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अलीगढ़ः जहरीली शराब कांड में गवाहों को दी गईं धमकी

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शराब माफिया ऋषि शर्मा के परिजनों को उठाने लिए के गाड़ी में बैठे रहे पुलिसकर्मी। - फोटो : CITY OFFICE
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अभिषेक शर्मा
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जहरीली शराब कांड में आरोपी शराब माफिया बेशक खुद को निर्दोष बता रहे हैं, मगर यह प्रकरण नित-नए घटनाक्रमों के चलते लगातार नया मोड़ ले रहा है। उजागर हुआ है कि इस कांड के दौरान जहरीली शराब पीने से मृत गभाना सांगौर के राजकुमार के छोटे भाई भूपेंद्र को धमकियां मिली हैं। इशारों-इशारों में कहा गया कि गवाही से मुकर जाओ तो अच्छा होगा और रुपये भी मिलेंगे। वरना परिणाम अच्छे नहीं होंगे। इससे एकबारगी भूपेंद्र डर गया। मगर गवाही से पीछे नहीं हटा। उसने यह बात न्यायालय में बताई और फिर एसएसपी को लिखित शिकायत दी। इसके बाद भूपेंद्र को सुरक्षा मुहैया कराई गई। तब जाकर इस मौत से जुड़े मुकदमे के 9 आरोपियों में से 8 के अधिवक्ता गवाह से जिरह पूरी कर पाए हैं। अभी एक अनिल चौधरी की जिरह शेष रह गई है, जिसमें 14 दिसंबर तारीख नियत है।
यह है पूरा वाकया
सांगौर के फैक्टरी श्रमिक राजकुमार की मौत का मुकदमा उसके छोटे भाई भूपेंद्र ने गभाना में दर्ज कराया था। जिसमें ऋषि शर्मा, मुनीष शर्मा, अनिल चौधरी, विपिन यादव, शिवकुमार आदि सहित कुल 9 आरोपी हैं। इस मुकदमे का ट्रायल एडीजे-9 की अदालत में चल रहा है। अक्तूबर माह से इसमें प्रथम गवाह वादी भूपेंद्र की गवाही शुरू हो गई है। जिसमें बचाव यानी आरोपी पक्ष के अधिवक्ता गवाह से जिरह भी करते हैं। शुरुआत में लगा कि गवाह टूट नहीं रहा तो उसके पास कुछ पैरोकार पहुंचने लगे। लालच दिया, समझाया और डराया-धमकाया भी। इसके चलते कुछ भूपेंद्र डरा भी। मगर उसने मामले में अपने व अभियोजन अधिवक्ता के जरिये पूरी बात अदालत के समक्ष रखी। इस पर नवंबर माह में उसकी लिखित शिकायत एसएसपी के समक्ष भेजी गई। खुद वह पेश हुआ और पूरी बात बताई। उसके बाद से उसके घर नियमित पुलिस निगरानी में पहुंचती है। उस पर वैसे भी निगरानी रखी जाती है। गवाही के दिन उसे सुरक्षा में न्यायालय लाया जाता है।
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इसी गवाही के दिन चिल्लाए थे ऋषि-अनिल
इस मामले में 7 दिसंबर को गवाह से जिरह के लिए सभी आरोपी न्यायालय से तलब थे। इसी दिन ऋषि व अनिल ने हवालात से न्यायालय से जाते समय चिल्ला-चिल्ला कर खुद को निर्दोष करार दिया था। एडीजीसी जेपी राजपूत बताते हैं कि मामले में अनिल चौधरी को छोड़कर बाकी सभी आरोपियों के अधिवक्ताओं ने गवाह से जिरह कर ली है। उस दिन अनिल के अधिवक्ता नहीं आ पाए। इसलिए 14 दिसंबर तारीख नियत की गई है। उन्होंने बताया कि भूपेंद्र के मामले में न्यायालय ने भी संज्ञान लेकर गवाहों की सुरक्षा के निर्देश दिए। खुद उन्होंने भी पुलिस को सुरक्षा के लिए कहा था। साथ में गवाही के समय गवाहों को सुरक्षा में लाने की बात तय हो गई है।
मैं डरा जरूर था, पर झुकूंगा नहीं
‘अमर उजाला’ से बातचीत में भूपेंद्र ने बताया कि भाई की तरह खुद मजदूरी करता है। अपना व भाई के परिवार का जिम्मा उसके ऊपर आ गया है। वह भाई की मौत के आरोपियों को सजा दिलाना चाहता है। इसलिए अपनी गवाही व पैरोकारी पर अडिग है। यह बात सही है कि इस मामले में कुछ लोग कई बार उसके पास अक्तूबर माह में आए। उसे लालच दिया और डराया धमकाया। मगर उसने झुकना मंजूर नहीं किया। हां, उसे डर जरूर लगा। उसने यह भी पाया कि न्यायालय में गवाही पर जाते समय कुछ लोग दीवानी में उसे घेरने, घूरने और आंखों-आंखों में डराने का प्रयास करते हैं। मगर उसने न्यायालय व एसएसपी के समक्ष जब बात बताई तो उसे सुरक्षा मिली हुई है। अब कोई डर नहीं है।
फिर तो और गवाहों पर भी पहुंच रहे होंगे पैरोकार
इस एक प्रकरण के उजागर होने के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। वह यह कि इस घटना में जहरीली शराब पीकर मरने वाले ज्यादातर लोग गरीब, मजदूर या कमजोर परिवार से थे। अब उनके पैरोकारों की हालत भी कुछ ऐसी है। ऐसे में भूपेंद्र की तरह उनके पास भी आरोपियों के पैरोकार लालच देने व डराने धमकाने पहुंच रहे होंगे। ऐसे में यह कैसे संभव है कि सभी गवाह भूपेंद्र की तरह अडिग रहें। साथ में एक सवाल यह भी है कि पब्लिक के गवाहों को लालच देने व डराने कौर किसके इशारे पर पहुंच रहा है।
दीवानी में सक्रिय किया गया खुफिया तंत्र
भूपेंद्र को दीवानी में घेरने और ऋषि व अनिल द्वारा चिल्ला-चिल्लाकर हरकत किए जाने के बाद दीवानी में खुफिया तंत्र सक्रिय हो गया है। यह नजर रखने का प्रयास किया जा रहा है कि अधिवक्ताओं छोड़कर ऐसे कौन लोग हैं जो घोषित माफिया आरोपियों से मिलते हैं। गवाहों को रोककर बात करते हैं। ऐसे लोगों की निगरानी शुरू हो गई है।
- शराब कांड में पब्लिक के गवाहों की सुरक्षा पुलिस के लिए महत्वपूर्ण विषय है। इस बात का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। अगर कोई गवाह इस तरह की शिकायत करता है तो उसे सुरक्षा दिलाई जाती है। हर स्तर पर पैनी नजर रखी जा रही है।
- कुलदीप सिंह गुणावत, एसपी सिटी
ऋषि के माता-पिता का धरना जारी
अलीगढ़। जवां की पूर्व ब्लॉक प्रमुख रेनू शर्मा की मौत के बाद उत्तेजित हुए शराब माफिया ऋषि शर्मा के माता-पिता बृहस्पतिवार को भी घंटाघर आंबेडकर पार्क के बाहर धरने पर बैठे रहे। उन्होंने ऋषि शर्मा की पत्नी रेनू शर्मा की मौत के मामले में सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई है। पुलिस दोनों को रात भर समझाती रही, लेकिन वह नहीं माने और धरना जारी रखा। बता दें कि ऋषि शर्मा व अनिल शर्मा के माता-पिता बुधवार रात से धरने पर बैठे थे। पुलिस अधिकारियों के समझाने पर अनिल के माता-पिता तो उठकर चले गए। मगर ऋषि के माता पिता बुधवार देर रात तक बैठे रहे। इसके बाद बृहस्पतिवार सुबह से फिर बैठे हैं। इस दौरान पुलिस निगरानी लगाए हुए है। वहीं सीओ सहित कई अधिकारी बीच बीच में समझाने पहुंचते हैं। मगर वे बात मानने को तैयार नहीं हैं।
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दो और आरोपियों की जमानत खारिज
अलीगढ़। जहरीली शराब कांड में दो और आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज की गई हैं। एडीजे-17 मनोज कुमार सिद्धू के न्यायालय से क्वार्सी के मुकदमे में शरद प्रताप व नीटू उर्फ उमेश की जमानत खारिज की गई है। यह जानकारी एडीजीसी सुधांशु अग्रवाल ने दी। वहीं एडीजे-9 की अदालत में मुनीष की पत्नी ममता, दिगपाल व नागेंद्र की जमानत अर्जियों पर सुनवाई की तारीख नियत थी। मगर सुनवाई नहीं हो सकी।

धरना पर बैठे शराब माफिया ऋषि शर्मा के परिजन।- फोटो : CITY OFFICE

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