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प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में जज रहते हुए सर सैयद ने देखा था एएमयू का सपना

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दीपक शर्मा
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह में 22 दिसंबर को संबोधन कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (बनारस) का एएमयू और एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद से गहरा नाता है। यह नाता शताब्दी वर्ष समारोह पर और ताजा हो गया है।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद खान ने एएमयू जैसे आधुनिक शिक्षण संस्थान का सपना बनारस की धरती पर ही देखा था। एएमयू के इतिहास के मामलों के जानकार डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि सन 1864 से 1876 तक सर सैयद अहमद बनारस में जज के पद पर तैनात थे। इसी दौरान वह अपने दोनों बेटों सैयद हामिद और सैयद महमूद के साथ इंग्लैंड की यात्रा पर गए थे। 18 महीने इंग्लैंड में रहने के दौरान उन्होंने ऑक्सफोर्ड और कैंब्रिज विश्वविद्यालय को देखा। इंग्लैंड से लौट कर आने के बाद उन्होंने 1873 में मोअम्डन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की फंड कमेटी की बैठक में कहा कि वह भविष्य का एक आधुनिक विश्वविद्यालय ऑक्सफोर्ड और कैंब्रिज की तरह ही देखना चाहते हैं और उसकी स्थापना करना चाहते हैं। इस तरह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना का विचार बनारस में रहते हुए सर सैयद के जेहन में आ गया था।
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डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि बनारस में रहने के दौरान ही वह काशी के राजा शिव प्रसाद के संपर्क में आए और राजा साहब से उनकी गहरी मित्रता हो गई। रिटायर होने के बाद जब उन्होंने अलीगढ़ आ कर 1877 में कॉलेज की स्थापना की तो उसमें राजा शिव प्रसाद भी मौजूद थे। उस समय अलीगढ़ बनारस के मुकाबले आधुनिक नहीं था। यहां पर संसाधन बहुत कम थे। तब कॉलेज की स्थापना के समारोह में राजा शिवप्रसाद ने ही शामियाना उपलब्ध कराया था। राजा शिव प्रसाद के नाम का एक पत्थर आज भी विश्वविद्यालय के स्ट्रैची हॉल में लगा हुआ है। इस तरह बनारस और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का संबंध आपस में बहुत गहरा है। यह एक संयोग ही है कि बनारस संसदीय क्षेत्र से प्रतिनिधित्व करने वाले देश के प्रधानमंत्री एएमयू के शताब्दी वर्ष समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधन कर रहे हैं। इस अवसर पर यह सभी पुरानी यादें एक बार फिर से ताजा हो हो उठी हैं।
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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पढ़कर एएमयू में दी सेवाएं
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कई ऐसे विद्वान और शिक्षक प्रोफेसर रहे हैं, जिन्होंने अपनी शिक्षा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से ग्रहण की है। हिंदी के प्रखर विद्वान, कवि और एएमयू हिंदी विभाग के पूर्व चेयरमैन डॉ. रविंद्र भ्रमर ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से ही शिक्षा ग्रहण की थी। जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर एसए आजमी ने भी अपनी मेडिकल की पढ़ाई बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से ही पूरी की है।
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