देशभर में बढ़ते कोरोना संक्रमण को लेकर केंद्र सरकार ने सीबीएसई 10वीं की परीक्षा रद्द करने के साथ ही 12वीं की परीक्षा स्थगित कर दी है। सरकार के इस फैसले से जिले के कुल 14749 विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं। दसवीं के छात्र-छात्राएं प्रमोट होकर खुश हैं, तो 12वीं के विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं, शिक्षकों और स्कूल संचालकों ने छात्र हित में लिए गए इस फैसले का स्वागत किया है।
12वीं के छात्र-छात्राओं का कहना है कि परीक्षा स्थगित होने से स्नातक में दाखिले की प्रक्रिया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियां भी प्रभावित होंगी। एक जून को कोरोना संक्रमितों के आंकड़े बताएंगे कि परीक्षा कब होगी। अगर संक्रमितों की संख्या में इजाफा होता रहा तो यह परीक्षा और देरी से होगी। जबकि हमारी तैयारी पूरी है। प्री बोर्ड परीक्षाएं, सैंपल पेपर हल कर चुके हैं। अगर परीक्षा देरी से होंगी तो हम 12वीं की पढ़ाई को छोड़कर और कुछ नहीं कर सकते हैं।
जिले में 10वीं के 8699 छात्र छात्राओं को परीक्षा में बैठना था। लेकिन अब ये सभी प्रमोट हो जाएंगे। 12वीं के 6050 विद्यार्थियों को अभी परीक्षा के लिए इंतजार करना होगा।
- कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने सही निर्णय लिया है। लेकिन बच्चों का परिणाम भविष्य में किस नजरिए से देखा जाएगा। यह बड़ा सवाल है, क्योंकि वह बोर्ड में नहीं बैठ रहे हैं। लेकिन इसमें कोई दोराय नहीं है कि शिक्षकों और बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर यह अच्छा निर्णय है।
- प्रवीन अग्रवाल, अध्यक्ष, पब्लिक स्कूल एंड डेवलेपमेंट सोसाइटी।
- इस साल का सीबीएसई 10वीं का परिणाम स्कूल स्तर से मिलने वाले परिणाम की तरह हो जाएगा। वैसे भी सरकार आने वाले समय में बोर्ड एग्जाम को खत्म करने पर विचार कर रही थी। जैसा कि नई शिक्षा नीति में हैं। सीबीएसई क्या दिशा निर्देश भेजता है, इसी के आधार पर रिपोर्ट कार्ड तैयार करेंगे।
- अनूप गुप्ता, निदेशक विजडम पब्लिक स्कूल।
- अगर परीक्षाएं हो जातीं तो दिक्कत नहीं थी, क्योंकि हमारी तैयारियां पूरी थीं। वैसे भी भविष्य में शिक्षा का क्षेत्र हो या नौकरी का। दसवीं के परीक्षा परिणाम को हर कोई देखता है। हमारा रिपोर्ट कार्ड कितना मायने रखेगा। यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन हमारे हित में यह फैसला है। इसीलिए सही फैसला है।
- आस्टिन वार्ष्णेय, छात्र कक्षा-10, धनीपुर।
- किसी परीक्षा के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ होना जरूरी है। बोर्ड में ऐसा पहले हो चुका है कि दसवीं की परीक्षाएं स्कूल में हुईं और कॉपी भी स्कूल के शिक्षकों ने जांची। लेकिन 12वीं की परीक्षा होना जरूरी है, क्योंकि 12वीं के बाद विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बच्चे तैयार होते हैं।
- आरती निगम, जिला समन्वयक सीबीएसई व प्रिंसिपल दिल्ली पब्लिक स्कूल।
- सरकार ने जो निर्णय लिया है, वह एक तरीके से तो ठीक है। लेकिन अगर करियर के नजरिए से देखें तो भविष्य अभी काफी दूर नजर आ रहा है। क्योंकि एक जून को पता नहीं कि एग्जाम होंगे या नहीं और वह भी कब। ऐसे में 12वीं की पढ़ाई को छोड़कर भविष्य की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं।
-यशिका राठी, कक्षा-12, दिल्ली पब्लिक स्कूल।
- पूरे साल मेहनत करने के बाद पता चला कि परीक्षा नहीं होगी तो अच्छा लग रहा है और अजीब सा भी। अजीब इसलिए कि अंतिम समय पर परीक्षा रद्द हुई है। हमने पूरी तैयारी कर ली थी। दो दो प्रीबोर्ड और सैंपल पेपर को हल कर करके प्रैक्टिस की थी। सरकार ने हमारी सुरक्षा को लेकर जो फैसला लिया है। इसका समर्थन करती हूं।
-मोहिशा गोयल, कक्षा-10, दिल्ली पब्लिक स्कूल।
मोहिशा गोयल। दसवीं कक्षा दिल्ली पब्लिक स्कूल- फोटो : CITY OFFICE