शासन का प्रयास है कि ग्रामीणों से जुड़ी हरेक समस्या का स्थानीय स्तर पर ही समाधान हो। इसको लेकर गांवों में पंचायत भवन (मिनी सचिवालय) का निर्माण कराया जा रहा है। जिले की 175 ग्राम पंचायतों में अभी तक भवनों का निर्माण नहीं हो सका है। अब शासन के निर्देश पर बिना पंचायत भवन वाले गांवों में पंचायत सहायकों को सरकारी स्कूलों के भवन में बैठकर जनता से जुड़े कार्यों को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने ग्राम पंचायत सचिवों व पंचायत सहायकों को ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करने व योजनाओं का लाभ दिलाने का जिम्मा सौंपा है। साथ ही उन्हें ग्रामीणों से जुड़ी समस्याओं का प्रभावी निस्तारण कराने के लिए कहा गया है।
इसके लिए ग्राम पंचायतों में मिनी सचिवालय की स्थापना की जा रही है। यहां पंचायत सहायकों को बैठने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में कुल 867 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें से 692 गांवों में पंचायत भवन बन चुके हैं, जबकि 175 गांव ऐसे हैं, जहां अभी तक पंचायत भवनों का निर्माण नहीं हो सका है।
शासन ने निर्देश दिया है कि जिन गांवों में पंचायत भवन नहीं बने हैं, वहां के सरकारी स्कूलों व पंचायत सेवा केंद्रों पर पंचायत सहायकों को बैठाया जाएगा। पंचायत राज विभाग इसके लिए फर्नीचर आदि की व्यवस्था कराएगा। डीपीआरओ धनंजय जायसवाल ने बताया कि पंचायत सहायकों की नियुक्ति के बाद गांवों में मिनी सचिवालय का संचालन किया जाएगा।