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अलीगढ़ः चंदा देकर कल्याण सिंह को चुनाव लड़ाते थे लोग

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अतरौली विधानसभा क्षेत्र में चुनावी चर्चा करते स्थानीय लोग। - फोटो : CITY OFFICE
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कोरोना महामारी के कारण भले ही चुनाव प्रचार के तौर-तरीके बदल गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म से पार्टी एवं प्रत्याशियों के सहयोगी हवा बना रहे हैं। इससे चाय की दुकानों की चर्चा पर विशेष असर नहीं पड़ा है। उस चर्चा में जो मजा एवं सच्चाई है, आभासी दुनिया में कहां संभव है।
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अतरौली के केएमवी इंटर कॉलेज में गृहमंत्री अमित शाह की जनसभा समाप्त होने के बाद ही कॉलेज रोड (बड़ी का अड्डा) स्थित एक चाय की दुकान पर बुजुर्गों की चर्चा शुरू हो गई। अमित शाह के भाषण का जिक्र कर लोग उसके मर्म को समझने की कोशिश कर रहे थे। अमित शाह बार-बार सपा शासन की याद दिला रहे थे। लोग इसका भी अर्थ निकाल रहे थे। एक दूसरे से बात कर कौन-कौन रेस में है और कौन रेस से बाहर है, इसका अंदाजा लगाने का भी प्रयास कर रहे थे। कस्बा एवं ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। वहीं कुछ लोग पुराने दिनों को याद कर रहे थे। 65 वर्षीय किशन उर्फ बौना उस्ताद का कहना था कि कल्याण सिंह को चंदा देकर लोग चुनाव लड़ाते थे। ऐसा लगता था कि कल्याण सिंह नहीं बल्कि गांव का हर आदमी चुनाव लड़ रहा हो। मुहल्ला खालिफान के दीप सिंह कहते हैं कि अब तो चुनाव प्रचार का तरीका ही बदल गया है। पहले जुलूस और मीटिंग अधिक होती थीं। साइकिल एवं पैदल चलकर लोग जनसंपर्क करते थे। रामकुमार कहते हैं कि उस जमाने में सबको साइकिल भी नसीब नहीं थी। चंद्रपाल सिंह कहते हैं कि अब तो चुनाव का रूप ही बदल गया है।
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