अलीगढ़। सरकारी तंत्र शायद पुलिस वालों को सुपरमैन समझता है। तभी तो एक अकेले बीट सिपाही पर ऐसी भारी-भरकम जिम्मेदारियों का बोझ डाले हुए है। चाहे इमरजेंसी ड्यूटी हो, अदालतों के नोटिस तामील का काम हो, अपराधियों का सत्यापन के साथ गश्त। सबकुछ उसी के जिम्मे है। वह भी बिना छुट्टी के। 24-24 घंटे ड्यूटी से सिपाही तनाव व अनिद्रा के शिकार हो रहे हैं। इस तरह की ड्यूटी उन्हें चिड़चिड़ा और उग्र बना रही है।
कहने के लिए साल 2017 में साप्ताहिक अवकाश की व्यवस्था की गई, मगर कम पुलिस बल होने की वजह से यह व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। आलम यह कि अफसरों को भी साप्ताहिक अवकाश के लाले हैं। पुलिस अस्पताल के रिकार्ड पर गौर करें तो दैनिक ओपीडी में बुखार, खांसी, डायरिया, कमर दर्द व अस्थमा के करीब 55 मरीज हर दिन पहुंचते हैं। इसके अलावा, प्रत्येक शनिवार को मनोवैज्ञानिक काउंसिलिंग शिविर लगता है। उसमें भी करीब 10 मरीज ऐसे आते हैं, जो अनिद्रा व तनाव के शिकार होते हैं। मई में सर्वाधिक मरीज लंबी ड्यूटी के कारण अनिद्रा, तनाव, बीपी व शुगर की बीमारी से ग्रसित पाए गए थे। इनमें से 50 वर्ष आयु वर्ग के कर्मचारियों में शुगर व बीपी की बीमारी अधिक है।
कमर दर्द और अस्थमा से पीड़ित हैं यातायात पुलिस कर्मी
पुलिस अस्पताल के रिकार्ड के अनुसार, यातायात पुलिस कर्मी सर्वाधिक कमर दर्द व अस्थमा से पीड़ित हो रहे हैं। दस-दस घंटे की ड्यूटी में चौराहे पर खड़े रहने और प्रदूषण झेलने के कारण ये बीमारी उन्हें घेर रही हैं।
600 सिपाही कम, अवकाश की व्यवस्था पर लगा ब्रेक
वर्ष 2017 में हर 10 दिन पर पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश व्यवस्था लागू हुई। रोस्टर बनाया गया, जिसमें पुलिसकर्मी/अधिकारी को काम से विरक्त रहना था, मगर मुख्यालय नहीं छोड़ना था। उसी बीच बोर्ड परीक्षा के चलते यह व्यवस्था रोक दी गई। वर्तमान में भी 2020 के निर्धारित नियतन से करीब 600 सिपाही जिले में कम हैं।
ये है सिपाहियों की प्रमुख समस्या
- निर्धारित क्षमता से अधिक ड्यूटी का बोझ
- समय और जरूरत पर अवकाश न मिलना
- बाइक भत्ता मात्र 250 रुपये प्रतिमाह है
जब एक अफसर की पिता से हुई नाराजगी
नाम न छापने की शर्त पर एक राजपत्रित अधिकारी ने बताया कि पिता का पिछले दिनों सुबह फोन आया। वे उन पर तुरंत किसी पारिवारिक काम से नोएडा जाने का दबाव डाल रहे थे। उन दिनों अग्निवीर योजन के विरोध में आंदोलन चल रहा था। ऐसे में नोएडा जा पाना मुश्किल था। पिता को समझाने का प्रयास किया तो वह नाराज हो गए, तब वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष विषय रखा और चंद घंटों के लिए नोएडा जाकर पिता का आदेश पूरा किया जा सका।
24-24 घंटे ड्यूटी । समय से अवकाश न मिलना और परिवार को समय न दे पाना। पुलिसकर्मियों की परेशानी के कारण हैं। इन्हीं वजहों से तनाव व अनिद्रा के साथ-साथ अन्य तरह की बीमारियां बढ़ रही हैं। रहन-सहन व्यवस्था भी दिक्कत देय है।
- कप्तान सिंह चौहान, सेवानिवृत्त निरीक्षक/महासचिव पुलिस पेंशनर्स एसोसिएशन
- किसी भी स्तर पर छुट्टी की समस्या नहीं होने दी जाती है। पुलिस लाइन में पुलिस अस्पताल बेहतर सुविधाओं से सुसज्जित है। इसे उच्चीकृत किया गया। यहां सभी प्रकार के उपचार व चिकित्सा सुविधाएं मुफ्त दी जाती हैं। निजी समस्याओं, पुलिस आवास, यातायात पुलिस संसाधनों पर भी काम होता है।
- कलानिधि नैथानी, एसएसपी
जनपद में पुलिस बल की स्थिति
- 59 पुरुष इंस्पेक्टर
- 05 महिला इंस्पेक्टर
- 431 पुरुष दरोगा
- 26 महिला दरोगा
- 10 महिला हेड कांस्टेबल
- 879 पुरुष हेड कांस्टेबल
- 2127 पुरुष सिपाही
- 396 महिला सिपाही
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- जिले में 4 एएसपी, 10 डिप्टी एसपी, 02 प्रशिक्षु एएसपी, आर्म्स पुलिस में आरआई व 15 एसआई सहित 200 कर्मी हैं।
अवकाश व्यवस्था गैर राजपत्रित
- 30 आकस्मिक अवकाश एक वर्ष में
- 30 अर्जित अवकाश एक वर्ष में
- 6 माह का मेडिकल अवकाश एक वर्ष में
- 6 माह तक गर्भवती अवकाश महिला पुलिसकर्मियों को
अवकाश व्यवस्था राजपत्रित
- 14 आकस्मिक अवकाश एक वर्ष में
- 30 अर्जित अवकाश एक वर्ष में
- 6 माह मेडिकल अवकाश एक वर्ष में