महानगर के लोगों के लिए बुरी खबर है। अत्यधिक भूगर्भ जल के दोहन के चलते नगर निगम क्षेत्र डार्क जोन में आ गया है। यहां का जलस्तर 80 फुट से नीचे चला गया है। वर्ष 2017 से वर्ष 2020 तक बारिश से पहले और बारिश के बाद के आंकड़ों में जलस्तर लगातार गिरने की बात सामने आई है। लघु सिंचाई विभाग द्वारा महानगर के नौ मुख्य प्वाइंटों पर जांच कराई
गई थी।
अलीगढ़ में पेयजल की समस्या वर्षों पुरानी है। कटोरी की शेप में बसे कई इलाकों में नगर निगम की सप्लाई नहीं पहुंचती। मजबूरन लोगों ने अपने घरों में सबमर्सिबल पंप लगवा रखे हैं। इनकी तादाद लाखों में है। इनसे प्रतिदिन लाखों लीटर भूगर्भ जल का दोहन होता है, वह भी मुफ्त में। इसके अलावा, आओ प्लांट, कार वाशिंग सेंटर, बर्फखाना, पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के साथ साथ नगर निगम के ट्यूबेवल भारी मात्रा में जल का दोहन करते हैं। भूगर्भ जल विशेषज्ञों की माने तो यदि अति दोहन की स्थिति नहीं सुधरी तो अगले कुछ वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है और महानगर वासी बूंद-बूंद पानी को तरस सकते हैं। भूगर्भ जल मामलों के नोडल अफसर व लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता विजेंद्र सिंह सुमन ने बताया कि नगर निगम डार्क जोन में आ गया है। इससे निपटने के लिए कामर्शियल, इंडस्ट्रियल व बल्क यूजर्स का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगवाए जा रहे हैं। सभी सरकारी, अर्ध सरकारी व निजी इकाइयों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
महानगर के प्रमुख इलाकों का औसत जलस्तर (वर्ष 2017 से 2020 तक)
1. जवाहर पार्क-27.48 मीटर
2. वेयर हाउस सारसौल-25.26 मीटर
3. एएमयू क्षेत्र-24.93 मीटर
4. प्राथमिक स्कूल पुलिस लाइन-31.64 मीटर
5. फायर स्टेशन कोल तहसील-26.93 मीटर
6. प्राइमरी स्कूल दोदपुर-27.50 मीटर
7. एएमयू कृषि फॉर्म-24.96 मीटर
8. प्राइमरी स्कूल धौर्रा माफी-22.75 मीटर
9. जूनियर हाईस्कूल नीबरी-21.63 मीटर
10. कुल औसत-26.31 मीटर
यह है जल दोहन का मानक
- सामान्य श्रेणी - 6 से 8 मीटर
- सेमी क्रिटिकल - 15 मीटर (लगभग)
- क्रिटिकल-20 से 22 मीटर
- डार्क जोन-25 मीटर से अधिक
अत्यधिक जल दोहन वाली इकाइयां
- आरओ प्लांट- 150
- कार वाशिंग सेंटर - 60
-बर्फखाना-करीब 25
- पैकेज्ड ड्रिकिंग वाटर प्लांट -04
- नगर निगम के ट्यूबवेल -90
नगर निगम क्षेत्र का डार्क जोन में आना चिंता की बात है। समस्या से निपटने के लिए हमें वाटर रिचार्जिंग के संसाधन बढ़ाने होंगे अन्यथा एक दिन वह आएगा जब हम बूंद बूंद पानी को तरसेंगे।
सुबोध नंदन शर्मा, पर्यावरण विद्