आरोपी को छोड़ने पर तत्कालीन सत्ताधारी नेताओं की सिफारिश का आरोप उछला था। इसको लेकर विपक्षी दल के नेताओं व सिकंदराराऊ के तत्कालीन निर्दल विधायक अमर सिंह यादव ने थाने में धरना दिया। पुलिस पर सत्ता के पक्ष में लूट को दबाने का आरोप लगा। किसी तरह पुलिस ने पीडि़त पक्ष व विपक्ष को समझाकर शांत किया। दो दिन तक मची हायतौबा के बाद मामला शांत हुआ।
पर दम तोड़ गई बंदूक मिलने की उम्मीद
योगेंद्र बताते हैं कि पुलिस ने एक पखवाड़े तक खूब भागदौड़ की। अलीगढ़ के साथ-साथ हाथरस, कासगंज, एटा तक के बदमाशों के यहां दबिश दी गईं। तत्कालीन थाना प्रभारी ने अकराबाद बॉर्डर के विजयगढ़ क्षेत्र के तीन बदमाशों को जेल भेजे। उन्होंने लूट की बात स्वीकारी, लेकिन पुलिस बंदूक बरामद नहीं कर सकी। कुछ दिन थाने का चक्कर लगाने के बाद उन्होंने बंदूक मिलने की उम्मीद छोड़ दी।