नुमाइश की बुधवार रात से बत्ती गुल हो गई। दुकानदारों ने भी अपना सामान बटोरना शुरू कर दिया है। 10 जनवरी को नुमाइश के समापन के बाद सभी सरकारी स्टॉल पहले ही हटा दिए गए थे। कुल मिलाकर 23 दिन नुमाइश चली। कई सालों से नुमाइश में आ रहे दुकानदार मायूस होकर घर लौट रहे हैं।
10 दिसंबर को नुमाइश का शानदार आगाज हुआ था। इसका समापन 10 जनवरी को तय कार्यक्रम अनुसार हो गया। समापन के बाद प्रशासन द्वारा दो दिन की अतिरिक्त मोहलत दी गई थी। बुधवार को यह मोहलत खत्म हो गई। रात 10 बजे पूरी नुमाइश की बत्ती गुल हो गई। आखिरी दिन होने के कारण नुमाइश में काफी भीड़ रही। दुकानदारों द्वारा भी सामान सस्ता कर दिया गया। कुछ लोग सेल लगाकर सस्ते में घरेलू सामग्री, कपड़े, कालीन, बर्तन आदि चीजें बेच रहे थे। वहीं 10 बजे के बाद झूलों का संचालन भी बंद हो गया। मौत का कुआं भी बंद हो गया। 10 बजे के बाद सब थम सा गया। नुमाइश के बंद होने के साथ ही दुकानदारों ने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया है। उनका कहना था कि पिछली साल की नुमाइश ने 20 सालों का रिकार्ड तोड़ा था, लेकिन इस साल नुमाइश कोरोना की भेंट चढ़ गई। दुकानदारों के चेहरों पर मायूसी थी।
महिलाओं ने जमकर खरीदा सस्ता सामान
अलीगढ़। नुमाइश के आखिरी दिन बुधवार को सस्ते सामान खरीदने के लिए महिलाओं की खासी भीड़ रही। महिलाओं ने जमकर सामान खरीदा। पर्स, घरेलू सामान, कालीन, बर्तन आदि की जमकर खरीदारी की। बच्चों को भी किचिन सेट, खिलौने, फुटबॉल आदि खेल के सामान दिलाए गए।