शहर के प्रसिद्ध सराफा एवं रियल एस्टेट कारोबारी तथा श्रीवार्ष्णेय कॉलेज सोसाइटी के अध्यक्ष चंद्रशेखर सराफ का अंतिम संस्कार पूरी सावधानी से नुमाइश मैदान स्थित मुक्तिधाम में कर दिया गया। इस दौरान उनकी पत्नी अपने आंसू को नहीं रोक पाई और फूट-फूट कर रोने लगीं। बड़ी मुश्किल से लोगों ने उन्हें संभाला।
जेएन मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मंगलवार सुबह 4 बजे सराफा कारोबारी चंद्रशेखर की मृत्यु हो गई। शाम करीब चार बजे पूरी सावधानी के साथ उनके सील शव को एंबुलेंस से मुक्तिधाम लाया गया। मानव उपकार संस्था के अध्यक्ष विष्णु कुमार बंटी ने बताया कि सराफा कारोबारी उनके संस्था के संरक्षक भी थे। अंतिम संस्कार में शामिल सराफा कारोबारी की पत्नी, दो बेटे एवं परिवार के कुछ नजदीकी लोग मौजूद थे। पत्नी, बेटों सहित अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले सदस्य पीपीई किट पहने हुए थे। कारोबारी के बड़े पुत्र ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के पहले और बाद में मुक्ति धाम को सैनिटाइज किया गया।
एंबुलेंस चालक खुले में जला रहा था पीपीई किट
जिस एंबुलेंस से सराफा कारोबारी का शव आया था, उसके चालक ने अपना पीपीई किट नुमाइश के खुले मैदान में जला दिया। कुछ लोगों की नजर पड़ी तो टोका-टोकी की। जब कारोबारी का अंतिम संस्कार हो रहा था, उसी समय गांधीपार्क क्षेत्र के लावारिस का शव अंतिम संस्कार के लिए वहां लाया गया। मौजूद लोगों का कहना है कि मृतक नेपाल का रहने वाला है और गांधी पार्क के होटल में काम करता था। उसके शव को बाहर रोक दिया गया। सराफा कारोबारी का अंतिम संस्कार के बाद मुक्तिधाम को सैनिटाइज किया गया। उसके बाद लावारिस का शव का अंतिम संस्कार किया गया।