आज (शनिवार) नाग पंचमी है। इसलिए आज श्रद्धालु घरों में विशेष पूजा पाठ करेंगे। इसके साथ ही रक्षाबंधन पर नदी या प्रवाहित जल में सिराहे जाने वाले जौ भी आज बोए जाएंगे। वहीं कई श्रद्धालु ऐसे भी हैं जो आज के दिन सपेरों का इंतजार करते हैं। उनके नाग देवता को दूध पिलाकर घर की सुख समृद्धि की कामना करते हैं।
श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि जो भी इस दिन श्रद्धा व भक्ति से नाग देवता का पूजन करता है। उसे व उसके परिवार को कभी भी सर्प भय नहीं होता। उन्होंने पूजन विधि साझा करते हुए बताया कि नागपंचमी पर सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद सबसे पहले भगवान शंकर का ध्यान करें। नागों की पूजा शिव के अंश के रूप में और शिव के आभूषण के रूप में ही की जाती है, क्योंकि नागों का कोई अपना अस्तित्व नहीं है। इसलिए पहले भगवान शिव का पूजन करेंगे। शिव का अभिषेक करें, उन्हें बेलपत्र और जल चढ़ाएं। इसके बाद शिवजी के गले में विराजमान नागों की पूजा करें। नागों को हल्दी, रोली, चावल और फूल अर्पित करें। इसके बाद चने, खील, बताशे और जरा सा कच्चा दूध प्रतीकात्मक रूप से अर्पित करेंगे। संभव हो तो नाग को दूध पिलाएं।
घर के मुख्य द्वार पर गोबर, गेरू या मिट्टी से सर्प की आकृति बनाएं और इसकी पूजा करें। घर के मुख्य द्वार पर सर्प की आकृति बनाने से जहां आर्थिक लाभ होता है, वहीं घर पर आने वाली विपत्तियां भी टल जाती हैं। इसी के साथ आज ही के दिन पूजा पाठ करने के बाद श्रद्धालु पार्क या खेत से मिट्टी लाकर रक्षाबंधन के जौ को बोने की परंपरा निभाते हैं। रक्षाबंधन तक यह जौ अंकुरित होकर जितने बड़े होते हैं, कहा जाता है कि उतनी ही सुख समृद्धि घर परिवार में आती है।
पं. हृदय रंजन शर्मा ने कहा कि अगर कुंडली में राहू केतु की स्थिति ठीक ना हो तो इस दिन विशेष पूजा का लाभ पाया जा सकता है। जिनकी कुंडली में विषकन्या या अश्वगंधा योग हो। ऐसे लोगों को भी इस दिन पूजा करनी चाहिए। जिनको सांप के सपने आते हों या सर्प से डर लगता हो तो ऐसे लोगों को इस दिन नागों की पूजा विशेष रूप से करना चाहिए।