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10 मार्च से टूटने लगी थीं तारिक की सांसें

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तारिक का फ़ाइल फोटो। - फोटो : CITY OFFICE
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इकराम वारिस
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अलीगढ़। मो. तारिक अब दुनिया में नहीं रहा। केवल दुनिया में उसका नाम रहेगा। तारिक की सांसें 10 मार्च से ही टूटने लगी थीं। हर लम्हा उसकी जिंदगी पर भारी पड़ रहा था। 20 दिन से जिंदगी और मौत से जूझ रहे तारिक की शुक्रवार देर रात मौत हो गई।
सीएए, एनसीआर व एनपीआर के विरोध में 23 फरवरी को ऊपरकोट कोतवाली पर उपद्रव की तपिश बाबरी मंडी सहित ऊपरकोट से सटे इलाकों में पहुंच गई। इस बवाल में तारिक खान को गोली लग गई। जख्मी तारिक को जेएन मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहां उसका उपचार शुरू हो गया। इसी बीच 10 मार्च को हालत नाजुक होने पर उसे वेंटीलेटर पर लाया गया, जहां उसकी सांसें टूट रहीं थीं। अलबत्ता, पिता मुनव्वर खान अपने परिजनों, रिश्तेदारों को बेटे की तबीयत में सुधार होने का दिलासा देते रहे। मगर, बेटे की सांसें थमने और आंखें बंद होने के बाद वो टूट गए। इसके बावजूद शहर में अमन-चैन बनाए रखने की अपील की।
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पहले पत्नी अब बेटा छोड़ गया साथ
जवान बेटे के पार्थिव शरीर को कंधा देना एक पिता के लिए बहुत बड़ा बोझ होता है। जब पिता मुनव्वर खान ने बेटे को कंधा दिया तो वह फूट-फूटकर रोने लगे। दो साल में मुनव्वर परिवार में यह दूसरी सबसे बड़ी घटना है। दो साल पहले मुनव्वर के बेटे आमिर अपनी मां सितारा व पत्नी के साथ बाइक से डिबाई (बुलंदशहर) जा रहे थे, तभी बाइक असंतुलित हो गई। आमिर सड़क किनारे जा गिरे और मां व पत्नी सड़क पर गिर गए। दूसरी दिशा से आ रहे ट्रक ने दोनों को कुचल दिया। इसमें दोनों की मौत हो गई। अब बेटा तारिक भी दुनिया छोड़ गया।
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दोपहर बाद से बेटे को नहीं देखा था
मुनव्वर खान ने अपने बेटे तारिक को आखिरी बार शुक्रवार सुबह देखा था। बकौल मुनव्वर, ‘उसकी सांसें चल रही थीं। मगर दोपहर बाद अपने बेटे को नहीं देखा था, क्योंकि बेटे के स्वास्थ्य संबंधी दूसरे कामों में व्यस्त हो गया था’।
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