जिले में जहरीली शराब से मौतों का तांडव मचा हुआ है। रविवार को भी टप्पल के जट्टारी, उसरह और पिसावा के शादीपुर कारह कादिलपुर में मौतें हुई हैं। वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बाद सर्वाधिक प्रभावित गांव करसुआ, शादीपुर, राइट आदि में तीसरे दिन भी चूल्हे नहीं जले। बस चीख पुकार का माहौल बना रहा। आलम यह है कि पड़ोसी गांवों के परिचित लोग मृतक परिवारों के यहां खाने का इंतजाम कर रहे हैं और पशुओं तक की देखभाल पड़ोसी ही कर रहे हैं।
ये है पिसावा का हाल
गांव शादीपुर से सटे कारह कादिलपुर में शराब पीने से दो लोगों की मौत हुई है, जिनमें से राधेश्याम पुत्र जुगेंद्र सिंह के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। वहीं अजीत फौजी पुत्र बलवीर के शव का बिना पोस्टमार्टम के अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं रामचंद्र पुत्र लालाराम की मौत पर भी शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस तरह इस गांव में अब तक 4 मौत हो चुकी हैं, जबकि पांच का मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। इसी तरह गांव भदियार में हरिराज सिंह सूर्यवंशी पुत्र परमाल सिंह की शराब पीने से मौत हो गई। हरिराज ने हाल ही में प्रधानी का चुनाव लड़ा था। मगर हार गया। शुक्रवार को शराब पीने से उसकी शनिवार को तबियत बिगड़ी और निजी डॉक्टर के यहां मौत हो गई। उसके शव का भी अंतिम संस्कार कर दिया गया। उसके परिवार का हाल बेहाल है।
जट्टारी में भी मौतों का क्रम जारी
टप्पल के कस्बा जट्टारी में जहरीली शराब पीने से मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। यहां उपचार के दौरान यासीन खान पुत्र इमामी खान, मुनेश पुत्र चंद्रभान सिंह, सोनू पुत्र हरी सिंह, किशन पुत्र रामचंद्र, प्रदीप अग्रवाल पुत्र जमुना प्रसाद अग्रवाल निवासीगण कस्बा व विनोद पुत्र वेदप्रकाश निवासी उसरह, मुकेश पुत्र साहब निवासी फाजिलपुर की मौत हुई है, जबकि अखिलेश व सुमित पुत्र तुलाराम निवासी मादक का निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
गभाना में भी तीन मौत
गभाना क्षेत्र के गांव पैराई में दिनेश पुत्र सुखराम ने 27 की शाम शराब पी थी, उसकी भी मौत हो गई। कोरह रुस्तम पुर के देवेंद्र पुत्र कल्याण की शनिवार को तबियत बिगड़ी उसकी भी मौत हो गई। इसी गांव के संजय पुत्र चंद्रपाल ने भी दम तोड़ दिया है।
10वें शव के अंतिम संस्कार में उमड़ा पूरा गांव
लोधा के गांव करसुआ में रविवार दोपहर दसवें शव का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान कई सैकड़ा लोग शमशान स्थल पर मौजूद रहे। गांव में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ था। बस महिलाओं की करुण पुकार की आवाजें आ रही थीं। बता दें कि इस गांव में शनिवार तक 9 शवों के अंतिम संस्कार हुए थे। वहीं इस गांव में सर्वाधिक मौत होने के कारण यहां का माहौल बेहद गमगीन है। महिलाओं को लोग संभाले नहीं संभाल पा रहे हैं।