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राजपुर इंडस्ट्रियल सिटी: अलीगढ़ में बसेगा औद्योगिक शहर, जमीन के हिस्सेदार होंगे किसान, लैंड पुलिंग शुरू

Sat, 17 Oct 2026 06:06 PM IST
Chaman Kumar Sharma आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

राजपुरा इंडस्ट्रियल सिटी की प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, एक एकड़ जमीन देने वाले किसान को स्थान के आधार पर 25 फीसदी तक विकसित जमीन वापस मिल सकती है। पात्रता की पुष्टि परियोजना की आधिकारिक शर्तों से किया जाना जरूरी है।
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राजपुर इंडस्ट्रियल सिटी, किसान के पास पहुंचे एडीए कर्मचारी - फोटो : एआई, संवाद
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विस्तार
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अलीगढ़-पलवल हाईवे के पास प्रस्तावित राजपुर इंडस्ट्रियल सिटी में किसान भी जमीन के हिस्सेदार होंगे। अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के बजाय लैंड पुलिंग के जरिये जमीन जुटा रहा है।

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इसमें किसानों से जमीन लेकर सड़क, बिजली, पानी और सीवर जैसी सुविधाओं के साथ औद्योगिक शहर विकसित किया जाएगा। बदले में किसानों को तय शर्तों के अनुसार विकसित भूखंड दिए जाएंगे। सोफा, राजपुर और नारायणपुर गांवों में जमीन जुटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

परियोजना के लिए कुल 1,358 हेक्टेयर यानी लगभग 3,355 एकड़ जमीन जुटाने की योजना है। एडीए के अनुसार, तीनों गांवों के 3,663 परिवारों से संपर्क किया जा चुका है। अब तक 169 सहमतियां मिली हैं, जिनके आधार पर 264 हेक्टेयर जमीन का करार प्रस्तावित है। जमीन का करार पूरा होने के बाद किसानों को नौ महीने में विकसित भूखंड आवंटित करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, इस समय-सीमा की शुरुआत किस चरण से होगी, यह स्पष्ट होना बाकी है।
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राजपुर इंडस्ट्रियल सिटी को औद्योगिक निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। इसके लिए सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयां विकसित करने की योजना है। दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और पलवल के नजदीक होने से इस क्षेत्र को औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।

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जमीन के बदले मिलेंगे विकसित भूखंड 
राजपुरा इंडस्ट्रियल सिटी की प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, एक एकड़ जमीन देने वाले किसान को स्थान के आधार पर 25 फीसदी तक विकसित जमीन वापस मिल सकती है। पात्रता की पुष्टि परियोजना की आधिकारिक शर्तों से किया जाना जरूरी है।

नौ लोगों की टीम कर रही काम 
जमीन जुटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एडीए की ओर से एक कंसल्टेंसी कंपनी की मदद ली जा रही है। कंपनी के प्रतिनिधि के अनुसार, क्षेत्र में करीब नौ लोगों की टीम काम कर रही है। इसमें दो लेखपाल और सात सहायक कर्मचारी शामिल हैं। टीम किसानों से संपर्क करने, जमीन के दस्तावेजों की जानकारी जुटाने और सहमति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में लगी है। जमीन जुटाने के बाद सड़क, बिजली, पानी और सीवर जैसी सुविधाओं का विकास परियोजना का अगला अहम चरण होगा।

ऐसे पूरी होती है लैंड पुलिंग प्रक्रिया 
लैंड पुलिंग में किसान अपनी जमीन योजना के लिए देते हैं। इसके बाद विकास प्राधिकरण उस जमीन पर सड़क, बिजली, पानी, सीवर और दूसरी बुनियादी सुविधाएं विकसित करता है। योजना की शर्तों के अनुसार, किसान को उसकी दी गई जमीन का एक हिस्सा विकसित भूखंड के रूप में वापस मिलता है। इससे किसान को केवल जमीन देने वाले के बजाय विकसित क्षेत्र में भूखंड का मालिक बनने का अवसर मिलता है।
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पूरे क्षेत्र का होगा विकास
गांव मोहसमपुर निवासी देवेंद्र शर्मा की तीन बीघा जमीन राजपुर के गाटा संख्या 1790 पर है। इसकी पुलिंग करने के लिए एडीए की टीम उनसे संपर्क में है। जल्द ही वह इसका करार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट से पूरे क्षेत्र का तेज विकास होगा, जिसका लाभ उन्हें भी होगा।
मेरे परिवार में पांच भाइयों के पास 120 बीघा जमीन है। सोचा है कि 60 बीघा जमीन पुलिंग के माध्यम से देंगे और शेष 60 बीघा का मुआवजा लेंगे। रुपया आने के बाद खर्च हो जाता है, लेकिन जो जमीन विकसित होकर मिलेगी, उसकी कीमत ज्यादा बढ़ जाएगी।-असलम खान उर्फ पप्पू प्रधान।
राजपुर इंडस्ट्रियल सिटी के लिए लैंड पुलिंग के माध्यम से जमीन ली जा रही है। इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के बाद परियोजना के लिए बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। उनके मुताबिक, यह जिले के लिए महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र साबित हो सकता है।-कुलदीप मीणा, वीसी एडीए।
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