अमुटा चुनाव को लेकर जानकारी देते प्रो निसार अहमद खान, प्रो चांदनी बी, डॉ. ओबैद, डॉ. साद।
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (अमुटा) की चुनाव प्रक्रिया शुरू न होने पर अब चुनाव को लेकर संशय के बादल गहरा गए हैं। संभावित प्रत्याशियों ने एएमयू में लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया है। कहा, 15 सितंबर को होने वाले चुनाव को रोकने की कवायद हो रही है। इसमें नीचे से लेकर शीर्ष तक की मिलीभगत होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
अलग-अलग पदों के प्रत्याशी प्रो. निसार अहमद खान, प्रो. चांदनी बी, डॉ. ओबैद अहमद सिद्दीकी, डॉ. साद बिन जावेद, डॉ. जमील अहमद का कहना है कि अमुटा संविधान के मुताबिक कार्यकारिणी का कार्यकाल दो वर्ष का होता है। वर्ष 2018 में हुए चुनाव की कार्यकारिणी का कार्यकाल अप्रैल 2020 में ही समाप्त हो गया था, लेकिन कोरोना महामारी का बहाना देकर चुनाव का वक्त टाला गया। 1500 से अधिक शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करने वाली अमुटा के नए पदाधिकारियों का चुनाव न कराने पर शिक्षकों में रोष था। 31 अगस्त को मुख्य चुनाव अधिकारी ने अमुटा के चुनाव का एलान कर दिया, लेकिन न तो मतदाताओं की सूची प्रदर्शित की गई और न ही नए मतदाताओं को फॉर्म दिए गए। प्रत्याशियों ने आरोप लगाया कि जब अमुटा का कार्यकाल खत्म हो गया तो विश्वविद्यालय प्रशासन उसे बजट क्यों मुहैया कराता रहा। चार साल का बजट करीब 86 लाख रुपये का होता है, जिसका अभी तक ऑडिट नहीं हुआ है। अगर हुआ तो उसे जनरल बॉडी की मीटिंग में पेश किया जाए। इसमें भी धांधली की आशंका है। प्रत्याशियों ने धमकी दी है कि अगर 15 सितंबर तक चुनाव नहीं कराया गया तो आंदोलन करने से गुरेज नहीं करेंगे। एएमयू में लोकतंत्र की बहाली के लिए जो भी करना होगा, उसे किया जाएगा। लोकतंत्र का दम घुटने नहीं देंगे। अगर तय तिथि को अमुटा के चुनाव नहीं होते हैं तो विवि प्रशासन द्वारा वर्तमान अमुटा सचिव की मान्यता खारिज कर दे तथा तबत क सदस्यता शुल्क की राशि को रिलीज किए जाने पर रोक लगा दे।