आजादी के अमृत महोत्सव के तहत 11 से 17 अगस्त तक मनाए जा रहे हर-घर तिरंगा अभियान के तहत लखनऊ से भेजे गए 58 हजार झंडे भौतिक सत्यापन के बाद वापस कर दिए गए हैं। डीपीआरओ धनंजय जायसवाल ने बताया कि भेजे गए इन झंडों के कपड़े की गुणवत्ता बेहद खराब थी और कई झंडों में अशोक चक्र गलत स्थान पर बना हुआ था।
उन्होंने बताया कि झंडों की अब दूसरी किस्त में 1.75 लाख झंडे भेजे गए हैं जो सही पाए गए हैं। करीब दो लाख झंडे और आने हैं। उन्होंने बताया कि जिले में कुल साढ़े आठ लाख झंडे फहराने का लक्ष्य तय निर्धारित किया है। इनमें 3.79 लाख झंडों की प्रदेश स्तर से ही आपूर्ति की जा रही है। जबकि करीब पौने पांच लाख झंडे स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से तैयार हो रहे हैं।
प्रदेश स्तर पर सरकार ने झंडे बनाने की जिम्मेदारी एमएसएमई विभाग को दी है। एमएसएमई से झंडों की भेजी गई पहली खेप में करीब 58 हजार झंडे भेजे गए थे। गुणवत्ता सही न मिलने पर इन झंडों को वापस भेज दिया गया है। जिले में झंडों का ग्राम पंचायत स्तर पर वितरण शुरू हो जाएगा। इन झंडों की गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है। समूहों के जरिए भेजे गए झंडों का भी पूरा परीक्षण किया जा रहा है।