जहरीली शराब के सेवन से गांव शादीपुर में जान गंवाने वाले सागर पुत्र ओमप्रकाश के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने की खातिर परिवार के पास पैसे नहीं थे। उसकी मां प्रधान व पुलिस वालों के सामने गाड़ी का इंतजाम करने के लिए गिड़गिड़ाती रही। इस दौरान बच्चे व पत्नी शव से लिपटकर विलाप करते रहे, जिसे देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं। करीब चार घंटे बाद निजी वाहन का इंतजाम हुआ तब शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका। इसके बाद एंबुलेंस गांव पहुंची।
मूलरूप से गाजियाबाद के शांतिनगर निवासी सागर पुत्र ओमप्रकाश अपनी ससुराल शादीपुर में रहकर मजदूरी करते थे। उनके दो बेटी रिया (6), सिया (5), दो दुधमुंहे बेटे अभिराज डेढ़ साल और तनिष्क एक माह अपनी बिलख रही मां की नम आंखों की ओर देखते और फिर पिता के शव से लिपट जाते।
लोगों का कहना था कि कुछ दिन पहले सागर की ससुराल में आग लग गई थी। परिवार को सरकारी राशन का भी लाभ नहीं मिल रहा। मजदूरी कर किसी तरह वह परिवार का पेट पाल रहा था। लोगों ने विधायक से भी बात की, जिसके बाद गाड़ी का इंतजाम हुआ।
बेटे के शव के लिए गाड़ी नहीं कर सकती पुलिस
गरीब सागर की मां का रोकर बुरा हाल था। रोते हुए वह लोगों से कह रही थीं कि पोस्टमार्टम हाउस में शव भेजने के लिए गाड़ी का किराया भाड़ा नहीं है। पुलिस शराब बिकवाकर जेबें भर सकती है तो मेरे बेटे के शव के लिए गाड़ी की व्यवस्था नहीं कर सकती।