अकराबाद में ईंट-भट्ठे के पास मिली जहरीली शराब पीने से शुक्रवार को एक महिला मजदूर की मौत हो गई, दस गंभीर अवस्था में अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। जहरीली शराब से जिले में अब तक 103 लोगों की मौत हो चुकी है। बीती 28 मई को जहरीली शराब पीने से लगभग 20 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद से आठ दिन गुजर चुके हैं, अभी तक मौतों का सिलसिला जारी है। इस बीच 31 मई के अंक में अमर उजाला ने पेज नंबर दो पर ‘जहरीली शराब कहां है कितनी है पता नहीं, जान बचाना मुश्किल’ शीर्षक के साथ प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी, जिसमें जिला प्रशासन को आगाह किया गया था कि सबसे पहले जहरीली शराब का पता लगाकर उसे नष्ट कराया जाए अन्यथा मौतों को रोक पाना मुश्किल है।
ऐसा नहीं कि इस बीच जिला प्रशासन ने कुछ नहीं किया। जिला प्रशासन ने मुनादी कराई, लोगों को चेतावनी दी। लेकिन उसके बाद भी जहरीली शराब चोरी छिपे मिलती रही। कहीं-कहीं इस जहरीली शराब को नहर आदि के किनारे फेंका गया, जैसा घटनाक्रम जवां में हुआ, जिसमें नहर के पास मिली शराब ने 10 मजदूरों को निगल लिया। अकराबाद में शुक्रवार को हुई मौत भी इसी लापरवाही का नतीजा है।
बहरहाल, जिला प्रशासन के अधिकारियों ने ईंट भट्ठों के मालिकों के साथ शुक्रवार को बैठक कर उनको चेताया कि किसी भी सूरत में मजदूरों को जहरीली शराब पीने से रोकें। मजदूरों को आगाह करें, क्योंकि मजदूर उनकी भाषा बेहतर ढंग से समझते हैं। इसलिए उनको तत्काल रोके। एसडीएम गभाना और एसडीएम खैर ने इलाके के सभी भट्ठा मालिकों के साथ बैठक कर उक्त निर्देश दिए हैं। वहीं, राजस्व टीमों को गांव-गांव तैनात कर लोगों को जहरीली देशी शराब पीने से रोकने की जिम्मेदारी दी गई है, जिसमें लेखपाल, राजस्व कर्मी और अन्य कर्मियों को लगाया गया है। इधर, पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और आबकारी विभाग के अधिकारी भी लगातार जहरीली शराब के अड्डों पर छापे मार रहे हैं, इसके बाद इस शराब का आम लोगों तक पहुंचना जारी है और इस जहर को पीने के बाद लोगों का मरना भी नहीं रुका है।