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गाड़िया लोहार समाज का जल्द खत्म हो सकता है ‘वनवास’

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सासनी गेट पर बसे गड़िया, लुहार समाज के लोग। - फोटो : CITY OFFICE
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अभिषेक शर्मा
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महाराणा प्रताप के अनुयायी बताए जाने वाले घुमंतू व बेघर गाड़िया लोहार समाज को जल्द प्रदेश के अन्य नागरिकों की तरह सुविधाएं मिल सकती हैं। फिलहाल ये लोग सड़कों के किनारे झोपड़ी या बैलगाड़ी में परिवार सहित रहकर लोहे के कृषि उपकरण व बर्तन आदि बनाने का काम करते हैं। योगी सरकार जल्द ही पूरे प्रदेश में इन मामले पर सर्वे कराने जा रही है। इस समाज के पुनर्वास की मांग करने वाले भाजपा एमएलसी मानवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को लेकर काफी गंभीरता दिखाते हुए उनको पूरा भरोसा दिलाया है।
अलीगढ़-आगरा स्नातक क्षेत्र के एमएलसी मानवेंद्र प्रताप सिंह ने खास बातचीत में कहा कि उत्तर प्रदेश के अनेक शहरों में इस समाज के लोग सड़क किनारे बैलगाड़ी या झोपड़ी डालकर लोहे के कृषि यंत्र और बर्तन आदि बनाने का काम करते देखे जा सकते हैं। इनके विषय में मान्यता है कि इनके पूर्वज महाराणा प्रताप के अनुयायी रहे। वे लड़ाई लड़ने के साथ-साथ उनके लिए हथियार बनाने का काम करते थे। मध्यकालीन युग का वह दौर अलग था। अब आजाद भारत पर हमारा अपना शासन है। इसलिए अब इन्हें भी सभी नागरिक सुविधाएं मिलनी चाहिए। इनको भी राशन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर कार्ड, आयुष्मान कार्ड देने के साथ बच्चों को शिक्षा और आवास की व्यवस्था की जाए। मानवेंद्र सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को पत्र सौंपकर इस समाज को उपरोक्त सभी नागरिक सुविधाएं दिए जाने का अनुरोध किया है। ताकि ये लोग भी विकास की मुख्यधारा में आकर बेहतर जीवन यापन कर सकें। मानवेंद्र का कहना है कि मुख्यमंत्री ने इस विषय को बेहद गंभीरता से लेते हुए प्रदेश में इनकी आबादी को लेकर जल्द सर्वे कराने की बात कही है।
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बेघर और घुमंतू होने के पीछे है पूर्वजों की प्रतिज्ञा
महाराणा प्रताप को लेकर प्रतिज्ञा से बंधे इस समाज के लोगों की बैलगाड़ी ही उनका घर होती है। बैलगाड़ी के कारण ही ये गाड़िया लोहार कहलाए। प्रतिज्ञा पर गौर करें तो सोलहवीं शताब्दी में महाराणा प्रताप का मुगलों से संघर्ष चल रहा था। गाड़िया लोहारों के पूर्वज महाराणा की सेना में थे। मुगलों से संघर्ष में महाराणा की हार हुई और इनका राज्य मेवाड़ मुगलों के हाथ चला गया। महाराणा को जंगल में शरण लेनी पड़ी। इस पर महाराणा की सेना के इस समाज के सैनिकों ने प्रतिज्ञा ली कि जब तक मेवाड़ और चित्तौड़ पर फिर से महाराणा प्रताप का राज नहीं हो जाता, तब तक वे अपने घर मेवाड़ नहीं लौटेंगे। कभी कहीं भी स्थाई रूप से नहीं बसेंगे और न छत के नीचे रहेंगे। बस तभी से ये पीढ़ी दर पीढ़ी लगातार घुमंतू होकर चल रहे हैं। यही प्रतिज्ञा इनके समुदाय की पहचान बन गई है। वे बैलगाड़ी में अपनी गृहस्थी जमाते हैं और निकल पड़ते हैं। महाराणा प्रताप के लिए हथियार बनाने वाला यह समाज अब बदलते समय के साथ घरों और खेतों में काम आने वाले लोहे के बर्तन और यंत्र बनाते हैं। जिनमें तवा, कड़ाही, चिमटा, फावड़ा, छैनी, खुरपी और हथौड़ा आदि शामिल हैं। इन्हें लेकर वर्ष 2020 में ओटीटी प्लेटफार्म नेटफ्लिक्स पर भारत के भूले हुए लोग एक फिल्म भी आई।
अलीगढ़ में यहां हैं ठिकाने
अपने शहर में आगरा रोड चिरंजीलाल स्कूल, आगरा रोड गोशाला, रामघाट रोड प्रकाश लॉज, जीटी रोड गांधीपार्क के सामने, क्वार्सी बाईपास, रामघाट रोड क्वार्सी चुंगी सहित कई ठिकाने हैं, जहां ये एक अर्से से रहते हैं। इनकी आपस में ही रिश्तेदारियां हैं।
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- मुख्यमंत्री ने गाड़िया लोहार समाज को लेकर दिए गए इस प्रस्ताव पर बेहद गंभीरता दिखाई है। मैं खुद अपने स्नातक एमएलसी क्षेत्र के 12 जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर इस संबंध में सर्वे कराने का अनुरोध करूंगा। सरकार की ओर से प्रदेश स्तर से अलग सर्वे कराने की तैयारी है।
- मानवेंद्र प्रताप सिंह, एमएलसी
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