फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पौधे लगाओ और भूल जाओ, वन विभाग के पास नहीं कोई रिकॉर्ड

विज्ञापन
धौर्या माफी स्थित अली नगर में में नगर निगम द्वारा लगाए गए पौधे सूख गए। - फोटो : CITY OFFICE
विज्ञापन
जिले में वर्ष 2020-21 में 29.28 लाख पौधे रोपे गए थे, इस बार पौधरोपण का लक्ष्य 54.19 लाख है। सरकारी विभागों को लक्ष्य भी आवंटित कर दिया गया है। पौधरोपण के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि लक्ष्य हासिल कर अफसर अपनी पीठ थपथपा सकें, मगर हकीकत यह है कि यह अभियान सिर्फ रस्म अदायगी भर बनकर रह गया है। पौधे लगाओ और भूल जाओ की तर्ज पर चल रहा है। आलम ये है कि वन विभाग के पास ऐसा कोई रिकार्ड नहीं है कि पिछले साल रोपे गए पौधों में से कितने पौधे जीवित हैं या फिर सूख चुके हैं।
विज्ञापन

हर साल जुलाई में पौधरोपण अभियान चलता है। पिछले सत्र में तालानगरी, रामघाट रोड, नकवी पार्क, एटा चुुंगी, नौरंगाबाद, हाईवे किनारे पौधे रोपे गए थे। देखरेख के अभाव में बड़ी संख्या में पौधे मुरझा चुके हैं या फिर नष्ट हो चुके हैं। यही वजह है कि सालों की कवायद के बाद भी अलीगढ़ में वन क्षेत्र नहीं बढ़ पा रहा।
पांच साल में पौधरोपण की स्थिति (लाख में)
वर्ष 2016-17 3.55
2017-18 1.67
2018-19 18.55
2019-20 35.81
2020-21 29.28
इस साल का विभागवार लक्ष्य (लाख में)
वन विभाग - 1990026, पर्यावरण विभाग - 221158, ग्राम्य, राजस्व व पंचायतीराज विभाग- 2368940, आवास विभाग - 9800, औद्योगिक विकास विभाग - 5180, लोक निर्माण विभाग - 14840, नगर विकास विभाग - 30800, जल शक्ति विभाग- 14840, कृषि विभाग - 370660, पशुपालन विभाग - 8260, सहकारिता विभाग - 8680, उद्योग विभाग - 11480, ऊर्जा विभाग - 6720, माध्यमिक शिक्षा विभाग - 4400, बेसिक शिक्षा विभाग - 4400, प्राविधिक शिक्षा विभाग - 7840, उच्च शिक्षा विभाग - 29680, स्वास्थ्य विभाग -13300, परिवहन विभाग - 4480, रेलवे - 27160, उद्यान विभाग - 242276, गृह एवं रक्षा विभाग - 19600।
विज्ञापन

कागजी नहीं, वास्तविकता में लगे पौधे
पर्यावरणविद् सुबोध नंदन का कहना है कि पौधरोपण कागजों पर नहीं, वास्तविकता में लगने चाहिए। जब तक पौधों को ट्री गार्ड या सुरक्षित चारदीवारी के अंदर नहीं लगाया जाएगा, तब तक पौधरोपण अभियान की यही स्थिति रहेगी। इसके लिए निजी भागेदारी और जिम्मेदारी तय की जाए तो अच्छे परिणाम मिलेंगे। यदि चार-चार पौधे भी आसपास के लोगों को गोद दे दिए जाएं या फिर लोग खुद पहल करें तो ये पौधे पेड़ जरूर बनेंगे।
पिछले साल पौधरोपण अभियान में लगाए गए कितने पौधे जिंदा है और कितने नष्ट हो चुके हैं, इसका रिकार्ड विभाग के पास नहीं है। इस बार वार्षिक पौधों की प्रजाति के हिसाब से भूमि का चयन किया गया है, जो पौधा, जैसी भूमि पर वृद्धि करता है, उसी के हिसाब से पौधरोपण किया जाएगा। वर्षाकाल में पौधरोपण करने के पीछे भी यही वजह है कि वे पानी के अभाव में सूखे नहीं। डेढ़-दो माह तक बारिश के पानी से पौधे की जड़ बढ़नी शुरू हो जाती है। लोगों से अपील है कि अपने आसपास के पौधों की देखभाल करें। - दिवाकर वशिष्ठ, प्रभागीय वन अधिकारी
केस - एक
नगर निगम ने वर्ष 2020-21 में असदपुर कयाम में 8500 पौधे लगाए थे। इसमें शीशम, अर्जुन, जामुन, सहजन, अमरूद, देशी बबूल, नीम के पौधे शामिल थे। देखरेख न होने से अधिकांश पौधे सूख चुके हैं।
केस- दो
नगर निगम व वन विभाग ने धौर्रा के पास अलीनगर में करीब 2000 हजार पौधे रोपे थे। इनमें से आधे ज्यादा पौधे नष्ट हो चुके हैं। यहां भी पौधों की देखरेख का अभाव रहा।
केस- तीन
वन विभाग ने रामघाट रोड व नौरंगाबाद पुल से एटा चुंगी तक डिवाइडर के बीच में करीब 10,000 पौधे लगाए थे। इनमें से बमुश्किल 400 पौधे बचे हैं, जबकि बाकी मुरझा चुके हैं।
केस- चार
वन विभाग ने छेरत में 5000 पौधे लगाए थे। इन पौधों में से मौके पर मात्र अब करीब 300 पौधे ही जीवत बचे हैं। बाकी देखरेख न होने से दम तोड़ चुके हैं।
बढ़ रहा प्रदूषण का ग्राफ, जहरीली हो रही हवा
अलीगढ़ में प्रदूषण का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है और यहां की हवा जहरीली होती जा रही है। दिल्ली-एनसीआर के नजदीक होने से समस्या बढ़ रही है। यह हाल तो तब है जब पिछले 15 सालों में वन विभाग ने 1.55 करोड़ पौधे लगाए हैं। इतने पौधे लगाने के बाद भी वन क्षेत्र और हरियाली का प्रतिशत सिर्फ 1.83 ही बढ़ सका है। अलीगढ़ मंडल के एटा में 1.28 व हाथरस जिले में 1.25 प्रतिशत हरियाली है। विशेषज्ञों की मानें तो हरियाली कम होने का कारण प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ना है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें