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दस बजे की बंदिश से 'बज' गया 'बैंड'

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मदारगेट मां दुर्गा बैंड पर रिहर्सल करते बैंड संचालक व कर्मचारी। - फोटो : CITY OFFICE
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लगभग आठ महीने बाद शुरू होने वाले सहालग में रात दस बजे की बंदिश ने बैंड वालों का बैंड बजा दिया है। तीन शिफ्टों में बारातें करने वाले बैंड मास्टर अब केवल दो शिफ्टों में बुकिंग कर पा रहे हैं। उसमें भी दूसरी शिफ्ट पर प्रशासनिक कार्रवाई का डर बैठ गया है। जिससे बैंड अपनी लय में नहीं आ पा रहे हैं।
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बता दें कि कोरोना संक्रमण काल में लगे लॉकडाउन से गर्मियों की सहालग में बैंड-बाजा-बारात नहीं निकल सकी थीं। ऐसे में बैंड संचालकों ने अपने कारीगरों को पिछले साल का भुगतान बिना काम के किया। अब 25 नवंबर से सहालग शुरू हो रहे हैं। बुकिंग की भरमार है। इतना ही नहीं, अधिकतर ने शाम को छह से आठ और नौ से 11 बजे तक की बुकिंग ले ली है। जबकि दस बजे के बाद बैंड बजाने को प्रतिबंध करने वाले निर्देश हाल ही में आए हैं। ऐसे में बैंड संचालक दूसरी बारात निकालने वाले लोगों से समय घटाने के लिए कह रहे हैं। कोई प्रशासनिक कार्रवाई न हो जाए। इसके लिए समय घटाने की माथापच्ची चल रही है। इस संबंध में बैंड संचालकों ने अमर उजाला को बताया कि अगर दूसरी शिफ्ट समय को लेकर निरस्त होती है तो काफी नुकसान होगा। क्योंकि देवउठान एकादशी से लेकर जून-जुलाई तक बैंड बजाने वाले कारीगर बुक किए जाते हैं। काम हो या न हो। सभी को भुगतान करना पड़ता है। इस बार गर्मियों का सीजन पिट गया तो सभी 25 नवंबर से 12 दिसंबर तक की सहालग से काफी आस लगाए बैठे थे। अब जब सहालग की काफी बुकिंग हो गई हैं तो दस बजे की बंदिश से बैंड बाजा वालों का ही बाजा बज गया है। सभी दबी जुबान दस बजे की जगह बंदिश को 11 बजे से करने की कह रहे हैं।
शादियों में डीजे लगाने का चलन भी काफी है, लेकिन कोरोना संक्रमण काल के चलते डीजे का काम धराशाही हो गया है। डीजे लगाने के रेट कम हो गए हैं। साथ ही बड़े कार्यक्रमों की बुकिंग नहीं हुई है। संजीव एंड पार्टी के संजीव गुप्ता ने बताया कि बड़े कार्यक्रम निरस्त हो गए हैं। एक लाख रुपये वाले कार्यक्रम अब 25 हजार रुपये में बुक किए जा रहे हैं। आठ से दस बजे तक बजने वाले डीजे का चार्ज लोग कम देना चाह रहे हैं। पिछले साल तीस के लगभग सहालग की बुकिंग थी। एक एक दिन में तीन तीन कार्यक्रम अटेंड करते थे, लेकिन इस बार कुल आठ-नौ ही बुकिंग हुई हैं। उन्होंने बताया कि इसका असर लेबर, इवेंट आर्गनाइजर, आर्टिस्ट पर भी पड़ रहा है। ऐसे में इस बार डीजे पर कम गाने बजेंगे।
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25 से लेकर 12 दिसंबर तक की फुर्सत नहीं है। कई दिनों में तो दो-दो बुकिंग ले ली हैं, लेकिन दस बजे के बाद बैंड न बजने वाले नियम से परेशान हैं। अगर पार्टी बैंड को कैंसिल करती है तो ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा। हमें आठ महीने का ठेका कर कारीगरों को रखते हैं। अगर रात 10 बजे वाले नियम की बदौलत बैंड नहीं बजा तो परिवार का बैंड जरूर बज जाएगा।
फैजान कुरैशी, अजंता बैंड मदार गेट
दस बजे वाला नियम कहीं जहर खाने को मजबूर न कर दे। क्योंकि पूरा लॉकडाउन काम धंधा बंद रहा। इसके उलट कारीगरों को पूरी रकम देनी पड़ी। अब उधार लेकर जैसे-तैसे कारोबार खड़ा किया है। उसमें भी अगर दस बजे की बंदिश के चलते बुकिंग कैंसिल होने का खतरा बढ़ गया है। 20-25 बुकिंग से कुछ आशा जगी थी, लेकिन बंदिश के समय ने हालात बदल दिए हैं।
- इकराम, राज बैंड मदार गेट
बुकिंग बढ़िया है। 25 नवंबर से लेकर 12 दिसंबर तक लगातार बुकिंग हैं। लॉकडाउन की वजह से पुराने रेटों पर ही काम कर रहे हैं, लेकिन रात दस बजे वाले नियम से परेशानी आ गई है। क्योंकि हम बुकिंग ले चुके हैं। अगर पहले निर्देश जारी होते तो हम ग्राहकों से कह सकते थे। अब तो समय घटाने को लेकर पार्टियों से कशमकश चल रही है।
-पवन कुमार गुप्ता, मां दुर्गे बैंड मदार गेट
200 से अधिक लोगों को शामिल कर शादी करने की अनुमति दी जाए। रात में बैंड और डीजे बजाने का समय दस की जगह साढ़े 11 बजे तक किया जाए। इससे बैंड संचालकों और डीजे संचालकों को काफी सहूलियत होगी। पहले से नुकसान में चल रहे इन लोगों को नुकसान की भरपाई के लिए जिला प्रशासन और सरकार दोनों को सोचना चाहिए।
-प्रदीप गंगा, अध्यक्ष द अलीगढ़ कारोबारी टैंट एसोसिएशन
मैरिज होम, होटलों की भी हुई है बुकिंग
सहालगों के चलते मैरिज होम और होटलों में बुकिंग हो गई है। अधिकांश मैरिज होम मुख्य सहालगों के लिए बुक हैं। आठ महीने बाद सहालगों की बुकिंग को देखकर मैरिज होम और होटल संचालक खुश नजर आ रहे हैं।
दावत देने का बदल रहा है ट्रेंड
सहालगों में होने वाली शादियों में 200 लोगों को शामिल करने की परमीशन है। ऐसे में मैरिज होम संचालक और होटल संचालक बुकिंग करने वाली पार्टियों से लिस्ट मांग रहे हैं। ऐसे में अब लोगों ने दावत का ट्रेंड ही बदल दिया है। एक दिन में सुबह और शाम को अलग-अलग 200-200 लोगों को निमंत्रण भेज रहे हैं। वहीं कुछ शादियां दो दिन में हो रही हैं। ऐसे में रिश्तेदार, दोस्त और संबंधियों को अलग-अलग समय पर बुलाया जा रहा है।
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