फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Aligarh News: 5.50 करोड़ के कूड़ेदान कबाड़ बने, फिर भी साफ नहीं हुआ अलीगढ़

विज्ञापन
कचरा पात्र। - फोटो : samvad
विज्ञापन
शहर में सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन शहर आज भी कूड़े से जूझ रहा है। नगर निगम ने पांच साल में 5.50 करोड़ रुपये खर्च कर 37 हजार से ज्यादा कूड़ेदान खरीदे और बांटे, लेकिन इनमें से बड़ी संख्या या तो गायब हो गए, टूट गए या कबाड़ बनकर रह गए। अब वही निगम पुरानी व्यवस्था को फेल मानते हुए नई स्मार्ट कूड़ेदान योजना शुरू करने जा रहा है।
विज्ञापन




नगर निगम के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए पार्षद कुलदीप पांडेय ने बताया कि पांच साल में 5.50 करोड़ रुपये से अधिक बजट कूड़ेदान के रखरखाव और उन्हें बांटने पर खर्च हुआ। सार्वजनिक स्थानों पर दो हजार लोहे व फाइबर के कूड़ेदान लगाए गए थे। इसके अलावा, 70 वार्डों में घर-घर कचरा अलग करने के लिए 35 हजार नीले और हरे कूड़ेदान बांटे गए।



जमीनी हकीकत यह है कि इनमें से ज्यादातर कूड़ेदान अब सड़कों से गायब हैं या टूट-फूटकर बेकार हो चुके हैं। कई जगहों पर इनके सिर्फ ढांचे बचे हैं, जबकि कई पूरी तरह चोरी हो चुके हैं।
विज्ञापन



इस पूरी योजना के फेल होने के पीछे दो बड़ी वजहें सामने आईं, जिनमें से एक कूड़ेदानों की चोरी और तोड़फोड़ रोकने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। दूसरी एनजीटी के बदले मानकों के अनुसार सिस्टम को समय पर अपडेट नहीं किया गया। इस तरह रखरखाव की कमी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।




पार्षदों का कहना है कि जब पुराने कूड़ेदान संभाले नहीं गए, तो नई योजना कितनी सफल होगी? अब नगर निगम क्यूआर कोड से कूड़ेदान ट्रैक किए जाने का दावा कर रहा है। ऐसे में सवाल लामजी है, क्या नई स्मार्ट योजना सफाई लाएगी या यह भी कुछ साल बाद कबाड़ बन जाएगी?




10 हजार कूड़ेदान गोदाम में ही बर्बाद

पार्षद पुष्पेंद्र जादौन ने बताया कि साल 2023 से पहले खरीदे गए 10 हजार प्लास्टिक कूड़ेदान, जिन्हें घर-घर बांटना था, वे नगर निगम की वर्कशॉप में पड़े-पड़े खराब हो गए। यानी जिन कूड़ेदानों से शहर साफ होना था, वे इस्तेमाल से पहले ही बेकार हो गए। अब जो कूड़ेदान लगाए जा रहे हैं, उनमें स्थानीय पार्षद से राय नहीं ली जा रही। जहां उपयोग नहीं है, वहां की सूची बना रहे हैं।





वर्तमान स्थिति



90% घरों से डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने का दावा

300 गाड़ियां कचरा प्लांट तक पहुंचा रहीं



10 लाख मीट्रिक टन में से तीन लाख टन कचरे का निस्तारण

अब नगर निगम एनजीटी के मानकों के अनुरूप स्मार्ट कूड़ेदानों की व्यवस्था कर रहा है, जिनकी निगरानी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से की जाएगी। अब मकसद सिर्फ कूड़ेदान रखना नहीं है बल्कि उनकी निगरानी कर उनको सही हालत में रखना भी है। यह चोरी भी नहीं होंगे क्योंकि क्यू आर कोड से इनको स्कैन कर डिजिटली ट्रैक किया जा सकेगा। इससे सफाई व्यवस्था में सुधार होगा। - प्रेम प्रकाश मीणा, नगर आयुक्त, नगर निगम
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें