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अलीगढ़ : न आरोग्य मित्र और न ही सिस्टम में जान, गरीब कैसे होंगे आयुष्मान

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सरकारी सिस्टम की लापरवाही एवं आरोग्य मित्रों (आयुष्मान मित्र) की कमी की वजह से निर्धन परिवार के बीमार लोग आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना एवं मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के लाभ से वंचित रह जाते हैं। कई बार उनको उपचार तो मिल जाता है, लेकिन उसके लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है।
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स्थिति का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि जिले में 12.20 लाख में मात्र 2.80 लाख लोगों के ही कार्ड बने हैं। समय से पेमेंट नहीं मिलने से प्राइवेट अस्पताल गरीबों को उपचार देने से मुंह मोड़ रहे हैं। चंद रोज पहले अलीगढ़ में फर्जी आयुष्मान कार्ड बनने की शिकायत सामने आई थी। आयुष्मान कार्ड धारकों को भर्ती में आनाकानी करने की शिकायत आम है। सरकारी अस्पतालों में तो विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव है।
अंतत: गंभीर मरीजों को आयुष्मान योजना में शामिल प्राइवेट अस्पतालों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। जनपद में करीब 55 सरकारी एवं प्राइवेट अस्पताल योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं। अस्पतालों द्वारा अधिक क्लेम किए जाने की शिकायतें भी सामने आती हैं। एक बड़ी शिकायत यह भी है कि अस्पतालों का पेमेंट महीनों तक फंसा कर रखा जाता है। लाखों की धनराशि फंसे होने के कारण कुछ प्राइवेट अस्पताल आयुष्मान योजना से किनारा करने पर भी विचार कर रहे हैं।
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चार साल में 37113 लोग हुए हैं लाभान्वित
आयुष्मान योजना से पिछले चार साल में 37113 लोग लाभान्वित हुए हैं। मिथराज हॉस्पिटल में ही अब तक 12 हजार से अधिक लोगों ने उपचार कराया है। प्राइवेट हॉस्पिटल की श्रेणी में मिथराज हॉस्पिटल को शासन द्वारा दो बार गोल्ड मेडल दिया जा चुका है। सरकारी अस्पतालों की श्रेणी में पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय को इस साल गोल्ड मेडल मिला है। जीवन ज्योति में भी योजना का लाभ काफी मरीजों को मिला है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अतरौली में काफी लोगों को योजना का लाभ मिला है।
आयुष्मान मित्र की भर्ती नहीं होने से भी परेशानी
आयुष्मान कार्ड धारकों को लाभ दिलाने के लिए सभी राजकीय अस्पतालों में एक-एक आयुष्मान मित्र तैनात करने का प्रावधान है। कार्ड बनवाने से लेकर उपचार दिलाने तक में इनकी भूमिका होती है। दुखद तस्वीर यह है कि अधिकतर अस्पतालों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आयुष्मान मित्र ही तैनात नहीं हैं। जन सेवा केंद्रों द्वारा भी आयुष्मान कार्ड बनवाने में रुचि नहीं दिखाई जा रही है। इसकी वजह से भी बड़ी संख्या में निर्धन परिवार के लोग योजना के लाभ से वंचित हैं।
- पिछले छह महीने में 3324 आयुष्मान कार्ड धारकों की डायलिसिस की है। 53.9 लाख रुपये से अधिक का भुगतान बकाया है। वह भी उस कंडीशन में जबकि बिल पर किसी तरह की आपत्ति नहीं है और सभी पास हो गए हैं। एग्रीमेंट में दस दिन के अंदर धनराशि भुगतान का प्रावधान है। निकट भविष्य में आयुष्मान कार्डधारकों की डायलिसिस बंद करने एवं आयुष्मान योजना के मरीजों को देखना बंद करने पर विचार कर रहा हूं।
- डॉ. राजेंद्र वार्ष्णेय, संचालक, मिथराज हॉस्पिटल
- प्राइवेट हॉस्पिटल के संचालक कभी-कभी पेमेंट नहीं मिलने की शिकायत करते हैं। आयुष्मान योजना के पेमेंट से संबंधित सारे कार्य लखनऊ में होते हैं, इसलिए उनकी कॉपी को अधिकारियों के ध्यानार्थ भेज देता हूं। फर्जी क्लेम का कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं है। किसी तरह की शिकायत आती है तो जांच कराएंगे। आयुष्मान कार्ड बनाने में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है। रुचि नहीं लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है।
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- डॉ. दुर्गेश कुमार, नोडल अधिकारी, आयुष्मान योजना
आयुष्मान कार्ड बनवाने की प्रक्रिया..
- व्यक्तिगत पहचान के लिए आधार कार्ड अनिवार्य।
- परिवार की पहचान के लिए राशन कार्ड, प्रधानमंत्री का पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल अनिवार्य।
कहां बनते हैं आयुष्मान कार्ड
- सूचीबद्ध अस्पतालों एवं जन सेवा केंद्रों पर आयुष्मान कार्ड नि:शुल्क बनते हैं।
- विशेष अभियान के अंतर्गत कैंप लगाकर कार्ड बनाए जाते हैं।
योजना अंतर्गत अनुमन्य सुविधाएं
- प्रति परिवार प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक की नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा।
- केवल भर्ती मरीजों को ही नि:शुल्क उपचार की सुविधा।
- गंभीर बीमारियों जैसे हृदय, किडनी रोग, घुटना प्रत्यारोपण, कैंसर, मोतियाबिंद एवं सर्जरी आदि के उपचार की सुविधा।
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