कहते हैं जीवन में कुछ दंश ऐसे होते हैं, जो न तो कभी भुलाए जा सकते और न उनकी वजह से आने वाली दुश्वारियों को दूर किया जा सकता। कुछ ऐसा ही हाल अलीगढ़ के उन 126 परिवारों का है, जो जहरीली शराब का दंश झेल रहे हैं। आज से ठीक एक बरस पहले यानी 27 मई 2021 की देर शाम से जहरीली शराब ने जिले में मौत का तांडव मचाया था।
रिकार्ड में मौतों की संख्या जरूर 106 दर्ज है, मगर जहरीली शराब ने 126 परिवारों के जीवन की खुशियां छीन लीं। कई परिवार ऐसे हैं, जिनके मुखिया आंखों की रोशनी जाने के कारण घर पर बैठने को मजबूर हैं। उनके जीवन में छाया अंधेरा अब शायद ही कभी छटे। जहरीली शराब का जिक्र छिड़ते ही ये परिवार और आंखों की रोशनी खोने वाले लोग सिहर उठते हैं। वे स्वीकारते हैं कि बेशक उनके अपनों की या उनकी खुद की गलती से जीवन भर का दंश मिला है, बस इंतजार इस बात का है कि मौत का सामान बेचने वालों को सजा मिले तो न्याय के साथ दिल को कुछ सुकून भी मिले।
करसुआ के लोगों ने कर रखी है शराब से तौबा
दस दिन तक जिले में मौत का तांडव मचाने वाली इस घटना की शुरुआत 27 मई की शाम लोधा के करसुआ स्थित गैस बाटलिंग प्लांट के सामने के ढाबों से हुई, जहां ठेके से शराब खरीदकर पीने से गैर प्रांत के दो ड्राइवरों व एक ढाबा संचालक की मौत हुई। सुबह गांव करसुआ में ओमप्रकाश की मौत का शोर मचा और एक-एक कर दस लोगों की मौत हुई। इसके बाद गांव रायट, अंडला आदि में मौत का शोर मचता चला गया। इसी बीच जवां के छेरत गांव से छह मौत की खबर आई।
बृहस्पतिवार को जब गांव करसुआ पहुंचकर पीड़ित परिवारों और ग्रामीणों से इस घटना का जिक्र किया गया तो एक अच्छी खबर यह जरूर सामने आई कि जहरीली शराब कांड के बाद ग्रामीणों के स्तर से लिए गए सामूहिक फैसले के चलते गांव में कोई शराब नहीं पीता है। दबी जुबां से यह जरूर कहा गया है कि कोई गांव से बाहर जाकर पीता हो तो कहा नहीं जा सकता। कोई पीकर गांव में भी नहीं आता है। इसके विपरीत, जवां के गांव छेरत में शराब से सामाजिक दूरी जैसा कोई कदम नहीं उठाया गया है।
अपने - अपने दुख और अपने - अपने दर्द
- गांव करसुआ के महेश की जहरीली शराब पीने से मौत हुई थी। परिवार चलाने का जिम्मा किशोर उम्र बेटे आदित्य के कंधों पर है। वह मजदूरी कर जीवन यापन चल रहा है। आर्थिक स्थिति इतनी खराब हैं कि इन दिनों आदित्य बीमार है, तंगहाली के चलते घर में गांव के ही डॉक्टर से इलाज कराने के लिए मजबूर है। आदित्य और उसकी मां बस इतना कहते हैं कि जीवन में ऐसा पहाड़ किसी पर न टूटे। अब बच्चे पढ़ने तक नहीं जा पा रहे हैं।
- गांव करसुआ के पप्पू की आंखों की रोशनी चली जाने के कारण परिवार की खुशियों में अंधेरा ला दिया है। पत्नी व दो छोटे बच्चों की मदद से बाटलिंग प्लांट के सामने खोखे में चाय, बीड़ी गुटखा की दुकान खोल ली है। कभी पत्नी तो कभी बच्चों के सहयोग से दुकान चलाकर परिवार को पालने पर मजबूर है। मदद के सवाल पर बताते हैं कि ढाई लाख रुपये की मदद का भरोसा मिला था, जो आज तक नहीं मिली।
- गांव करसुआ के ही सुनील की मौत के बाद घर में अकेली बुजुर्ग मां सीमा देवी को किसान सम्मान निधि से पांच लाख रुपये की मदद मिली। घटना के दो माह बाद बारिश में मकान ढह गया। तब से सीमा देवी रिश्तेदारियों में रहने को मजबूर हैं। बृहस्पतिवार को महिला गांव में नहीं मिलीं।
- छेरत में शराब पीने से मृत जितेंद्र की पत्नी सोनी अपने दो बच्चों को मजदूरी कर पाल रही हैं। उन्हें आज तक किसी तरह की आर्थिक मदद नहीं मिली है। वह कहती हैं कि इससे बुरा जीवन में और क्या होगा। हमारे पास न जमीन का टुकड़ा है और न धंधा। पति के सहारे परिवार पलता था। अब तो जीवन अंधकारमय है। कब और कैसे नैया पार लगेगी, कुछ कहा नहीं जा सकता है।
- छेरत के कैलाश की आंखों की रोशनी जाने के बाद से उनके जीवन में अंधेरा है और काम धंधा भी छूट गया है। पत्नी अपने बेटे के पास रहने चली गई है। गांव में कुछ लोगों के सहयोग से अपना जीवन यापन कर रहे हैं। किसी तरह की मदद नहीं मिली है। वे शराब से खुद तो दूरी बना चुके हैं और लोगों को सलाह देते रहते हैं कि इसे पीकर अपना जीवन अंधकार में न डालें।
- छेरत के ही मनोज की मौत के बाद उनके बेटे अनुराग पर परिवार का बोझ आ गया है। सरकार से मदद मिली थी, मगर वह कुछ कर्ज और कुछ अन्य जरूरतों में खप गई। वह मजदूरी और कुछ जमीन के सहारे परिवार पाल रहे हैं। पिता के बाद एक बहन की शादी भी की है।
- गभाना सांगौर के मजदूर राजकुमार सिंह की मौत के बाद पत्नी नीतू बेटे व बेटी का खेतीे करके पालन-पोषण कर रही हैं। सरकार से मदद मिली थी। उससे बच्चों की पढ़ाई का ध्यान रखा गया। बेटा बीएससी व बेटी दसवीं की पढ़ाई कर रही है। पिता की कमी तो पूरी नहीं की जा सकती। मगर प्रयास है कि बच्चे पढ़ लिखकर कुछ बन जाएं तो जीवन में खुशियां लौटें।
- धर्मपाल सिंह की मौत के बाद पत्नी मुन्नी देवी मजदूरी व खेती से बच्चों को पाल रही हैं, जबकि इसी गांव के सतीश की मौत के बाद उनका इकलौता बेटा मोहन अपने ताऊ के सहारे है। बाकी परिवार कैसे चलेगा, मेहनत करके घर के काम चल रहे हैं।
- जट्टारी में शराब पीने से मृत प्रदीप की पत्नी पूनम बताती हैं कि पति की मृत्यु के बाद निजी स्कूल में 18 सौ रुपये के मानदेय पर मजदूरी करके जीवन यापन चल रहा है। पुत्र रजत मजदूर्री कर रहा है। सरकार द्वारा मिली आर्थिक मदद से कुछ रुपये बीमारी में खर्च हो गए और कर्ज चुकाया। इसी तरह मुकेश की पत्नी रिंपी चार बच्चों को मजदूरी कर पाल रही है। एक वर्ष पहले मिला गम अभी दूर नहीं हो पाया है।
जट्टारी के ही आंखों की रोशनी गंवाने वाले जयप्रकाश उर्फ बब्बू ने बताया कि पहले मजदूरी पर कार्य मिल जाता था, लेकिन आंखों की रोशनी चली जाने के बाद उससे भी हाथ धो बैठा हूं। सरकार द्वारा भी कोई सहायता प्राप्त नहीं हुई। बच्चे मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं।
कब क्या हुआ..
- 27/28 मई को 25 मौत।
- 29 मई तक 56 मौत।
- 30 मई को 71 लोगों की मौत ।
- 31 मई को 85 लोगों की मौत
- 01 जून को यह आंकड़ा 87 हुआ।
- 02 जून को यह संख्या 89 हुई ।
- 03 जून को मृतक संख्या 95 हुई।
- 04 जून को मृतक संख्या 103 हुई।
- 05 जून को यह आंकड़ा 108 हुआ।
- जिले में कुल 126 मौतों पर रुका क्रम।
- जिले में कुल 106 पोस्टमार्टम कराए थे।
ये हुई कार्रवाई --
- 33 मुकदमे इस कांड में दर्ज किए गए
- 88 आरोपी इस कांड में जेल भेजे गए
- 12 लोगों को माफिया में किया है दर्ज
- 80 लोगों की हिस्ट्रीशीट खोली गई
- 74 लोगों पर गैंगेस्टर में कार्रवाई
- 75 करोड़ की संपत्ति गैंगेस्टर में जब्त
- 82 दुकानों के लाइसेंस निलंबित किए
- 03 बड़ी व कई छोटी शराब फैक्टरी जब्त
इन गांवों के लोगों की हुई मौत
करसुआ, रायट, अंडला, जवां, हैबतपुर, फतेह नगरिया, नंदपुर पला, पचपेड़ा, सांगोर, कोरह रुस्तमपुर, छेरत, शादीपुर, जट्टारी, रोहेरा भट्ठा, दरकन नगरिया, क्वार्सी के चंदनिया, धनीपुर, शीशियापाड़ा, महुआ खेड़ा आदि।
इन पर हुई अलग-अलग कार्रवाई
तत्कालीन आबकारी आयुक्त पी गुरुप्रसाद, आगरा जोन के संयुक्त आयुक्त रविशंकर पाठक, अलीगढ़ उपायुक्त ओपी सिंह, सीओ गभाना कर्मवीर सिंह, जिला आबकारी अधिकारी धीरज शर्मा, आबकारी निरीक्षक क्षेत्र अतरौली अवनीश कुमार पांडेय, आबकारी निरीक्षक गभाना चंद्र प्रकाश यादव, आबकारी निरीक्षक लोधा, खैर व टप्पल राजेश कुमार यादव, पांच आबकारी सिपाही, तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक अकराबाद रजत कुमार शर्मा, प्रभारी निरीक्षक खैर प्रवेश कुमार, प्रभारी निरीक्षक गभाना सुबोध कुमार, प्रभारी निरीक्षक टप्पल प्रवीन कुमार मान, थानाध्यक्ष जवां चंचल सिरोही, थानाध्यक्ष लोधा अभय कुमार शर्मा, चौकी प्रभारी जट्टारी शक्ति राठी, चौकी प्रभारी जवां अरविंद कुमार, चौकी प्रभारी पनैठी सिद्धार्थ कुमार, आठ सिपाही शामिल हैं। इनमें से अधिकांश निलंबित हुए, कुछ को पद से हटाया गया।
10 माह बाद पूरी हुई मजिस्ट्रेटी जांच : डीएम के निर्देश पर एडीएम प्रशासन द्वारा की गई मजिस्ट्रेटी जांच में जिले में तैनात रहे 26 आबकारी व पुलिस विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों को दोषी पाया गया। दस माह बाद जांच पूरी कर यह रिपोर्ट शासन को भेजी गई।