इसे कहते हैं आपदा में अवसर की तलाश। वैसे तो साइबर हैकर लगातार ठगी के लिए नित नए हथकंड़े अपनाते रहते हैं और पुलिस भी लगातार उनका पीछा करती रहती है। मगर इस डेढ़ माह के कोरोना काल में साइबर फ्राड का प्रतिशत बढ़ा है। ज्यादा लोग ऑनलाइन प्लेटफार्म प्रयोग कर रहे हैं। इस वजह से ठगी की शिकायतें बढ़ रही हैं।
आलम यह है कि जिले में थानों से लेकर पुलिस अधिकारियों और साइबर सेल व साइबर थाने में दो से तीन दर्जन शिकायतें हर रोज पहुंच रही हैं। इन शिकायतों में तरह-तरह के तरीकों से फ्राड सामने आ रहे हैं। हर प्रकरण में रुपये ठगे जा रहे हैं। ऐसे में एक लाख रुपये से अधिक की ठगी में साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कर हैकरों को पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि एक लाख से कम की ठगी में साइबर सेल लगातार उनके खुलासे और ठगे गए रुपये वापस कराने में जुटी है। ताजा आंकड़ों पर गौर करें तो पांच प्रकरणों में रुपये वापस कराए गए हैं। सौ से ज्यादा शिकायतें साइबर सेल में पहुंची हैं और दो मुकदमे साइबर थाने में दर्ज किए गए हैं।
साइबर एक्सपर्ट के रूप में काम साइबर थाने में और साइबर सेल में काम कर रहे इंस्पेक्टर साइबर सेल सुरेंद्र कुमार व साइबर सेल के सतीश चंद्र बताते हैं कि इस अपराध से सिर्फ सावधानी और गोपनीयता से बचा जा सकता है। जरा से लालच में लापरवाही बरतने और खाते की जानकारियां शेयर करने पर आपको ठगी का शिकार होने से कोई नहीं बचा जा सकता। हां, साइबर ठगी में रुपये ट्रांसफर होने के मामले में जरूरी है कि सबसे पहले पुलिस से शिकायत करें। जितनी जल्दी पुलिस के पास शिकायत पहुंचेगी, पुलिस रुपये वापसी में उतना बेहतर काम कर पाएगी और रुपये दिला पाएगी। अगर शिकायत में देर कर दी तो कई बार रुपये वापस मिल पाना संभव नहीं हो पाता है।
बहुत से मामलों में नहीं होती शिकायत
अश्लील वीडियो बनाकर ठगी और 5 से 10 हजार रुपये की छोटी-मोटी ठगी की तमाम शिकायतें जिले में अनगिनत होती हैं, जो पुलिस तक नहीं पहुंच पा रही हैं। वीडियो की शिकायत तो इसलिए नहीं कि बात सार्वजनिक होने पर खुद की ही फजीहत होगी। वहीं छोटी-मोटी ठगी में भी लोग बेवजह पुलिस के चक्कर लगाने से बचते हैं।
केस 1:-
सेवानिवृत्त फालोवर से हैकरों ने ठगे 9 लाख रुपये
साइबर थाने में इस माह दर्ज दो मुकदमों में पहला सासनी गेट अवतार नगर निवासी सुरेश चंद्र ने दर्ज कराया है। गाजियाबाद पीएसी से बतौर फालोवर 31 मार्च को सेवानिवृत्त हुए सुरेश चंद्र के पास 12 मई को एक फोन आया। फोन करने वाले ने बताया कि आपकी पेंशन भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए ऑनलाइन एकाउंट व अन्य दस्तावेजों का वेरिफिकेशन होना है। सुरेश लालच में आ गए कि कोरोना व लॉकडाउन काल में कहीं आने जाने के झंझट से बच जाएंगे और पेंशन शुरू हो जाएगी। इसी लालच में उन्होंने हैकर के बताए अनुसार वेरिफिकेशन के नाम पर खाते की डिटेल दे दी। चूंकि उनके खाते में 9 लाख रुपया पेंशन संबंधी आ गया था। वह पूरा रुपया खाते की डिटेल मिलते ही हैकर ने उड़ा दिया। इस संबंध में अज्ञात हैकरों पर साइबर फ्राड का मुकदमा दर्ज किया गया है।
केस 2:-
एक प्रोफेसर को ब्लैकमेल कर 3 लाख रुपये ऐंठे
साइबर थाने में इस माह में दूसरा मुकदमा एक प्रमुख शिक्षण संस्थान के प्रोफेसर से 3 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी का दर्ज किया गया है। इस मुकदमे के अनुसार उनके पास एक दिन एक अंजान नंबर से वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाली युवती थी। उसने दो तीन बार प्रोफेसर से बात की और फिर उस बातचीत की रिकार्डिंग में प्रोफेसर की अश्लील वीडियो एडिट कर लगा दी। इसके बाद उन्हें यह कहते हुए ब्लैकमेल किया गया कि अगर आपने रुपये नहीं दिए तो वे इस वीडियो को वायरल कर देगी या फिर आपके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराएगी। प्रोफेसर उसकी इस धमकी से डर गए और युवती के बताए वॉलेट में 3 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब उन्हें पता चला कि यह उनके साथ फ्राड हुआ है तो वे साइबर थाने पहुंचे और साइबर फ्राड का मुकदमा दर्ज कराया।
पिछले साल वापस कराए थे 12 लाख रुपये
पिछले एक साल के आंकड़ों पर गौर करें तो साइबर सेल ने 22 प्रकरणों में ऑनलाइन ठगी में लोगों के खातों से पार हुए 12 लाख 43 हजार 515 रुपये वापस कराए थे।
जल्द शुरू होगा साइबर प्लेटफार्म
एसएसपी कलानिधि नैथानी बताते हैं कि साइबर व सोशल मीडिया टीम लगातार ऑनलाइन हैकिंग पर काम कर रही है। इसी का परिणाम है कि लोगों के रुपये तक वापस कराए हैं। मगर इसमें जरूरत है निर्धारित समय में पुलिस के पास आने की। दूसरा सावधानी की। लोगों को सावधान करने, शिकायत सुनने, निस्तारण करने व जागरूक करने के लिए जल्द जिले में मेट्रो सिटी की तर्ज पर साइबर प्लेटफार्म शुरू कराया जाएगा। इसके लिए काम शुरू कर दिया गया है। जल्द एक जगह इस प्लेटफार्म को शुरू कर लोगों की समस्या समाधान में आसानी की जाएगी।