चुनाव ड्यूटी से लौटने के 15 दिन बाद एक अध्यापक की कोविड समर्पित अस्पताल -एल-2- पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में मृत्यु हो गई। अब अस्पताल के डॉक्टर मृतक के पुत्र को कोविड-19 से मृत्यु का प्रमाणपत्र देने को तैयार नहीं हैं। नगर निगम द्वारा जारी प्रमाणपत्र पर कोविड-19 का उल्लेख नहीं है।
वैष्णव रॉयल नगर सिंघौली निवासी भगवान सिंह (55) हाथरस के महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज, सुजावलपुर में अध्यापक थे। 15 अप्रैल 2021 को पंचायत चुनाव के दौरान हाथरस जनपद के सहपऊ के धाधऊ स्कूल पर ड्यूटी की। 28 अप्रैल को बुखार, खांसी, कमजोरी और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत हुई। शहर के एक नामी डायग्नेस्टिक सेंटर में सिटी स्कैन कराई, जिसका स्कोर 25 में 15 था। 29 अप्रैल को कोविड-19 समर्पित पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। 30 अप्रैल को उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद मृतक के पुत्र नितिश कुमार को अस्पताल से एक पर्ची दी गई, जिस पर मृतक का नाम एवं पता लिखा था। कोविड-19 का कहीं जिक्र नहीं किया गया था। नगर निगम से मृत्यु प्रमाणपत्र तो बन गया, लेकिन उस पर मृत्यु का कारण अंकित नहीं है।
मृत्यु स्थल के रूप में जरूर पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय अंकित है, जो कोविड-19 समर्पित अस्पताल है। अब जब मृतक के पुत्र नितिश कुमार कोविड-19 से मृत्यु का प्रमाणपत्र लेेने गए तो पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय के डॉक्टरों ने प्रमाणपत्र देने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि वह सिटी स्कैन की रिपोर्ट पर कोरोना से मृत्यु का प्रमाणपत्र नहीं देंगे। आरटीपीसीआर जांच की रिपोर्ट पॉजिटिव होने पर ही प्रमाणपत्र देंगे। अध्यापक के पुत्र अब प्रमाणपत्र के लिए दीनदयाल अस्पताल से लेकर सीएमओ कार्यालय तक मारे-मारे फिर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार कहती है कि चुनाव ड्यूटी के तीस दिन के अंदर में मरने वाले शिक्षकों को मुआवजा देंगे। जबकि कोविड अस्पताल के डॉक्टर कोरोना से मृत्यु का प्रमाणपत्र देने को तैयार नहीं हैं। उनका यह भी आरोप है कि अस्पताल के चिकित्सक ट्रीटमेंट कार्ड भी नहीं दे रहे हैं। अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके उपाध्याय से जब शिकायत की गई तो उन्होंने युवक को शनिवार को सुबह बुलाया है। उन्होंने कहा कि युवक से बातचीत के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट होगी। उसके बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।