नगर निगम का सीमा विस्तार सियासी खेमे में भाजपा का बड़ा दांव माना जा रहा है। विधायक के प्रस्ताव के पीछे संगठन की बड़ी सोच सियासी हालात देखकर खुद-ब-खुद नुमाया हो रही है। हालांकि, प्रशासनिक तंत्र अभी आदेश के इंतजार की बात कह रहा है। मगर सूचना तंत्र संकेत दे रहा है कि आने वाला निकाय चुनाव 2017 में शामिल हुए 19 गांवों के साथ-साथ ताजा शामिल 16 गांवों को मिलाकर ही कराया जाएगा। सत्ताधारी भाजपा के इस दांव और कवायद के पीछे वजह अलीगढ़ मेयर पद पर पांच साल के वनवास को खत्म करना है। बाकी परिणाम भविष्य तय करेगा?
ये जगजाहिर है कि अलीगढ़ शहर में चुनाव धार्मिक ध्रुवीकरण के आधार पर होता रहा है। एक तरफ भाजपा और दूसरी ओर भाजपा को हराने का दमखम रखने वाले सशक्त उम्मीदवार का ही चयन कर मतदान किया जाता है। ढाई दशक के सियासी इतिहास में 2017 में पहला मौका आया, जब शहर की दोनों सीटों शहर-कोल पर भाजपाई विधायक चुन लिए गए। इसी का परिणाम रहा कि भाजपा विरोधी खेमे ने अपने अस्तित्व व नेतृत्व की वापसी की खातिर नगर निगम चुनाव में एड़ी चोटी का जोर लगाया। मेयर पद मुस्लिम-अनुसूचित जाति गठजोड़ से बसपा के खाते में डालकर भाजपा से छीन लिया। इस हार के बाद महानगर व जिला स्तर से लेकर प्रदेश व राष्ट्रीय नेतृत्व तक बड़ी छिछालेदार हुई। हालांकि, भाजपा की हार अलीगढ़ के साथ मेरठ में भी हुई थी। मगर उत्तर प्रदेश में अलीगढ़ इकलौता ऐसा निगम था, जहां भाजपा लगातार जीतती थी। इसके ज्यादा मायने निकाले गए और अलग अलग तरीकों व वजहों से लोगों पर ठीकरे फोड़े गए। अब यह कवायद उसी का हिस्सा मानी जा रही है।
तकनीकी वजह बाधा न बन जाए
वर्ष 2017 में भी 19 गांव नगर निगम सीमा में शामिल किए गए थे। मगर पिछले चुनाव में उन गांवों को नगर निगम में मिलाकर चुनाव नहीं कराए गए थे। उसके पीछे दलील दी गई कि इन पंचायतों में प्रधान सक्रिय हैं। इनका कार्यकाल पूरा होने के बाद इन्हें नगर निगम में शामिल कर चुनाव कराया जाएगा। इसी वजह से उन 19 गांवों में अबकी पंचायत चुनाव नहीं हुए और अब 2022 के निकाय चुनाव में उन्हें शामिल किया जा रहा है। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी कौशल कुमार बताते हैं कि 70 वार्ड के नगर निगम में पिछली बार सीमा विस्तार वाले 19 गांवों शामिल कर 80 वार्ड बना लिए गए हैं। अब इन नए 16 गांवों को इस बार के चुनाव में शामिल करने पर शासन के आदेश का इंतजार किया जाएगा। कौशल कुमार का कहना है कि उन 19 गांवों की मतदाता सूची नहीं बन सकी थी। इसलिए पिछले चुनाव में वे शामिल नहीं हुए थे। अभी चूंकि समय है, इसलिए निर्देश मिला तो इन नए गांवों की मतदाता सूची बनाकर चुनाव कराए जा सकते हैं।
भाजपा चूंकि विकास नहीं करा सकी है। इसलिए 16 नए गांवों को शामिल कर चुनाव कराने की तैयारी है, हमने कमिशभनर से मिलकर आपत्ति दर्ज कराई थी और वे 12 गांवों बताए थे, जो शहर के बिल्कुल सटे हैं। यह सब एक सोची समझी साजिश के तहत किया जा रहा है। मगर हम फिर कह रहे हैं कि आने वाले चुनाव में परिणाम खुद भाजपा के सामने होंगे।-अज्जू इशहाक, पूर्व महानगर अध्यक्ष सपा
- हम निकाय चुनाव के लिए तैयार हैं और बेहद मजबूत हैं। हमारे आधार वोट बैंक को कोई नहीं डिगा सकता। मेयर पद पर रहकर मो.फुरकान ने जो काम किए हैं, वे जनता के बीच हैं। जो काम नहीं हुए हैं, वे अधिकारियों की वजह से नहीं हुए हैं। इन बातों का हम पर कोई फर्क नहीं पड़ता। हम चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे भी।-हरजीत सिंह, जिलाध्यक्ष बसपा
1996 में सृजित नगर निगम में अब तक के मेयर--
1997--प्रथम मेयर आशुतोष वार्ष्णेय भाजपा
2002--द्वितीय मेयर सावित्री वार्ष्णेय भाजपा
2007--तृतीय मेयर आशुतोष वार्ष्णेय भाजपा
2012--चतुर्थ मेयर शकुंतला भारती भाजपा
2017--पांववें मेयर मोहम्मद फुरकान बसपा
20 वर्ष शहर विधायक सीट पर रहा गैरभाजपाई दल का कब्जा : 1996 सपा से अब्दुल खालिक, 2002 कांग्रेस से विवेक बंसल, 2007 सपा से जमीरउल्लाह, 2012 सपा से जफर आलम।
सपा ने दिए थे इन 12 गांवों के प्रस्ताव
पटवारी का नगला, बिस्मिल्लाह कॉलोनी, रियाज कॉलोनी, वहीद नगर, सपना कॉलोनी, फोर्ट एन्क्लेव, फतेहनगर, अलीनगर, नई आबादी चिलकौरा, उदला इलियास पुर, अल्हदादपुर नीवरी, तालसपुर खुर्द