वर्ष 2020-21 में छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ लेने के लिए विद्यार्थियों व उनके कालेजों की ओर से आवेदन में भारी गड़बड़ी की गई है। एक ही प्रमाणपत्र पर दर्जनों छात्रों के आवेदन फार्म भर दिए गए हैं। इतना ही नहीं, कई आवेदनों में तो कोर्स की फीस भी बढ़ाकर लिखी गई है। इस तरह के मामले सामने आने पर उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव बीएल मीणा ने सभी जिलों को अपने-अपने स्तर पर जांच कराने का निर्देश दिया है।
पत्र के मुताबिक, माध्यमिक शिक्षा के एससी-एसटी, ओबीसी, सामान्य व अल्पसंख्यक वर्ग के 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों ने वर्ष 2020-21 में छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया है। इन आवेदनों में कई विद्यार्थियों ने एक ही नाम, पिता नाम, जाति प्रमाण पत्र, जन्मतिथि, यहां तक की जाति प्रमाण पत्र का क्रमांक भी एक ही भर दिया है। इन आवेदन पत्रों की जांच के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग को पत्र जारी किया गया है। इसी प्रकार की खामी डा. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त कुछ निजी इंजीनियरिंग कालेज की भी सामने आई है। इनकी जांच के लिए डा. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र जारी किया गया है।
निजी पॉलीटेक्निक कालेज के छात्रों की ओर से भरे गए आवेदनों में भी खामी पाई गई है। छात्रों ने आय प्रमाण पत्र क्रमांक के स्थान पर 0000000000 जैसी संख्या भर दी है। इनकी जांच के लिए प्राविधिक शिक्षा विभाग को पत्र लिखा गया है। वहीं, निजी आईटीआई कालेजों के कई आवेदनों में कोर्स फीस से कई गुना अधिक फीस अंकित कर दी गई है, जिससे कि उनको अधिक शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ मिल जाए। इसकी जांच के लिए व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग को पत्र जारी हुआ है। जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह की ओर से जांच का जिम्मा समाज कल्याण अधिकारी को सौंपा गया है।