जमीन के बदले मिलेंगे विकसित भूखंड
राजपुरा इंडस्ट्रियल सिटी की प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, एक एकड़ जमीन देने वाले किसान को स्थान के आधार पर 25 फीसदी तक विकसित जमीन वापस मिल सकती है। पात्रता की पुष्टि परियोजना की आधिकारिक शर्तों से किया जाना जरूरी है।
नौ लोगों की टीम कर रही काम
जमीन जुटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एडीए की ओर से एक कंसल्टेंसी कंपनी की मदद ली जा रही है। कंपनी के प्रतिनिधि के अनुसार, क्षेत्र में करीब नौ लोगों की टीम काम कर रही है। इसमें दो लेखपाल और सात सहायक कर्मचारी शामिल हैं। टीम किसानों से संपर्क करने, जमीन के दस्तावेजों की जानकारी जुटाने और सहमति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में लगी है। जमीन जुटाने के बाद सड़क, बिजली, पानी और सीवर जैसी सुविधाओं का विकास परियोजना का अगला अहम चरण होगा।
ऐसे पूरी होती है लैंड पुलिंग प्रक्रिया
लैंड पुलिंग में किसान अपनी जमीन योजना के लिए देते हैं। इसके बाद विकास प्राधिकरण उस जमीन पर सड़क, बिजली, पानी, सीवर और दूसरी बुनियादी सुविधाएं विकसित करता है। योजना की शर्तों के अनुसार, किसान को उसकी दी गई जमीन का एक हिस्सा विकसित भूखंड के रूप में वापस मिलता है। इससे किसान को केवल जमीन देने वाले के बजाय विकसित क्षेत्र में भूखंड का मालिक बनने का अवसर मिलता है।
पूरे क्षेत्र का होगा विकास
गांव मोहसमपुर निवासी देवेंद्र शर्मा की तीन बीघा जमीन राजपुर के गाटा संख्या 1790 पर है। इसकी पुलिंग करने के लिए एडीए की टीम उनसे संपर्क में है। जल्द ही वह इसका करार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट से पूरे क्षेत्र का तेज विकास होगा, जिसका लाभ उन्हें भी होगा।
मेरे परिवार में पांच भाइयों के पास 120 बीघा जमीन है। सोचा है कि 60 बीघा जमीन पुलिंग के माध्यम से देंगे और शेष 60 बीघा का मुआवजा लेंगे। रुपया आने के बाद खर्च हो जाता है, लेकिन जो जमीन विकसित होकर मिलेगी, उसकी कीमत ज्यादा बढ़ जाएगी।-असलम खान उर्फ पप्पू प्रधान।
राजपुर इंडस्ट्रियल सिटी के लिए लैंड पुलिंग के माध्यम से जमीन ली जा रही है। इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के बाद परियोजना के लिए बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। उनके मुताबिक, यह जिले के लिए महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र साबित हो सकता है।-कुलदीप मीणा, वीसी एडीए।