अलीगढ़। सपा एक फैसले से अलीगढ़ सहित वेस्टर्न यूपी में तीन लक्ष्यों पर निशाना साध सकती है। पहला अगर अलीगढ़ से सपा के चार विधायकों में से किसी को मंत्री पद मिला तो अखिलेश यादव सरकार अपने आखिरी सवा साल में पश्चिमी यूपी से अपना प्रेम साबित कर सकेगी।
दूसरा मंत्री पद देने के बाद सपा के समर्थित सभी जिला पंचायत सदस्यों को एक राय कर जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर भी निशाना साधा जा सकेगा। लखनऊ के गलियारों में अलीगढ़ से मंत्री पद को लेकर नगर विधायक जफर आलम और छर्रा विधायक ठा. राकेश सिंह का नाम सुर्खियों में है। फैसला 31 अक्तूबर को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को करना है। लेकिन इस बदले घटनाक्रम में अलीगढ़ से जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दावेदारी का समीकरण थोड़ा सुलझता नजर आ रहा है।
राजनीतिक सूत्रों की मानें तो अगर छर्रा विधायक को मंत्री बनाया गया तो जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दौड़ में तेजवीर सिंह का खेमा आगे बढ़ जाएगा। सपा समर्थित विजयी उम्मीदवार इसी खेमे में आ जाएंगे। ऐसे में ठा. जयवीर सिंह और तेजवीर सिंह के खेमे से सीधे टक्कर होगी। क्योंकि वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष चौ. सुधीर सिंह के जेल जाने के बाद बसपा के खेमे में नए चेहरे के रूप में कबीना मंत्री ठा. जयवीर सिंह के भतीजे उपेंद्र सिंह नीटू अध्यक्ष पद के लिए प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।
नीटू वर्तमान में जवां के ब्लाक प्रमुख भी हैं। इसलिए वह पंचायत भवन के करीबी भी हैं। यही नहीं अप्रत्यक्ष रूप से ठा. जयवीर सिंह ने ही चौ. सुधीर सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया था। इसलिए जिला पंचायत की राजनीति में उनका खासा दखल भी है। ये भी तय है कि भाजपा, रालोद और कांग्रेस समर्थित विजयी पंचायत सदस्य निर्णायक की अहम भूमिका में होंगे।
ये तीनों गुट जिस तरफ करवट लेंगे उसका जीतना आसान हो जाएगा। सब कुछ 31 अक्तूबर को तय हो जाएगा। 31 अक्तूबर के बाद 2 नवंबर को जिलाध्यक्ष को जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर होने वाले फैसले के लिए बुलाया गया है। इसलिए आने वाले तीन दिनों में मंत्री पद के साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर भी उलझा हुआ सवाल सुलझ जाएगा।