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अलीगढ़ शहर: ताला म्यूजियम-स्मार्ट सिटी बनाने के दावों के बीच गलियां बनीं नालियां, प्रवेश द्वार पर राख ही राख

Sat, 19 Sep 2026 04:45 PM IST
Chaman Kumar Sharma आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

बरौला-जाफराबाद में गलियां नालियों में तब्दील हो गई हैं, महीनों से सड़कें गंदे पानी और गहरे गड्ढों में डूबी हैं और प्रवेश द्वार पर राख उड़ने से निकलना मुश्किल है, शुक्रवार को अमर उजाला टीम के दौरे पर यह इलाका पिछड़े ग्रामीण क्षेत्र जैसा लगा जबकि यहां पक्के मकान और ताला-हार्डवेयर के कारखाने हैं।
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बरौला मुख्य मार्ग पर डाली काली राख, कीचड़ से गुजरतीं महिलाएं - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अलीगढ़ नगर निगम सेवा भवन से महज छह किलोमीटर दूर बरौला-जाफराबाद की तस्वीरें स्मार्ट सिटी के दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। यहां लोग घर से निकलने के लिए सड़क नहीं, गंदे पानी और गहरे गड्ढों के बीच रास्ता तलाशते हैं। महीनों से कई गलियां पानी में डूबी हैं। कहीं सड़क दिखाई नहीं दे रही तो कहीं पानी के नीचे छिपे गड्ढे राहगीरों के लिए खतरा बने हुए हैं।

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शुक्रवार को जब अमर उजाला की टीम यहां पहुंची तो पहली नजर में यह इलाका शहर से दूर किसी पिछड़े ग्रामीण क्षेत्र जैसा लगा। लेकिन पूछताछ में सामने आया कि यह देहात नहीं, नगर निगम के वार्ड 64 का हिस्सा है। यहां अधिकांश मकान पक्के हैं और कई घरों में ताला-चाबी व हार्डवेयर का काम होता है। यानी शहर के कारोबार से जुड़ा यह इलाका मूलभूत सुविधाओं के मामले में पीछे छूट गया है।

रेलवे लाइन से दो हिस्से में बंटे बरौला-जाफराबाद में एक ओर गलियों में गंदा पानी और गहरे गड्ढे हैं तो दूसरी ओर कच्चे रास्ते पर मिट्टी और राख की परत है। हवा चलने पर राख उड़ती है और रास्ते से गुजरना मुश्किल हो जाता है। शुक्रवार सुबह इसी रास्ते से गुजर रहा एक दंपती गिरकर चोटिल हो गया। शाम होते ही अंधेरे के कारण खतरा और बढ़ जाता है। शहर में ताला म्यूजियम की पहल करने वाले नगर निगम के सामने सवाल यह है कि ताला-हार्डवेयर के कारोबार से जुड़े इस इलाके की बुनियादी सुविधाएं कभी क्यों नहीं सुधरीं?

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पानी में डूबे गड्ढे, हर कदम पर खतरा
स्थानीय महिलाओं के मुताबिक बच्चों को स्कूल भेजना रोज की चुनौती है। गंदे पानी से होकर गुजरने के कारण स्कूल ड्रेस और जूते खराब हो जाते हैं। बारिश के दौरान स्थिति और बिगड़ जाती है। बेबी ने बताया कि छोटे बच्चों के साथ घर से निकलते समय डर लगता है कि कहीं गड्ढे में गिरकर चोट न लग जाए। शाम के बाद अंधेरा होने से खतरा और बढ़ जाता है। अंजू देवी ने बताया कि शुक्रवार सुबह एक दंपती इसी रास्ते में गिरकर चोटिल हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि रास्ते की खराब हालत के कारण आए दिन लोग गिरते रहते हैं।

वाह रे सिस्टम : खुदाई के बाद सड़क ही नहीं बनाई
रामवती शर्मा ने बताया कि गलियों में पानी की पाइपलाइन डालने के लिए खुदाई की गई थी। इसके बाद रास्तों की ठीक से मरम्मत नहीं हुई। गड्ढे बढ़ते गए और उनमें पानी भरता गया। कारखाना संचालक अतुल कुमार वर्मा ने कहा कि गलियां तालाब बन चुकी हैं। कारीगरों को आने-जाने में परेशानी होती है। हजारों रुपये गृहकर-जलकर देने के बाद भी नगर निगम से मूलभूत सुविधा नहीं मिल रही। पूर्व प्रधान बेनीराम ने कहा कि नगर निगम में शामिल होने से पहले वे गांव में थे। तब कम से कम सफाई समय पर हो जाती थी। अब लोग इस रास्ते से आने-जाने में कतराते हैं। प्रवेश द्वार पर उड़ती राख ने परेशानी और बढ़ा दी है।
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शिकायतें मोबाइल से भेजीं, समाधान नहीं हुआ
स्थानीय निवासी राजकुमार ने बताया कि उन्होंने नगर आयुक्त और मेयर को मोबाइल से शिकायत भेजी, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ। लोकेश ने कहा कि नगर निगम सेवा भवन से महज छह किलोमीटर दूर होने के बावजूद अफसर यहां की स्थिति देखने नहीं पहुंचे हैं।

नगर आयुक्त बोले- टीम भेजकर कराएंगे निरीक्षण
नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने कहा कि बरौला-जाफराबाद में टीम भेजकर पूरे क्षेत्र का निरीक्षण कराया जाएगा। गलियों को ठीक कराने और जलनिकासी की समस्या दूर करने के साथ प्रवेश द्वार की सड़क भी ठीक कराई जाएगी। राख हटवाने की कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह काम जल्द कराया जाएगा।
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