अप्रैल में कोरोना के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। जिले में रोजाना दो सौ से अधिक लोग संक्रमित हो रहे हैं तो लगभग 10 से 12 लोगों की मौत हो रही है। इसी बीच 19 अप्रैल को दिल्ली में लॉकडाउन लग चुका है, जो 26 अप्रैल तक जारी रहेगा। इन सभी कारणों का हवाला देकर थोक बाजार में दवाएं और उपकरण महंगे हो रहे हैं। औषधि प्रशासन विभाग की ओर से कोई जांच या स्टाक चेक नहीं होने के कारण ये ओवररेटिंग हर दिन के साथ बढ़ रही है। विरोध करने वाले फुटकर दुकानदारों को माल भी नहीं दिया जा रहा है। शिकायत करने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर भी कोई ठोस पहल नहीं हो रही है, जिससे आम लोगों को कई दवाएं और उपकरण महंगे मिल रहे हैं।
कालाबाजारी से बढ़े दवाओं व उपकरणों के दाम
1- आइवरमेक्टिन की 100 गोली डिब्बा 280 से बढ़कर 550 रुपये का हो गया है।
2- पैरासीटामॉल की दस गोली का पत्ता 4 से सीधे छह रुपये का हो गया है।
3- जिंकोविट की 15 गोली का पत्ता 70 रुपये से 95 रुपये का हो गया है।
4- एजिथ्रोमाइसिन की एक गोली आठ रुपये से बढ़कर 12 रुपये की हो गई है।
5- 350 से 400 रुपये में मिलने वाला ऑक्सीमीटर 1800 रुपये का हो गया है।
6- 80 से 90 रुपये की स्टीम मशीन 170 से 200 रुपये की हो गई है।
7- 60 रुपये का डिजिटल थर्मामीटर 200 रुपये का हो गया है।
8- 90 पैसे का साधारण सर्जिकल मास्क साढ़े तीन रुपये का हो गया है।
9- 40 रुपये में मिलने वाला साधारण थर्मामीटर 60 रुपये में बेचा जा रहा है।
10- 15 रुपये में मिलने वाली विटामिन सी की गोली लिम्सी अब 20 रुपये में है।
- दवा के थोक बाजार फफाला में बीते कुछ दिनों में कालाबाजारी चरम पर है। दिल्ली में लॉकडाउन लगने के बाद इसमें और इजाफा हुआ है। ड्रग इंस्पेक्टर की ओर से छापा डाल कर स्टॉक नहीं चेक करने से स्थितियां खराब हो रही हैै। जो ओवररेटिंग का विरोध करता है, उसको दवाएं नहीं मिलती है। अधिकारियों को बताने के बाद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इसलिए कुछ लोग सिंडीकेट बना कर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
- उमेश श्रीवास्तव, महामंत्री रिटेलर्स केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन।
- दवाओं की उपलब्धता और पारदर्शी वितरण के लिए प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार कार्रवाई हो रही है। कुछ दवाओं की कमी की सूचना मिली है। जल्द ही इस कमी को पूरा कराया जाएगा।
- हेमेंद्र चौधरी, औषधि निरीक्षक।