समय 6:27 पर हो जाएगा। उन्होंने बताया कि ग्रहण काल में अन्नकूट गोवर्धन पूजा निषेध कही जाएगी। दीपावली के अगले दिन 25 अक्तूबर को गोवर्धन पूजा के समय प्रतिपदा तिथि का अभाव है। धर्म शास्त्र के अनुसार ग्रहण लगने से पहले के समय को अशुभ माना जाता है और इसे ही सूतक काल कहते हैं।
सूतक काल में कोई भी मांगलिक काम नहीं होते और न ही किसी व्यक्ति को इस समय में नए काम शुरू करना चाहिए। उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार अन्नकूट गोवर्धन पूजा 26 अक्तूबर को करना श्रेष्ठ माना जाएगा। अगले दिन 27 अक्तूबर को भाई दूज का त्योहार मनाया जाएगा । यह ग्रहण तुला राशि एवं स्वाती नक्षत्र में लग रहा है। अत: इस नक्षत्र के लोग इसे देखने से जरूर बचें।
दिवाली पर निकलेगा प्रदूषण का दिवाला
अलीगढ़ । पांच दिवसीय दीपोत्सव के तहत खुशियों के प्रतीक दीपावली की खुशियां मनाने का सिलसिला शुरू हो गया है। बच्चे ही नहीं बड़े भी पूरे उल्लास से बम-पटाखे, फुलझड़ियां और अनार जलाएंगे। तरह-तरह की आवाज व रोशनी निकलेगी। चिंता ये है कि इनसे ध्वनि एवं वायु प्रदूषण का स्तर भी बढ़ जाएगा, जो आपकी सेहत का दिवाला निकाल सकता है। ऐसे में यह आतिशबाजी श्वांस, हृदय एवं अन्य गंभीर रोगियों के लिए काफी कष्टदायक हो सकती है। हादसों में आंखों एवं त्वचा को नुकसान होने का खतरा भी रहेगा। ऐेसे में विशेषज्ञ आतिशबाजी को लेकर सचेत रहने और सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
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ईको फ्रेंडली पटाखों की धूम
नुमाइश में सजे आतिशबाजी बाजार में 50 करोड़ से अधिक के पटाखों की बिक्री हो चुकी है। देर रात तक यहां ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। इस बार बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी वर्ग के लिए विशेष ईको फ्रेंडली पटाखे बाजार में आए हैं। इसमें टावर अनार, रेलवे सिग्नल अनार, कलर चेंजिंग बटर फ्लाई, कोठी, ईको फ्रेंडली, फुलझड़ी, मैजिक विप क्रेकलिंग आदि प्रमुख हैं। इस बार बच्चों के लिए विशेष कलर चेंजिंग बटर फ्लाई चार रंग बिखेरेगी। रिंगकेक गन में विशेष प्रकार की टिकड़ी लगेगी, जो बच्चों के लिए सुरक्षित है। इसकी खासियत यह है कि यह एक साथ छह राउंड तक फायर कर सकती है। इस बार फुलझड़ियां भी ईको फ्रेंडली आई है। इनमें से कलर भी निकलेगा । इस दौरान धुआं नही होगा। साथ ही क्लटर- 64 पटाखा 64 बार फूटेगा। जो जमीन से 450 फीट ऊपर जाकर फूटने के साथ ही रंग- बिरंगी आतिशबाजी का नजारा देखने को मिलेगा। मोस्ट वांटेड पटाखे के एक पैकेट में तीन प्रकार की आतिशबाजी होगी जो 750 फीट ऊपर जाकर आसमान को चकाचौंध कर देगी। अनार में इस बार लॉलीपोप और कोल्ड ड्रिंक स्टाइल में अनार आए है, जिसमें केकरिग के साथ ही कलर निकलेगा।
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ग्रीन पटाखों के नाम पर धोखा
पर्यावरण प्रदूषण को देखते हुए न्यायालय ने अलीगढ़ समेत प्रदेश के कई अन्य जिलों में दीपावली पर मात्र ग्रीन पटाखे ही बेचने के आदेश दिए हैं। प्रशासन ने भी आतिशबाजी विक्रेताओं को नसीहत दी है कि वे मात्र ग्रीन पटाखे ही बेचें, लेकिन हकीकत में यह मात्र टैग भर है और उन पर ग्रीन टैग लगा दिया गया है। इस साल बिक रहे ग्रीन पटाखे पिछले साल की तुलना में 15 से 20 फीसदी तक महंगे हैं। आतिशबाजी पर महंगाई का असर दुकानदारी पर है। बिक्री दस से पंद्रह प्रतिशत तक कम है। ग्रीन पटाखे इस साल ही आए हैं। कंपनियों ने इस बार प्रदूषण के चलते पहले से ही टैग लगे ग्रीन पटाखे भेजे हैं। इनके महंगे होने के कारण लोग कम मात्रा में खरीद कर रहे हैं।
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पटाखों से फैलने वाले वायु प्रदूषण की 31 अक्तूबर तक मॉनीटरिंग
महानगर में दीपावली पर पटाखों से फैलने वाले वायु प्रदूषण की 31 अक्तूबर तक मॉनीटरिंग होगी। वायु प्रदूषण की इस बार एक्यूआई की रिपोर्ट कानपुर से जारी होगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. जेपी सिंह ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दीपावली से पहले एवं उसके बाद एक्यूआई की मॉनीटरिंग के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि जांच फिल्टर दो नवंबर तक कानपुर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रयोगशाला में भेजे जाएंगे। यहां दो दिनों जांच के बाद इसकी रिपोर्ट जारी की जाएगी। उन्होंने बताया कि पटाखे जलने के बाद वायु मंडल में कौन सा हैवी मेटल अधिक मात्रा में पाया गया है इसकी जांच की जाएगी। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय पर तीन शिफ्टों में प्रदूषण की निगरानी की जा रही है।