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ज्यादा फीस वसूली तो स्कूल प्रबंधकों पर होगी कार्रवाई

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डीएम ने विद्यालय संचालकों को मनमानी फीस वसूलकर बच्चों एवं अभिभावकों पर बोझ बढ़ाने से बाज आने को कहा है। जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में प्रबंधकों को निर्धारित दुकान से पुस्तक, जूते, मोजे एवं यूनिफार्म खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य न करने के भी निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सभी को एनसीईआरटी का सिलेबस लागू करने को कहा गया है। डीएम ने स्पष्ट कहा कि आदेशों का उल्लंघन होने पर जांच कराकर संबंधित संस्था के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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सोमवार को समिति की बैठक में डीएम चंद्रभूषण सिंह ने स्पष्ट कहा कि विद्यालयों द्वारा बच्चों और अभिभावकों पर बेवजह का बोझ नहीं डाला जाए। विद्यालय प्रबंधन अभिभावकों को किसी निर्धारित दुकान से पुस्तकें, जूते, मोजे व यूनिफार्म आदि खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा। यदि निर्धारित प्रावधानों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो अधिकारियों द्वारा जांच कराई जाएगी। बेहतर होगा कि विद्यालय प्रबंधन खुद ही इसमें सुधार कर लें। फीस में बढ़ोत्तरी पिछली साल की अपेक्षा शिक्षकों के वेतन में वृद्धि का प्रतिशत अथवा 12 से 35 फीसदी अधिकतम जो भी कम हो, की सीमा तक कर सकते है, लेकिन उसमें उन्हें बेहतर सुविधाएं भी देनी पड़ेगी।
वाहनों की पार्किंग, बसों में सीसीटीवी कैमरे, बसों में अटैंडेंट होना आवश्यक है। सभी सीबीएसई स्कूलों में एनसीआरटी की पुस्तकों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाय। यह भी निर्णय लिया गया कि सभी सीबीएसई और आईसीएसई विद्यालयों की जीपीएस स्थिति एवं विद्यालयों में प्रवेश क्षमता की स्थिति प्राप्त की जाए ताकि आरटीई के अंतर्गत प्रवेश हेतु प्राप्त आवेदकों को उनके घर के निकट विद्यालय मे प्रवेश दिलाया जा सके। यह भी निर्णय लिया गया कि प्रत्येक वर्ष विद्यालयों की शुल्क वृद्धि के लिए दिसंबर की सीपीआई इन्डेक्स को आधार माना जाएगा। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी अनुनय झा समेत अन्य अफसर व स्कूल प्रबंधक व प्रधानाचार्य मौजूद थे।
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