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अलीगढ़ः वीजा नियमों के उल्लंघन में फंसे श्रीलंकाई जमाती..हाईकोर्ट से होगी जमानत

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अभिषेक शर्मा
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भले ही दिल्ली सहित यूपी के कई जिलों में पकड़े गए विदेशी जमातियों को जुर्माना और छोटी-छोटी सजा के बाद रिहा कर दिया गया हो। मगर, अलीगढ़ में पकड़े गए दो श्रीलंकाई मूल के जमातियों की जमानत में वीजा नियमों के उल्लंघन का आरोप बाधा बन गया है। इसलिए उनकी रिहाई संभव नहीं हो पा रही और उनकी जमानत सत्र न्यायालय से खारिज हो गई। इसके बाद अब उनकी जमानत के लिए हाईकोर्ट में प्रयास शुरू हो गए हैं और इसके लिए श्रीलंका दूतावास ने एक अधिवक्ता नियुक्त किया है।
कोरोना वायरस संक्रमण काल के शुरुआती दौर में दिल्ली की तबलीगी जमात में शामिल जमातियों से संक्रमण फैलने के शोर के बीच देशभर में जमात के लोगों को क्वारंटीन किया गया था। उनके खिलाफ लॉकडाउन उल्लंघन, महामारी अधिनियम में कार्रवाई भी हुई थी। इस कार्रवाई के दौरान अपने शहर में पकड़े गए श्रीलंकाई मूल के दो जमाती बुरे फंसे हैं। उन पर भारतीय वीजा नियमों के उल्लंघन का संगीन आरोप है। इसके चलते उनकी वतन वापसी का मुद्दा अटक गया है।
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उस वक्त जिले में 72 जमाती आए थे। धरपकड़ अभियान में रंगरेजान में 13, अतइयान में 12, गाेिवंद नगर में 10, कासिमपुर में 102, जंगलगढ़ी 9, पिलौना 16 और शेष जमाती फैज मस्जिद इलाके में मिले थे। इन्हीं में से रंगरेजान मस्जिद इलाके में 13 लोग ठहरे थे। इन्हीं में मोहम्मद मुर्शीदउररहमान, एमजे हिपलुर रहमान नाम के दो श्रीलंकाई थे। इनकी जांच व पासपोर्ट सत्यापन में पता चला कि ये दोनों टूरिस्ट वीजा पर फरवरी में 90 दिनों के लिए भारत आए थे। नियमों के अनुसार इस दौरान उनको यहां के किसी धार्मिक जलसे में शामिल नहीं होना चाहिए था। इसलिए उन पर लाकडाउन उल्लंघन, महामारी अधिनियम, आपदा अधिनियम, वीजा नियम उल्लंघन का मुकदमा दर्ज हुआ। पासपोर्ट जब्त कर लिए गए। उन्हें जेल भेज दिया गया।
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अलीगढ़ में इनकी पैरवी कर रहे एडवोकेट आले नवी के अनुसार सत्र न्यायालय में उनकी जमानत अरजी दी गई थी। मगर वरना वीजा नियम के उल्लंघन वाले अपराध में उस अर्जी को खारिज कर दिया गया। अब हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता इस मामले पैरवी करेंगे क्योंकि श्रीलंका दूतावास ने इस मामले में दिलचस्पी लेकर प्रक्रिया को आगे बढ़वाया है। दूतावास ने ही अधिवक्ता नियुक्त किए हैं। बता दें कि देश में दिल्ली, सहारनपुर, बागपत आदि में विदेशी जमाती पकड़े गए थे, वे सभी रिहा हो गए। देश के दूसरे राज्यों के जमाती भी रिहा हो गए।
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