कौशल कुमार ओझा, अलीगढ़।
कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। नए साल में कोरोना की तीसरी लहर का खतरा जनपद में मंडरा रहा है। इसके बावजूद प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की तैयारी ड्राइवर के बिना गाड़ी जैसी है। आईसीयू, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और वार्ड सभी तक बेकार हैं, जब तक उसे संचालित करने वाले दक्ष एवं समर्पित डॉक्टर व स्टाफ नहीं होगा।
ओमिक्रॉन के संभावित खतरे से निपटने के लिए उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल एवं प्रबंधन सबसे जरूरी है। तीसरी लहर से पहले डेंगू ने दिखा दिया है कि हमारी स्वास्थ्य सेवाएं पर्याप्त नहीं है। लोग भयभीत एवं असुरक्षित है।
दूसरी लहर को याद कर दहल जाता है कलेजा
कोरोना की दूसरी लहर को याद कर लोगों का कलेजा दहल जाता है। शायद ही कोई व्यक्ति होगा, जिसने किसी अपने को नहीं खोया। दर्दनाक हालात में सभी बेबस नजर आ रहे थे। चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे थे। जिंदगी एवं मौत से संघर्ष कर रहे लोगों को अस्पतालों में बेड तक नहीं मिले थे।
अस्पताल के गेट पर कोरोना संक्रमितों के परिवार वाले दहाड़ मारकर रो रहे थे। भगवान की दुहाई देकर भर्ती करने की विनती करते रहे। ऑक्सीजन के अभाव में लोग तड़प रहे थे। आईसीयू भी भरे पड़े थे। अस्पताल में जो लोग भर्ती थे, उनको ठीक से इलाज नहीं मिल रहा था।
वार्ड के बाहर आरओ प्लांट तो लगे थे लेकिन बेड पर पड़े मरीजों को पानी देने वाला कोई नहीं था। मरीजों को शौच कराने या अन्य सेवा देने के लिए कोई मौजूद नहीं था। डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी भी उस दौरान संक्रमित हुए थे अथवा उनके परिवार वाले चपेट में आए थे।
दूसरी लहर के बाद ऑक्सीजन का पर्याप्त इंतजाम तो कर लिया गया है। आईसीयू व वेंटिलेटर भी हैं। दवाओं की भी दिक्कत नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों खासकर विशेषज्ञ डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की आज भी बड़ी कमी है।
- ऑक्सीजन, एक्सरे एवं सिटी स्कैन की सुविधा सीएचसी एवं पीएचसी के स्तर पर होनी चाहिए। सिटी स्कैन से लंग्स की स्थिति का अंदाजा हो जाता है। गंभीर मरीजों को ही पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय या जेएन मेडिकल कॉलेज (दोनो एल-2 अस्पताल) भेजा जाए। छोटे-छोटे स्वास्थ्य केंद्र सक्रिय होने चाहिए। डॉक्टर एवं पैरा मेडिकल स्टाफ दक्ष होने चाहिए। एल-1, एल-2 एवं एल-3 व्यवस्था सही थी। उस पर ठीक से काम होना चाहिए। - डॉ. असद मेहमूद, सीएमओ, इमरजेंसी एवं ट्रॉमा सेंटर, जेएन मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल।
अमेरिका एवं यूरोप में हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर हमसे बेहतर हैं, फिर भी कोरोना को नहीं संभाल सकें। दरअसल महामारी को ध्यान में रखकर हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं होते। अब तो सभी जगह ऑक्सीजन के प्लांट लग गए। वेंटिलेटर आ गए, लेकिन उसे चलाने के लिए तो डॉक्टर एवं स्टाफ चाहिए। सबसे जरूरी है कि हमारे पास जितने संसाधन है, उसका अधिकतम इस्तेमाल हो। मरीजों की सेवा के लिए स्वास्थ्य कर्मी रखें जाए ताकि भर्ती मरीजों की जरूरतों को पूरा कर सकें। - डॉ. नरेश, सीएमओ इंचार्ज, इमरजेंसी एवं ट्रॉमा सेंटर, जेएन मेडिकल कॉलेज।
- ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए पूरी तैयारी कर ली गई है। जनवरी-फरवरी में तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। जेएन मेडिकल कॉलेज, पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय, अतरौली के 100 बेड अस्पताल के अतिरिक्त खैर, चंडौस, इगलास में कोविड मरीजों के लिए इंतजाम किए गए हैं। डॉक्टर व स्टाफ की ड्यूटी लगा दी गई है और उन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर एवं स्टाफ भी रख लिए जाएंगे। शासन को भी पूरी स्थिति से अवगत करा दिया गया है। - डॉ. आनंद उपाध्याय, सीएमओ
- कोरोना से मुकाबला करने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में 100 बेड तैयार हैं। डॉक्टर एवं स्टाफ की ड्यूटी लगा दी गई है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर सभी 300 बेड पर कोरोना मरीजों को भर्ती किया जाएगा और कोविड समर्पित अस्पताल घोषित कर दिया जाएगा। डॉक्टर एवं पैरा मेडिकल स्टॉफ की कमी होने पर सीएमओ एवं डीएम से मांगेंगे। अस्पताल में ऑक्सीजन का पर्याप्त इंतजाम है। पूरी स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। - डॉ. अनुपम भास्कर, सीएमएस, पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय।
- दूसरी लहर के दौरान आईसीयू में मरीजों की सेवा करते हुए स्वयं संक्रमित हुई थी। सबसे जरूरी है कि अधिक से अधिक कोविड जांच हो ताकि समय से बीमारी का पता चल जाए और उपचार शुरू हो जाए। इससे संक्रमण तेजी से नहीं फैल पाएगा। अभी राजनीतिक रैली, शादी विवाह एवं नुमाइश आदि चल रहे हैं। यह खतरनाक है। लोग मॉस्क एवं दूरी का भी ख्याल नहीं रख रहे हैं। ऐसा रहा तो बीमारी बहुत तेजी से फैलेगी। बाद में दुखद स्थिति से गुजरने से अच्छा है कि अभी से सावधान हो जाए। - आराधना सिंह, नर्सिंग ऑफिसर इंचार्ज, पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय।
- मेरा तो सभी से आग्रह है कि मॉस्क एवं दूरी का ख्याल रखें। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर नहीं जाए और बार-बार हाथ धोते रहे। कोविड का दो लहर तो हम लोग झेल चुके हैं। दूसरी लहर में मैं अपनी मां एवं बहन को खो चुका हूं। दोनों का निधन दीनदयाल अस्पताल में मेरी आंखों के सामने हुआ था। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॅान से घबराएं या डरे नहीं बल्कि सावधान रहें। यह भी दूसरे वैरिएंट की तरह है जो तेजी से फैलता है। सारा खेल शरीर की इम्युनिटी है। - डॉ. अंकुर, पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय, एमओ
शहर के सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन की स्थिति
- जेएन मेडिकल कॉलेज में 874 एलपीएम का प्लांट
- जेएन मेडिकल कॉलेज में 1000 एलपीएम के दो प्लांट
- पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में 570 एलपीएम के दो प्लांट
- पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में 1000 एलपीएम का एक प्लांट
- पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में 250 एलपीएम का एक प्लांट
- मलखान सिंह जिला चिकित्सालय में 1000 एलपीएम का एक प्लांट
- मलखान सिंह जिला चिकित्सालय में 110 एलपीएम का एक प्लांट
25 से 30 प्रतिशत चिकित्सक एवं पैरा मेडिकल स्टाफ से चल रहा काम
स्वास्थ्य विभाग की हालत यह है कि सृजित पद के सापेक्ष 25 से 30 प्रतिशत डॉक्टर एवं स्टाफ से काम चल रहा है। कुछ महीने पहले संविदा पर 26 डॉक्टरों को नियुक्त करने का प्रस्ताव था। चयन भी कर लिया गया। शासन से 22 को स्वीकृत भी कर दिया गया, लेकिन सिर्फ 12 डॉक्टरों ने ज्वाइन किया है।