कासगंज के सहावर क्षेत्र में संचालित बाबा ईंट उद्योग से बृहस्पतिवार को बिहार के गया जिले के 79 मजदूरों और 20 बच्चों को मुक्त कराने के बाद वहां के स्थानीय अधिकारी उन्हें अलीगढ़ जंक्शन पर छोड़कर चले गए। कई घंटे तक मजदूर रेलवे जंक्शन पर भूखे-प्यासे पड़े रहे। वहीं, रिजर्वेशन न होने के कारण रेलवे अधिकारियों ने उनको प्लेटफार्म में नहीं जाने दिया। इस पर मजदूरों ने हंगामा किया। सूचना पर उप श्रमायुक्त राजेश कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले मजदूरों के खाने-पीने की व्यवस्था की। इसके बाद सभी मजदूरों को उनके गृह जनपद भेजने की तैयारी की जा रही थी।
कासगंज के सहावर क्षेत्र में बाबा ईंट उद्योग के नाम से धर्मेंद्र नाम के व्यक्ति का ईंट भट्ठा है। तीन माह पहले ठेकेदार गया जिले से 79 मजदूरों और 20 बच्चों को काम दिलाने के बहाने लेकर आया था। मजदूरों का आरोप है कि उनसे भट्ठे में काम कराया गया। लेकिन पैसा नहीं दिया गया। विरोध पर मारपीट हुई। बंधक बनाकर काम कराया जा रहा था। इसकी सूचना जैसे-तैसे वहां के स्थानीय प्रशासन को दी गई। जिला प्रशासन ने ईंट-भट्ठे से मुक्त कराया। किराये के एवज में 21 हजार रुपये भी दिलाए। इसके बाद दोपहर करीब दो बजे अलीगढ़ जंक्शन पर लाकर छोड़ दिया। लेकिन रिजर्वेशन न होने के चलते उनको प्लेटफार्म नहीं घुसने दिया गया। इधर, गया तक सीधी रोडवेज बस का संचालन भी नहीं है। ऐसे में मजदूरों ने हंगामा शुरू कर दिया।
सूचना पर उप श्रमायुक्त राजेश कुमार पहुंच गए, उन्होंने मौके पर मजदूरों के लिए खान-पान की व्यवस्था की। इसके बाद रेलवे अधिकारियों से बातचीत कर गया जाने वाली ट्रेन में सीट दिलाने के लिए कहा। हालांकि, बात नहीं बन सकी। इस पर रोडवेज आरएम से मदद की मांग की गई। मगर, रोडवेज ने बिहार के लिए परमिट न होने के चलते हाथ खड़े कर दिए। राजेश कुमार ने बताया कि निजी बसों से मजदूरों को बिहार भेजने की तैयारी की जा रही है।